जजों को संवेदनशील होना चाहिए, गाइडलाइंस बनें; HC के फैसले पर इतना क्यों भड़का SC”

पायजामे का नाड़ा खोलना या फिर स्तन दबाने को रेप का प्रयास नहीं माना जा सकता। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस विवादित फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की संवेदनशीलता को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जजों को संवेदनशील होना चाहिए। लैंगिक मामलों में सिर्फ कानून के आधार पर फैसला नहीं हो सकता बल्कि संवेदना भी रखनी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में इस बात ध्यान रखा जाए कि सिर्फ कानून के आधार पर नहीं बल्कि संवेदना दिखाते हुए केस पर विचार हो।बेंच ने कहा, ‘हम हाई कोर्ट के नतीजे से सहमत नहीं हो सकते, जिसका कहना है कि आरोप सिर्फ तैयारी के हैं। रेप का प्रयास नहीं था।’ बेंच ने कहा कि किसी भी मामले में मानवता, सामान्य समझ का परिचय देते हुए ही फैसला देना चाहिए। ऐसा करने से ही हम सही नतीजों पर बढ़ सकते हैं। बेंच ने कहा कि यह जरूरी है कि व्यवस्था में ही थोड़ा सुधार किया जाए और जजों में संवेदनशीलता बढ़ाने के प्रयास हों। चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि जजों को संवेदनशील होने की जरूरत है। ऐसा होना चाहिए कि न्यायपालिका के लोग संवेदना के साथ विचार करें।दरअसल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीते साल मार्च में ऐसा फैसला सुनाया था। पवन और आकाश नाम के दो लोगों पर आरोप था कि उन्होंने 11 साल की नाबालिग के स्तन दबाए थे। इसके बाद एक शख्स ने उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया था। इसके बाद जब वहां कुछ लोग पहुंचते दिखे तो वे भाग निकले। इस मामले में पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। दरअसल इस मामले में हाई कोर्ट के जज जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की टिप्पणी को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने फैसला सुनाते हुए जो बात कही थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी आपत्ति जताई।HC के जज ने क्या कहा था, जिस पर उठे थे सवालहाई कोर्ट के जज ने कहा था, ‘आकाश और पवन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के स्तन दबाए। आकाश ने उसके पायजामे को खिसका दिया। उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया। इस बीच वहां कुछ लोग पहुंच गए तो वे मौके से भाग निकले। यह तथ्य इतना बताने के लिए पर्याप्त नहीं है कि आरोपियों की मंशा रेप करने की ही थी। इन तथ्यों के अलावा ऐसा कोई फैक्ट नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी रेप ही करना चाहते थे।’ इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। उसने भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को आदेश दिया है कि कुछ गाइडलाइंस तैयार की जाएं। इससे जजों में संवेदनशीलता आए।”

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