गिरफ्तार होंगे ज्ञानेश कुमार, EC-BJP की सांठ-गांठ एक्सपोज
बीजेपी राज में चुनाव आयोग गुलाम सा बन गया है। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी-शाह के इशारों पर ही चलता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी राज में चुनाव आयोग गुलाम सा बन गया है। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी-शाह के इशारों पर ही चलता है। बीजेपी की तरफ से जितना कहा जाएगा चुनाव आयोग को सिर्फ उतना ही करना है।
हालांकि इससे भी कहीं ज़यादा गंभीर आरोप अब तक चुनाव आयोग पर लग चुके हैं। लेकिन अब इन दिनों जो आरोप चुनाव आयोग और ECI ज्ञानेश कुमार पर लगा है उससे मोदी-शाह भी मुँह छुपाते हुए नजर आ रहे हैं। और विपक्ष हमला भले ही ज्ञानेश कुमार पर बोल रहा हो लेकिन बुरा भाजपा को लग रहा है।
इतना ही नहीं दोस्तों बल्कि बीजेपी वाले सफाई देने भी आ गए हैं बाकायदा चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। खैर भाजपाई चाहे जो भी करें लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने ज्ञानेश कुमार की पूरी पोल खोल दी है।
जिसके बाद अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। जेल भेजने की बात की जा रही है। दरअसल अब एक अखबार में छपी रिपोर्ट के बाद से चुनाव आयोग की एसआईआर में भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसआईआर शुरू होने के बाद से ही दो चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और इसके बदलते नियमों पर सवाल उठाए हैं। दावा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी की ओर से इससे जुड़े मुद्दों को 10 महीने में 14 बार उठाया गया।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से ही विपक्ष ने अब पूरी एसआईआर की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है और आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त, दो आयुक्तों वाले चुनाव आयोग में एसआईआर से जुड़े कई फैसलों पर सहमति नहीं थी। इन दलों ने एसआईआर की प्रक्रिया को गड़बड़ बताया है।
इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारत के चुनाव आयोग पर कड़ा हमला करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।
मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के इशारे पर लोकतंत्र को खत्म करने और राजनीतिक दलों में फूट डालने वाले गैंग के सरगना के तौर पर काम करने का आरोप लगाया।
उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की भी मांग की। ठाकरे की यह तीखी प्रतिक्रिया एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें तीन सदस्यीय चुनाव पैनल के भीतर बड़ी अंदरूनी कलह का खुलासा हुआ था।
ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा अंदरूनी तौर पर मामले को उजागर करने से पता चलता है कि यह प्रशासन कितना मनमाना था। उन्होंने हिम्मत दिखाने के लिए चुनाव आयुक्तों की तारीफ की।
मीडिया और जनता को डर से बाहर निकलना होगा। जब राजनीतिक डकैतों का एक गिरोह खुलेआम लोकतंत्र की हत्या कर रहा हो तो नागरिकों और प्रेस को संविधान की रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए।
वहीं इसी बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव आयोग को घेरा है, उन्होंने अखबार में छपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के दोनों सदस्यों से सलाह लिए बिना ही फैसले लिए जा रहे थे. उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस खबर पर संज्ञान लेकर मुकदमा चलाने की गुजारिश की है.
इसके साथ ही विपक्षी दलों से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया चलाने की भी मांग की. कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सवाल उठाया कि क्या पूरी संवैधानिक व्यवस्था ही चरमरा गई है?
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बड़ा हमला किया है. उन्होंने गुरुवार को एक्स पर पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ”संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है. न्याय जरूर होगा.’ वहीं कांग्रेस सांसद पप्पू यादव ने बेहद तीखा हमला करते हुए इसे राष्ट्र द्रोह बताते हुए चुनाव आयुक्त की फांसी की मांग की।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर छिड़े विवाद पर कहा है कि ये जो वोटों की मैनिपुलेशन चल रही है और वोट जोड़े जा रहे हैं, ये कोई आज की बात नहीं है कि CEC ज्ञानेश कुमार के समय में ये सब हो रहा है या इससे पहले CEC राजीव कुमार के कार्यकाल में हुआ.
2019 के लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर एक कैंपेन चलाया, जिसमें दिल्ली के अंदर वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं और ये तब से होता आ रहा है, जब से केंद्र में बीजेपी आई है.
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि जब लोग वोटिंग के दिन वोट डालने जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनका वोटर लिस्ट से नाम कट गया है, जबकि वे सालों से वोट देते आ रहे हैं. मगर अब ये एक कम्प्यूटरीकृत तरीके से पूरे देश में एक जगह बैठकर ये सब कंट्रोल किया जा रहा था, इसलिए आज ये पोल खुल गई है.
CEC ज्ञानेश कुमार ने इस बात से इनकार भी नहीं किया है कि उनके साथी चुनाव आयुक्तों ने उन्हें 14 बार पत्र लिखकर कहा था कि जो काम वे करवा रहे थे, वह गैर-कानूनी है. उन्होंने बताया था कि SIR प्रक्रिया गैर-कानूनी है और वे पूरे आयोग को मनमाने ढंग से चला रहे हैं. इसी को लेकर सौरभ भारद्वाज ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज हो.
इस पूरे मामले पर ज्ञानेश कुमार की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। लगातार उनके इस्तीफे की मांग हो रही है। विपक्षी नेताओं से लेकर जनता तक सड़कों पर है। कुलमिलाकर इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट ने चुनाव आयोग को बैठे बिठाए नई मुसीबत दे दी है। इतना ही नहीं इस खुलासे के बाद बीजेपी की हालत खराब नजर आ रही है। क्योंकि इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ेगा।



