मुख्य सचिव पद से JPSC अध्यक्ष तक पहुंचे एल. खियांगते, अब जांच में घिरे

झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा विवाद की जांच अब आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते तक पहुंच गई है. CID ने उनके आवास पर तलाशी लेने के साथ कई दौर की पूछताछ की है. हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा विवाद की जांच अब आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते तक पहुंच गई है. CID ने उनके आवास पर तलाशी लेने के साथ कई दौर की पूछताछ की है. हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. इस बीच राज्य की सबसे बड़ी भर्ती जांच का दायरा अब उस शख्स तक पहुंच चुका है, जिसने कभी राज्य की पूरी नौकरशाही का नेतृत्व किया था.

1988 बैच के झारखंड कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी लालबियाक्तलुआंगा (एल.) खियांगते, जो राज्य के मुख्य सचिव रह चुके हैं और बाद में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष बने, आज उसी आयोग से जुड़े भर्ती विवाद की जांच के केंद्र में हैं.

प्रशासनिक सेवा में खियांगते का सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा. उन्होंने झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और दिसंबर 2023 में राज्य के मुख्य सचिव बने. अक्टूबर 2024 में सेवानिवृत्ति के बाद सरकार ने उन्हें JPSC की कमान सौंपी थी.

यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि आयोग लगातार विवादों और लंबित भर्तियों के कारण सवालों के घेरे में था. उम्मीद थी कि एक अनुभवी IAS अधिकारी आयोग की विश्वसनीयता बहाल करेंगे.लेकिन हालात इसके उलट हो गए.

अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

खियांगते के कार्यकाल में आयोजित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद अभ्यर्थियों ने उत्तर कुंजी, OMR मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. देखते ही देखते मामला छात्र आंदोलन, न्यायालय और फिर CID जांच तक पहुंच गया. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, आयोग के अधिकारियों, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों और निजी एजेंसी पर कार्रवाई हुई। इसके बाद जांच की दिशा आयोग के सर्वोच्च पद तक पहुंच गई.

खियांगते के आवास की CID ने ली तलाशी

23 जुलाई को CID की टीम रांची के कांके रोड स्थित एल. खियांगते के आवास पहुंची. कई घंटे तक तलाशी चली. इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया. पूछताछ का केंद्र केवल एक परीक्षा नहीं था, बल्कि आयोग के प्रशासनिक निर्णय, परीक्षा संचालन की निगरानी, निजी एजेंसी को दी गई जिम्मेदारियां और उस दौरान अपनाई गई प्रक्रिया भी थी. यहीं से एल. खियांगते इस पूरे मामले के सबसे महत्वपूर्ण पात्र बन गए.

हालांकि JPSC अध्यक्ष किसी परीक्षा का संचालन स्वयं नहीं करते, लेकिन आयोग के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होने के कारण उसकी नीतिगत और प्रशासनिक जवाबदेही अंततः उसी पद तक पहुंचती है. यही वजह है कि जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णय किस प्रक्रिया के तहत हुए और आयोग की निगरानी व्यवस्था कैसे काम कर रही थी.

खियांगते को गिरफ्तार नहीं किया गया

CID ने उनसे एक बार नहीं, बल्कि कई दौर में पूछताछ की. सार्वजनिक रूप से एजेंसी ने पूछताछ का पूरा विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि उनके बयानों का मिलान दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों से किया जा रहा है. अब तक की जांच में उनके आवास की तलाशी ली गई है, उनसे पूछताछ हुई है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध किया है.

यही इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भी है. जांच का दायरा उनके दरवाजे तक जरूर पहुंचा है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में जांच के घेरे में होना और दोषी होना, दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं.

झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रहे

आज एल. खियांगते का नाम इसलिए चर्चा में नहीं है कि वे झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं, बल्कि इसलिए है कि जिस आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी, वही आयोग आज राज्य की सबसे बड़ी भर्ती जांच के केंद्र में है. आने वाले दिनों में यह जांच सिर्फ यह तय नहीं करेगी कि परीक्षा में क्या हुआ, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि आयोग के शीर्ष स्तर तक जवाबदेही किस हद तक तय होती है.

फिलहाल इतना तय है कि एल. खियांगते इस जांच के सबसे अहम चेहरों में से एक हैं. लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण यह तथ्य भी है कि उनके खिलाफ अब तक कोई आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है. यही कारण है कि इस पूरी कहानी का अंतिम अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है. PSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांगटे.

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