भारत में वोट का विस्फोट : रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार

  • राहुल की हुंकार वोट चुराया जा रहा अब देश देगा जवाब
  • रामलीला मैदान से सत्ता को ललकार, निर्वाचन आयोग पर साधा निशाना
  • महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने सिस्टम को चुनौती देने का किया एलान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर आज सिर्फ एक राजनीतिक मार्च नहीं निकला। खुली बस में सवार विपक्षी नेताओं के साथ एक ऐसा सवाल भी रामलीला मैदान की ओर बढ़ा जो भारतीय लोकतंत्र की सबसे बुनियादी कसौटी से जुड़ा है।
वोट किसका अधिकार किसका और मतदाता सूची की जवाबदेही आखिर किसकी। कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने जब ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ का नारा बुलंद किया, तो निशाना सिर्फ निर्वाचन आयोग का एक पदाधिकारी नहीं था। निशाने पर वह पूरी व्यवस्था थी जिसकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास लोकतंत्र की असली पूंजी है।

वोट का अधिकार सरकारी कृपा नहीं संवैधानिक अधिकार है

आज के सीन किसी राजनीतिक फिल्म के चरमोत्कर्ष से कम नहीं था। खुली बस, चारों ओर झंडे, नारे लगाते कार्यकर्ता और आगे बढ़ता नेताओं का काफिला। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी और दूसरे विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बना दिया। रामलीला मैदान में हजारों की भीड़ जुटी। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव की तस्वीर में दुनिया बारूद, हथियार और युद्ध की आशंका देखती है तो भारत की इस लड़ाई का मैदान अलग है। यहां बंदूक की नली नहीं मतपेटी का सवाल है यहां गोली नहीं नागरिक के मताधिकार की ताकत है। दोनों संकटों की तुलना उनकी प्रकृति में नहीं उनके तनाव में की जा सकती है। क्योंकि लोकतंत्र में वोट का अधिकार कोई सरकारी कृपा नहीं नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

सरकार पर भारी पड़ गया राहुल का दांव

राहुल गांधी के लिए यह रैली एक बड़े राजनीतिक संदेश का अवसर थी। कांग्रेस लंबे समय से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाती रही है। इस बार इंडिया गठबंधन के अनेक दलों की मौजूदगी ने इस अभियान को व्यापक विपक्षी स्वरूप दिया। राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों से नाम हटाकर नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। राहुल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को विपक्ष की लड़ाई का प्रमुख मुद्दा बनाया। इससे पहले मार्च का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा था, ‘हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी भी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे, अब जवाब देश देगा।’ उन्होंने इस लड़ाई को किसी एक राजनीतिक दल का विरोध नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का अभियान बताया। राहुल का संदेश साफ है विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से संसद तक ले जाने की तैयारी में है।

खुली बस से रामलीला मैदान तक विपक्ष ने दिखाया दम

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से जुटे विपक्षी नेता खुले वाहनों में मिंटो रोड-कनॉट प्लेस क्षेत्र तक पहुंचे। वहां से समर्थकों के साथ मार्च रामलीला मैदान की ओर बढ़ा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी तथा वामपंथी और दूसरे विपक्षी दलों के नेता भी इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए। यह कोई साधारण राजनीतिक जमावड़ा नहीं था। कांग्रेस के लिए यह अपने नेतृत्व में विपक्ष को एक साझा मुद्दे पर खड़ा दिखाने का अवसर था। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के लिए भी यह बताने का मंच था कि मतदाता सूची और चुनावी निष्पक्षता का विवाद किसी एक राज्य की सीमा में कैद नहीं है। विपक्ष की रणनीति साफ दिखाई देती है—मतदाता सूची में कथित गड़बडिय़ों के मुद्दे को तकनीकी बहस से निकालकर जनाधिकार के प्रश्न में बदला जाए। आम नागरिक को यह समझाया जाए कि मतदाता सूची में उसका नाम केवल एक सरकारी प्रविष्टि नहीं, बल्कि कतांत्रिक भागीदारी का प्रवेशद्वार है।

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