Lalan Singh ने दिया Nishant को राजनीति में आने का Offer, Nitish Kumar ने दे दिया बड़ा सिग्नल?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूजा पंडाल पहुंचने से पहले ही उनके बेटे निशांत कुमार वहां मौजूद थे...आम तौर पर राजनीति से दूर रहने वाले निशांत का इस तरह सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखना अपने आप में असामान्य माना गया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीते कल पटना में सरस्वती पूजा के मौके पर इस बार सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं दिखा…बल्कि बिहार की राजनीति का एक नया अध्याय भी खुलता नजर आया…

जहां JDUद्वारा आयोजित सरस्वती पूजा कार्यक्रम में जो दृश्य सामने आए…उन्होंने बिहार की सियासत को फिर से गर्म कर दिया…इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी तो स्वाभाविक थी…लेकिन उनसे पहले उनके बेटे निशांत कुमार का पूजा पंडाल में पहुंचना और फिर जेडीयू के शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रियाएं….इन सबने मिलकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी…

दरअसल, ये कार्यक्रम भले ही धार्मिक था…लेकिन इसमें होने वाले हर पल को राजनीतिक नजरिए से देखा गया…खासकर ऐसे समय में जब बिहार की NDA सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने की चर्चाएं पहले से ही चल रही हैं…ऐसे में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी और ललन सिंह का खुला इशारा…इसे सिर्फ संयोग मानना मुश्किल हो गया है….

कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा ये रही कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पूजा पंडाल पहुंचने से पहले ही उनके बेटे निशांत कुमार वहां मौजूद थे…आम तौर पर राजनीति से दूर रहने वाले निशांत का इस तरह सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखना अपने आप में असामान्य माना गया…वहीं जब नीतीश कुमार पूजा पंडाल पहुंचे…तो उन्होंने सबसे पहले बेटे को देखा और अपने अंदाज में पूछा कि…कब आए हो जी यहां?…तो इस पर निशांत कुमार ने जवाब दिया कि हो गया आधा घंटा….

बस ये छोटी-सी बातचीत कैमरों में कैद हो गई…लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत बड़े निकाले जाने लगे…जिसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या ये सिर्फ पारिवारिक बातचीत थी….या फिर इसके पीछे कोई संदेश छिपा था?…कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की और बिहार की सुख-समृद्धि की कामना की….मंच पर जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे…और राजनीति से जुड़े लोगों की नजरें हर चेहरे, हर हाव-भाव और हर शब्द पर टिकी हुई थीं…..क्योंकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीएम नीतीश कुमार बिना सोचे-समझे कोई कदम नहीं उठाते…अगर निशांत कुमार को इस तरह सार्वजनिक मंच पर लाया गया है….तो इसके पीछे कोई न कोई सियासी सोच जरूर है…

और हुआ भी कुछ ऐसा ही….एक ओर हर कोई इस कार्यक्रम में निशांत कुमार की मौजूदगी को लेकर चर्चा कर ही रहा था कि तभी पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित पल तब सामने आया…जब जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने खुले तौर पर निशांत कुमार की पीठ थपथपाई और कहा कि…अब मान जाइए और राजनीति में आ जाइए….

ये कोई हल्का-फुल्का मजाक नहीं था…ये बात कैमरों के सामने, सार्वजनिक मंच पर कही गई….यही कारण है कि इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है…क्योंकि, ललन सिंह जेडीयू के साधारण नेता नहीं हैं….वो पार्टी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं और नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं…ऐसे में उनके शब्दों को पार्टी लाइन से अलग नहीं देखा जा सकता….वहीं इस दौरान ललन सिंह के सीधे आमंत्रण पर निशांत कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया….न उन्होंने हां कहा और न ही ना कहा….बस हल्की-सी मुस्कान के साथ शांत खड़े रहे…..

राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि चुप्पी भी एक बयान होती है….अगर निशांत राजनीति से पूरी तरह दूर रहना चाहते…तो साफ मना कर सकते थे…लेकिन उनकी खामोशी ने अटकलों को और तेज कर दिया…राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये चुप्पी एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है…ताकि भविष्य के लिए रास्ता खुला रहे….वहीं यूं ललन सिंह का सार्वजनिक तौर पर निशांत कुमार को ये कहना कि…अब मान जाइए और राजनीति में आ जाइए…ये बयान ऐसे समय पर सामने आया है…जब बिहार में NDA के भीतर सब कुछ ठीक नहीं माना जा रहा….जेडीयू और बीजेपी के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं…..चाहे जातीय जनगणना हो, आरक्षण का सवाल हो या केंद्र-राज्य संबंध….या फिर हालही में नई सरकार के गठन के दौरान मंत्रालयों के बंटवारों को लेकर अनबन…..ये सब कुछ कई सवालों को जन्म देता है….

वहीं बीते कुछ महीनों से ये चर्चा भी चल रही है कि सीएम नीतीश कुमार बीजेपी की राजनीति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं…ऐसे में जेडीयू का अपना भविष्य सुरक्षित करने की रणनीति बनाना स्वाभाविक है और निशांत कुमार की संभावित एंट्री को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है….लेकिन, अब इसे लेकर राजनीतिक हलकों में ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या जेडीयू अब बीजेपी के खिलाफ अपने पत्ते खोल रही है?….तो देखिए, निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री का मतलब होगा कि सीएम नीतीश कुमार के बाद जेडीयू की कमान उनके बेटे के हाथ में सौंपना….अगर ऐसा होता है…तो ये बीजेपी की उस रणनीति को सीधी चुनौती होगी…जिसमें वो सहयोगी दलों को धीरे-धीरे कमजोर कर खुद मजबूत बनती है….

सीएम नीतीश कुमार दशकों से बिहार की कमान संभाले हुए हैं….लेकिन उम्र और बदलते राजनीतिक हालात के बीच ये सवाल लगातार उठता रहा है कि उनके बाद जेडीयू का चेहरा कौन होगा?…अब तक नीतीश कुमार खुद को परिवारवादी राजनीति से अलग दिखाते रहे हैं…..लेकिन हाल-फिलहाल में जो जिसे हुई हैं….वो ये साफ बता रहा है कि हालात बदल रहे हैं…और राजनीति में अक्सर हम जानते हैं कि सिद्धांत परिस्थितियों के हिसाब से बदलते हैं…अगर पार्टी और सत्ता को बचाने के लिए परिवार को आगे लाना जरूरी लगे…तो नीतीश कुमार ऐसा कदम उठा सकते हैं….

निशांत कुमार अब तक खुद को राजनीति से दूर रखते आए हैं…न उन्होंने चुनाव लड़ा, न किसी पार्टी पद पर रहे…लेकिन हाल के महीनों में उनका सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखना बढ़ा है…सरस्वती पूजा का मंच कोई साधारण मंच नहीं था…ये जेडीयू का आधिकारिक कार्यक्रम था…जहां मीडिया और पार्टी दोनों की नजरें थीं…यही वजह है कि इसे राजनीतिक ट्रायल रन के तौर पर देखा जा रहा है…

ऐसे में अगर जेडीयू ने भविष्य के लिए निशांत कुमार को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया, तो यह बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। बीजेपी अक्सर क्षेत्रीय दलों में नेतृत्व संकट का फायदा उठाती है। लेकिन अगर जेडीयू के पास स्पष्ट उत्तराधिकारी होगा, तो यह रणनीति कमजोर पड़ सकती है।

सरस्वती पूजा का ये कार्यक्रम शायद सिर्फ शुरुआत है…आने वाले दिनों में अगर निशांत कुमार और ज्यादा सार्वजनिक मंचों पर दिखते हैं…तो ये साफ हो जाएगा कि नीतीश कुमार ने हरी झंडी दे दी है…फिलहाल, न तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ कहा है और न ही निशांत कुमार ने……लेकिन बिहार की राजनीति में संकेत ही सबसे बड़ा बयान होते हैं…पटना की सरस्वती पूजा इस बार सिर्फ भक्ति का नहीं…बल्कि बिहार की राजनीति के भविष्य का मंच बन गई है…ऐसे में सवाल उठ रहा है कि….ललन सिंह का इशारा, निशांत की चुप्पी और नीतीश की मौजूदगी….क्या ये तीनों चीज मिलकर NDA में संभावित टूट और जेडीयू की नई रणनीति की कहानी लिखेंगे?…

 

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