सिर्फ 2 घंटे की बारिश… और डूब गया पूरा बदायूँ! ‘तीन साल बेमिसाल’ के दावों की खुल गई पोल
बदायूँ में करीब दो घंटे की तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। सड़कों, बाजारों और मोहल्लों में जलभराव से लोगों को भारी परेशानी हुई। नगर पालिका की ड्रेनेज व्यवस्था और विकास के दावों पर सवाल उठे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मानसून की पहली तेज बारिश ने बदायूँ शहर की तैयारियों और विकास के दावों की हकीकत सामने ला दी। करीब दो घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। सड़कें तालाब में बदल गईं, बाजारों में पानी भर गया और लोगों के घरों व दुकानों तक बारिश का पानी पहुंच गया। ऐसे में नगर पालिका और प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोग इसे हर साल दोहराई जाने वाली समस्या बताते हुए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
दो घंटे की बारिश ने खोल दी व्यवस्थाओं की पोल
बदायूँ में हुई तेज बारिश के बाद शहर के मुख्य बाजार, प्रमुख चौराहों, निचले मोहल्लों और आवासीय क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया। कई स्थानों पर जलभराव इतना अधिक था कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। सड़कें पानी में डूबने से दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच रास्ते में फंस गए। स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को घंटों तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पहली तेज बारिश में ही फेल हुई ड्रेनेज व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका हर वर्ष नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरी व्यवस्था धराशायी हो जाती है। बारिश का पानी कई घंटों तक सड़कों पर जमा रहा, जिससे यह साफ दिखाई दिया कि शहर में जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कई दुकानों और मकानों में भी पानी घुसने से लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
हर साल वही तस्वीर, लेकिन समाधान अब तक नहीं
शहरवासियों का कहना है कि बारिश के मौसम में बदायूँ के कई इलाके हर साल इसी तरह जलभराव की समस्या से जूझते हैं। इसके बावजूद न तो ड्रेनेज सिस्टम को स्थायी रूप से मजबूत किया गया और न ही नालों की नियमित सफाई का असर जमीन पर दिखाई देता है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
यातायात भी हुआ प्रभावित
जलभराव के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित रहा। कई वाहन पानी में बंद हो गए, जिससे लंबा जाम लग गया। बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को भी घंटों तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और स्कूल-कॉलेज के छात्रों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लोगों ने उठाए प्रशासन की तैयारियों पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाया जाता, तो हालात इतने खराब नहीं होते। लोगों का मानना है कि विकास के दावों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि हर वर्ष बारिश के दौरान शहर को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
प्रशासन ने शुरू कराए पानी निकासी के प्रयास
बारिश के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने का काम शुरू कराया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बारिश के बाद राहत कार्य शुरू करना पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि भविष्य में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए।
रिपोर्ट – संतुलित पाठक
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