दिल की सेहत को न करें नजरअंदाज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह दिन-रात बिना रुके शरीर के हर हिस्से तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। हम अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन अक्सर अपने दिल की सेहत पर तब ध्यान देते हैं जब कोई परेशानी सामने आती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हृदय को स्वस्थ रखने के लिए बीमारी के लक्षणों का इंतजार करने के बजाय शुरुआत से ही जोखिम कारकों पर ध्यान देना अधिक उपयोगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय और रक्तवाहिका संबंधी रोग दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी स्थितियां भी आती हैं। उच्च रक्तचाप, अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन और अन्य जोखिम कारक हृदय रोगों की संभावना बढ़ा सकते हैं।
ब्लड प्रेशर को समझें
उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं होते। व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है, जबकि उसका रक्तचाप लंबे समय तक बढ़ा हुआ हो सकता है। लगातार उच्च रक्तचाप रक्तवाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराना महत्वपूर्ण है। यदि डॉक्टर ने रक्तचाप की दवा शुरू की है तो उसे अपनी मर्जी से बंद या कम नहीं करना चाहिए।
व्यायाम का मतलब सिर्फ जिम नहीं
स्वस्थ रहने के लिए महंगी जिम सदस्यता आवश्यक नहीं है। तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना, योग या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य शारीरिक गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं। जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उन्हें बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर के वजन, रक्तचाप और समग्र हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है।
धूम्रपान से दूरी जरूरी
तंबाकू हृदय स्वास्थ्य के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। धूम्रपान छोडऩा हृदय और फेफड़ों सहित पूरे शरीर के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कदम है। धूम्रपान छोडऩे में कठिनाई हो तो चिकित्सक या तंबाकू-निरोधक सहायता की मदद ली जा सकती है।
कब तुरंत चिकित्सा सहायता लें?
सीने में अचानक दबाव या दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी, अत्यधिक पसीना, अचानक कमजोरी, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी जैसे गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
खाने की थाली में सुधार जरूरी
दिल की सेहत के लिए भोजन की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। भोजन में हरी और अन्य सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। दूसरी तरफ अत्यधिक नमक, बहुत अधिक चीनी, ट्रांस फैट और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर है। घर का सामान्य भोजन भी स्वस्थ हो सकता है, यदि उसकी मात्रा और सामग्री संतुलित हो।
दिल की बीमारी केवल उम्र की समस्या नहीं
आम धारणा है कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों को होता है। वास्तव में जोखिम उम्र के साथ बढ़ सकता है, लेकिन अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से जुड़े कई जोखिम वर्षों पहले ही विकसित होने लगते हैं। दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना, लगातार तनाव में रहना, भोजन में अत्यधिक नमक और अस्वास्थ्यकर वसा का इस्तेमाल, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, पर्याप्त नींद न लेना और बढ़ता वजन हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दिल की देखभाल की शुरुआत किसी निश्चित उम्र में नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतों के साथ होनी चाहिए।
मिथक बनाम तथ्य
पतले व्यक्ति को हृदय रोग नहीं हो सकता। लेकिन शरीर का वजन केवल एक जोखिम कारक है, अन्य जोखिम भी महत्वपूर्ण होते हैं। रोज थोड़ा चलना पर्याप्त नहीं है। लेकिन नियमित शारीरिक गतिविधि स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, गतिविधि की मात्रा व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार तय की जा सकती है।
तनाव और नींद को भी समझें
लगातार तनाव और खराब नींद स्वस्थ जीवनशैली को प्रभावित कर सकते हैं। तनाव के कारण कुछ लोग अधिक खाना, धूम्रपान या अन्य अस्वास्थ्यकर आदतों की ओर जा सकते हैं। इसलिए काम के साथ आराम, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और परिवार के साथ समय भी जरूरी है।



