भारत के एपस्टीन रामभवन दुर्गावति को मौत की सजा

  • एक-दो नहीं बल्कि 33 मासूमों का किया रेप, वीडियो बना कर बेंचे
  • इंजीनियर निकला-जल्लाद-मासूमों के साथ सेक्स करने के बाद बेचता था वीडियो
  • बांदा का यह मामला देश के भीतर छिपे उस स्याह सच को सामने लाता है जिसे देखने से समाज अक्सर डरता है

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दुनिया अभी जैफरी एपस्टीन की काली फाइलों के खौफ से बाहर नहीं निकली पायी थी कि उत्तर प्रदेश के बांदा से आयी इस खबर ने साबित कर दिया कि दरिंदगी की कोई सीमा नहीं होती। न भूगोल न भाषा न समाज। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि उस अंधेरे का खुला दरवाजा है जहां मासूमियत को फंसाया गया कैमरों में कैद किया गया और फिर बाजार में बेचा गया।
जैसे इंसान नहीं कोई वस्तु हों। यह कहानी किसी हालीवुड थ्रिलर की स्क्रिट नहीं बल्कि भारत की जमीन पर घटित वह सच्चाई है जिसने जांच एजेंसियों तक को झकझोर दिया। एक सरकारी विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर बैठा व्यक्ति जिसे समाज इंजीनियर साहब कहता था दरअसल मासूम बच्चों के जीवन का जल्लाद निकला। उसके साथ उसकी पत्नी जो जीवन की साथी कहलाती है इस भयावह अपराध की बराबर की साझेदार बनी। दोनों ने मिलकर भरोसे को जाल बनाया मासूमियत को शिकार बनाया और फिर कैमरे को हथियार बना दिया।

सिर्फ आरोपियों को सजा

यह फैसला एक सवाल भी छोड़ता है? क्या भारत में एपस्टीन जैसी और फाइलें अभी भी छिपी हैं? क्या यह सिर्फ एक मामला है या उस अंधेरे साम्राज्य की एक झलक जिसकी जड़ें हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा गहरी हैं? क्योंकि सच यही है जब अपराधी घर के अंदर छिपे हों तो समाज का हर दरवाजा शक के घेरे में आ जाता है।

एपस्टीन जैसे हालत किये रामभवन ने

केस की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 33 बच्चों के खिलाफ गंभीर यौन हमले समेत कई तरह के गलत काम किए। जिनमें से कुछ की उम्र महज तीन साल थी। जांच में यह भी पता चला कि कुछ पीडि़तों के प्राइवेट पार्ट्स पर यौन हमले के दौरान चोटें आई थीं। उनमें से कुछ अभी भी हास्पिटल में भर्ती हैं। पीडि़त अभी भी दरिंदों की वजह से हुए साइकोलॉजिकल ट्रामा से जूझ रहे हैं। दरिंदे साल 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के इलाके में एक्टिव रहे। आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। आरोपी बच्चों पर आनलाइन वीडियो गेम्स का एक्सेस और उन्हें लुभाने के लिए पैसे/गिफ्ट देने जैसे अलग-अलग तरीके अपनाता था।

पेन ड्राइव ने उगले राज

इस नरक का खुलासा तब हुआ जब एक पेनड्राइव ने वह राज उगला जिसे सुनकर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन तक सन्न रह गई। उस छोटी सी डिवाइस में 34 बच्चों के वीडियो और 679 तस्वीरें थीं। हर फ्रे म में एक चीख हर सेकंड में एक टूटता बचपन। यह सिर्फ डिजिटल फाइल नहीं थी यह भारत के सामाजिक ढांचे पर लगा वह खून का धब्बा था जिसे मिटाना आसान नहीं है। इस मामले की जड़ें भारत की सीमाओं से भी बाहर जाती दिखीं। शिकायत इंटरपोल के जरिए यह संकेत देती हुई दर्ज हुई कि यह अपराध सिर्फ स्थानीय विकृति नहीं बल्कि उस वैश्विक अंडरग्राउंड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जो बच्चों की अस्मिता को व्यापार में बदल देता है। ठीक वैसे ही जैसे एपस्टीन की फाइलों ने दुनिया के शक्तिशाली लोगों की परतें उधेड़ी। बांदा का यह मामला भारत के भीतर छिपे उस स्याह सच को सामने लाता है जिसे देखने से समाज अक्सर डरता है। पास्को कोर्ट ने इस अपराध को दुर्लभतम में दुर्लभ मानते हुए आरोपी दंपति को मौत की सजा सुनाई। यह फैसला सिर्फ दो अपराधियों की सजा नहीं बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ युद्ध की घोषणा है जो बच्चों को शिकार समझती है। अदालत ने यह भी माना कि यह अपराध इंसानियत के खिलाफ युद्ध जैसा है। जहां हर वीडियो एक हत्या के बराबर था भले ही शरीर जिंदा रहा हो।

टीम बना कर हुई जांच

जांच के दौरान फोरेंसिक एक्सपर्ट्स बच्चों के यौन शोषण के मामलों से निपटने वाले मेडिकल एक्सपर्ट्स और चाइल्ड प्रोटेक्शन अथारिटीज के साथ आसानी से तालमेल बिठाया गया जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 10 फरवरी 2021 को आरोपी रामभवन और उसकी पत्न्ी दुर्गावती के खिलाफ चार्जशीट फाइल की।

सरकार को देना होगा पीडि़तों को 10 लाख का मुआवजा

उत्तर प्रदेश के बांदा में पोक्सो मामलों के स्पेशल जज की कोर्ट ने दोनो आरोपियों रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को इंडियन पीनल कोड और पोक्सो एक्ट के तहत अलग-अलग अपराधों के लिए मौत की सजा सुना दी है। दोनों को बच्चों से गंभीर सेक्सुअल अपराध पोर्नोग्राफिक मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफिक सामग्री का स्टोरेज जैसे बेहद गंभीर मामलों में दोषी पाया। ट्रायल कोर्ट ने सरकार द्वारा हर पीडि़त को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि आरोपियों के घर से जब्त की गई कैश रकम  पीड़ितों में बराबर बांटी जाए। सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन ने 31 सितंबर 2020 को आरोपी रामभवन और दूसरे अनजान लोगों के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण पोर्नोग्राफिक मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल और इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण का मटीरियल बनाने और फैलाने के आरोपों में केस दर्ज किया।

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