शादी के सिर्फ 5 महीने बाद तलाक की मांग, 84 दिन साथ रहने के बावजूद नहीं बने शारीरिक संबंध
कोर्ट की ओर से कहा गया कि दंपत्ति की ओर से शारीरिक संबंध न बनने का कारण नहीं बताया गया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शादी के बाद पति-पत्नी के बीच तालमेल की कमी और आपसी मतभेद कई बार रिश्ते को ऐसे मोड़ पर पहुंचा देते हैं, जहां साथ रहना मुश्किल हो जाता है।
ऐसा ही एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आया, जिसमें एक दंपत्ति ने शादी के कुछ महीनों बाद ही आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया। दोनों का कहना था कि वे 84 दिन तक साथ रहे, लेकिन उनके बीच शारीरिक संबंध नहीं बने। आपसी तालमेल की कमी और मतभेदों के चलते उन्होंने वैवाहिक रिश्ते को आगे बढ़ाना असंभव बताया।
इस मामले में दंपत्ति ने मई 2026 में आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, इस मामले में अदालत ने क्या अंतिम आदेश दिया और तलाक की अर्जी पर किस आधार पर फैसला सुनाया, इसे समझने के लिए मामले के न्यायिक आदेश की सटीक जानकारी जरूरी है।
तीस हजारी कोर्ट स्थित फैमली कोर्ट ने याचिका को खारीज कर दिया है. कोर्ट की ओर से कहा गया कि दंपत्ति की ओर से शारीरिक संबंध न बनने का कारण नहीं बताया गया. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों दंपत्ति को तलाक के लिए मंजूरी दे दी. हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम में बड़ा फेरबदल करते हुए दंपत्ति को एक साल से पहले इस तलाक की मंजूरी दे दी.
जस्टिस विवेक चौधरी और रेणु भटनागर ने सुनाया फैसला
जस्टिस विवेक चौधरी और रेणु भटनागर ने ये फैसला सुनाया है. बेंच ने कहा कि दो जवान लोगों के जीवन का सवाल होता है, वहां एक साल का इंतजार सही नहीं है. उनको नई जिदंगी शुरू करने का मौका दिया जाना चाहिए. ये बात कानून और समाज के हित में है. ऐसे रिश्तों का कोई महत्व नहीं है, जो कानून के सख्त नियमों के कारण कागजों पर बने रहें.
जहां शुरुआत ही खराब हो, वहां जबरन कागजी बंधन सही नहीं- कोर्ट
बेंच ने कहा कि पारीवारिक संबंधों पर ये एक साल साथ रहे की कानूनी बंदिश इसलिए लगाई गई थी, ताकि पति-पत्नी को फिर से नया जीवन शुरू करने का अवसर मिल सके. यहां 84 दिन साथ में रहने के बाद भी दंपत्ति से शारीरिक संबंध नहीं बनाए, जहां शुरुआत ही खराब हो, वहां जबरन कागजी बंधन सही नहीं है. ऐसे हालात में तलाक की याचिक एक साल पहले ही मंजूर कर लेनी चाहिए.
हाईकोर्ट की बेंच ने तीस हजारी स्थित फैमली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो इस दंपत्ति की तालाक याचिका को तुरंत स्वीकार करे. बेंच ने कहा कि अब इस दंपत्ति का समय न बर्बाद किया जाए. बता दें कि 30 अगस्त को फैमली कोर्ट ने दंपत्ति की याचिका खारीज कर दी थी.



