मैनपुरी में SIR अभियान पर देरी, डिंपल यादव ने उठाए सवाल

मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर SIR अभियान के दूसरे चरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने देरी से शुरू हुए इस अभियान और नोटिस जारी करने की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है, जिससे 'नो-मैपिंग' मतदाताओं को प्रभावित होने का आरोप लगाया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखा है. इस पत्र में सांसद ने मैनपुरी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार को जनपद में चल रहे एसआईआर अभियान के दूसरे चरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि नो-मैपिंग वाले वोटरों के लिए बहुत देरी से नोटिस जारी किया जा रहा है.

मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर SIR अभियान के दूसरे चरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने देरी से शुरू हुए इस अभियान और नोटिस जारी करने की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है, जिससे ‘नो-मैपिंग’ मतदाताओं को प्रभावित होने का आरोप लगाया है.

एसआईआर अभियान को लेकर ऐसा कहा जा रहा है कि यह काम करीब 10 दिनों की देरी से शुरू किया गया है. मौजूदा सिस्टम के तहत, हर असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर हर दिन सिर्फ़ करीब 150 नोटिस जारी कर सकता है. डिंपल ने कहा कि इस तरह के नोटिस जल्द से जल्द जारी किए जाएं.

डिंपल यादव ने पत्र में क्या लिखा?
डिंपल यादव ने अपने पत्र में लिखा कि एसआईआर का दूसरा चरण लगभग दस दिन की देरी से शुरू हुआ, जिससे पूरे अभियान की समय-सारिणी प्रभावित हुई है. वर्तमान व्यवस्था के तहत, प्रत्येक सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (AERO) प्रतिदिन औसतन केवल 150 नोटिस ही जारी कर रहा है. इन नोटिसों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है, जिसे सांसद ने अव्यवहारिक बताया है.

डिंपल यादव ने कहा कि इस तरह काम करने से जनपद के सभी नो-मैपिंग मतदाताओं के मामलों का समय पर निस्तारण नहीं हो सकेगा. डिंपल ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्य प्रणाली असंतोषजनक है. ऐसा काम करने से एसआईआर अभियान का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है.

रामगोपाल यादव ने भी खड़े किए थे सवाल
डिंपल यादव से पहले राम गोपाल यादव ने कहा था कि देश में SIR कराने की कोई ज़रूरत नहीं है. जो यह प्रक्रिया चल रही है वह “सत्ता में बने रहने के लिए हथकंडे” हैं. समाजवादी सांसद ने आगे कहा कि अगर कोई हथकंडों से सत्ता में आता है, तो देश में नेपाल और बांग्लादेश जैसे नतीजे देखने को मिलेंगे.

यादव ने कहा, “SIR की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं थी. क्या 2014 से पहले SIR हुआ था?. ये सब सत्ता में बने रहने के हथकंडे हैं. मैंने सर्वदलीय बैठक में भी कहा था कि अगर कोई सामान्य तरीके से वोटों से सत्ता में आता है, तो कोई इसका विरोध नहीं करता, लेकिन अगर कोई हथकंडों से सत्ता में आता है, तो लोगों ने नेपाल और बांग्लादेश में इसके नतीजे देखे हैं.

6 फरवरी तक दर्ज करा सकते हैं आपत्तियां
इससे पहले, उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) नवदीप रिन्वा ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि उन वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं जिनके 2026 के चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में दिए गए डिटेल्स 2003 के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं. उत्तर प्रदेश में SIR एक्सरसाइज के लिए दावे और आपत्तियों की अवधि 6 जनवरी को शुरू हुई और 6 फरवरी तक चलेगी. उत्तर प्रदेश की चुनावी सूची का फाइनल पब्लिकेशन 6 मार्च को किया जाएगा.

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