डबल इंजन सरकार, अमृतकाल और नलों से निकलता जहरीला पानी

  • इंदौर में जहरीले पानी से हो चुकी हैं डेढ दर्जन मौंते, अब नोएडा में 70 बीमार
  • देश के सबसे साफ शहर इंदौर के बाद स्मार्ट सिटी नोएडा के नलों से निकला जहरीला पानी
  • अगला नम्बर किस शहर का?
  • साफ शहर हो या स्मार्ट सिटी अगर बुनियादी ढांचा सड़ चुका है तो तमगे बेमानी हैं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 सेक्टर इलाके से एक बुरी खबर सामने आ रही है। खबर है कि दूषित पानी पीने की वजह से इलाके के लगभग 70 से ज्यादा लोग बीमार पड़ चुके हैं। इन लोगों में ज्यादइातर टाइफाइड, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी बीमारियों के सामने आयें हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण पीने के पानी में सीवेज का पानी मिल रहा है जिससे यह स्थिति पैदा हुई। अब सवाल यही उठता है कि जिस देश में अमृत काल का एलान हो चुका हो जहां शहरों को स्मार्ट और विश्वस्तरीय बताकर प्रचार के पोस्टर चमकाए जाते हों उसी देश में अगर नल खोलते ही सीवेज का पानी बहने लगे तो इसे हादसा नहीं सिस्टम की सड़ांध कहा जाएगा। इंदौर के बाद अब नोएडा से आई यह खबर सिर्फ़ स्थानीय प्रशासन की नाकामी नहीं बल्कि शहरी भारत के विकास माडल पर सीधा तमाचा है।

माडल सिटी में दूषित पानी

यह वही नोएडा है जिसे दिल्ली का माडल शहर कहा जाता है। जहां आईटी पार्क हैं, मल्टीनेशनल कंपनियां हैं और चौड़ी सड़कें हैं। हर चुनाव में विकास के बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन इस चमक दमक के नीचे जो असली तस्वीर है वह डरावनी है। सड़ी पाइपलाइन, लीक होता सीवेज और सोता हुआ प्रशासन। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटना अकेली नहीं है। कुछ ही समय पहले इंदौर जिसे लगातार देश का सबसे साफ शहर घोषित किया जाता रहा है वहां भी ऐसा ही मामला सामने आया था। यानी साफ शहर हो या स्मार्ट सिटी अगर बुनियादी ढांचा सड़ चुका है तो तमगे बेमानी हैं।

जनस्वास्थ्य आपातकाल!

यह सिर्फ पानी का संकट नहीं यह जनस्वास्थ्य आपातकाल है। पानी से फैलने वाली बीमारियां किसी भी शहर को घंटों में ठप कर सकती हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब लोग बीमार पड़े तब प्रशासन क्या कर रहा था? क्या पाइपलाइन की नियमित जांच हुई थी? क्या जल आपूर्ति और सीवेज लाइन की मैपिंग ठीक से की गई थी? और अगर खतरा पहले से था तो लोगों को चेतावनी क्यों नहीं दी गई? नोएडा की घटना एक बड़ा राजनीतिक सवाल भी खड़ा करती है कि जब विकास की राजनीति होती है तो फ्लाईओवर, मेट्रो और इमारतें दिखाई जाती हैं। लेकिन पानी, सीवेज और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दे हमेशा फाइलों में दबे रह जाते हैं।

शहरी सेहत पर सवाल?

आज सवाल यह नहीं कि दोषी कौन है। सवाल यह है कि क्या अगला नंबर किसी और शहर का होगा? क्या कल गुरुग्राम, बेंगलुरु या पुणे की बारी है? और क्या हर बार प्रशासन सिर्फ जांच के आदेश देकर बच निकलेगा? इंदौर के बाद नोएडा ने यह साफ कर दिया है कि भारत के शहर ऊपर से जितने आधुनिक दिखते हैं भीतर से उतने ही खोखले होते जा रहे हैं। अगर अब भी चेतावनी नहीं ली गई तो यह संकट सिर्फ 70 बीमार लोगों तक सीमित नहीं रहेगा यह पूरे शहरी भारत की सेहत पर हमला बन सकता है।

सीवेज मिला पानी पहुंचा

नोएडा के कई इलाकों में पाइपलाइन लीकेज के चलते घरों में पीने के पानी की जगह सीवेज मिला पानी पहुंचा। नतीजा 70 से ज़्यादा लोग बीमार उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायतों से अस्पतालों में भर्ती हुए। सवाल यह नहीं कि लोग बीमार क्यों पड़े सवाल यह है कि क्या अब भारत में नल से पानी पीना भी जोखिम भरा हो गया है?

25 हजार की आबादी वाला क्षेत्र

नोएडा का अल्फा-2 सेक्टर में करीब 25 हजार लोग रहते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई जगहों पर सीवर लाइन ढकी नहीं है जिसकी वजह से बार-बार पानी दूषित हो रहा है। क्षेत्र के निवासी दीपक नगर का कहना है कि लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं और पूरे इलाके में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्थिति तब और गंभीर हो गयी जब पास के डेल्टा सेक्टर में भी लगभग 30 लोग बीमार पड़ गए। शिकायतों के बाद ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी हरकत में आयी और एक लीकेज को ठीक कराया गया। साथ ही अन्य इलाकों से भी पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। अथारिटी के जनरल मैनेजर विनोद शर्मा के मुताबिक अल्फा-2 सेक्टर से पानी के सैंपल लिए गए थे जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके अलावा जल आपूर्ति की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।

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