Congress की तरह स्थानीय नेताओं पर Action लेंगे Raj Thackeray ? Sanjay Raut की बड़ी मांग
महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उफान पर है…बीते कई दिनों से BMC चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है…जहां मेयर की कुर्सी को लेकर हर दल अपने-अपने हिसाब से जोड़-तोड़ में जुटा हुआ है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उफान पर है…बीते कई दिनों से BMC चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है…जहां मेयर की कुर्सी को लेकर हर दल अपने-अपने हिसाब से जोड़-तोड़ में जुटा हुआ है…कहीं खुले गठबंधन हो रहे हैं…तो कहीं पर्दे के पीछे सियासी चालें चली जा रही हैं…इसी सियासी घमासान के बीच कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से एक ऐसा खेल सामने आया है…जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है…
दरअसल, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी MNS के साथ हाथ मिला लिया है…53 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी शिवसेना को MNS के 5 पार्षदों का समर्थन मिल गया है…इस समर्थन के बाद शिवसेना का आंकड़ा 58 तक पहुंच गया है और नगर निगम में उसकी स्थिति और मजबूत हो गई है…..MNS के इस फैसले को लेकर MNS नेता और पूर्व विधायक राजू पाटील ने बताया कि…पार्टी के नेता और पूर्व विधायक राजू पाटील ने साफ किया कि…ये फैसला पार्टी प्रमुख राज ठाकरे की अनुमति से लिया गया है…उन्होंने कहा कि नगर निगम में स्थिरता बनाए रखने और कामकाज को सुचारू रखने के लिए ये कदम उठाया गया है…वहीं शिवसेना सांसद और कल्याण से लोकसभा सदस्य श्रीकांत शिंदे ने भी ये साफ किया कि…ये समर्थन केवल शिवसेना और MNS के बीच है…किसी अन्य दल की कोई भागीदारी नहीं है…
अगर आंकड़ों की बात करें तो 122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना के 53 पार्षद चुने गए हैं…उसकी सहयोगी भाजपा को 50 सीटें मिली हैं….MNS के पांच पार्षदों के समर्थन से शिवसेना 58 के जादुई आंकड़े पर पहुंच चुकी है….वहीं दूसरी ओर शिवसेना (UBT) को 11 सीटें, कांग्रेस को 2 और NCP (SP) को सिर्फ एक सीट मिली है………..लेकिन दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है…वजह ये है कि कुछ ही दिन पहले, 15 जनवरी को हुए BMC चुनावों में MNS और शिवसेना (UBT) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था…उस वक्त दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ नहीं…बल्कि साथ मिलकर मैदान में उतरने का फैसला किया था…ऐसे में कल्याण-डोंबिवली में MNS का एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जाना उद्धव गुट के लिए किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा है…
इसी बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत का बड़ा बयान सामने आया है….संजय राउत ने दावा किया कि राज ठाकरे इस फैसले से नाराज हैं…उन्होंने कहा कि…राज ठाकरे बहुत व्यथित हैं जिस तरह से स्थानीय लोगों ने फैसला लिया है…संजय राउत ने ये भी कहा कि अगर किसी ने पार्टी की विचारधारा और पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर फैसला लिया है…तो उस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए….उन्होंने अंबरनाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि…जब कांग्रेस के 12 पार्षद भाजपा के साथ चले गए थे…तो कांग्रेस आलाकमान ने बिना देर किए उन पर कार्रवाई की थी…ठीक उसी तरह अब राज ठाकरे भी अपने नेताओं पर सख्त कदम उठा सकते हैं….
अंबरनाथ का मामला इस पूरे विवाद में बेहद अहम हो जाता है…ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी…शिवसेना ने वहां 27 सीटें जीती थीं…लेकिन इसके बावजूद सत्ता से बाहर रखने के लिए भाजपा ने अंबरनाथ विकास आघाड़ी का गठन किया…इस आघाड़ी में भाजपा के 14 सदस्य, कांग्रेस के 12 सदस्य, अजित पवार गुट की एनसीपी के 4 सदस्य और एक निर्दलीय पार्षद शामिल थे………इस गठबंधन की अगुवाई भाजपा के अभिजीत गुलाबराव करंजुले-पाटिल को सौंपी गई और इसकी जानकारी ठाणे जिला कलेक्टर को भी दी गई…इस गठबंधन के दम पर भाजपा ने नगर अध्यक्ष का पद भी अपने नाम कर लिया….लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये था कि ये गठबंधन राज्य स्तर के नेतृत्व की अनुमति के बिना बनाया गया था….
जिसके बाद कांग्रेस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया….महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की जानकारी दी….पत्र में साफ कहा गया कि…हमने कांग्रेस के झंडे पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं…लेकिन राज्य नेतृत्व को बताए बिना बीजेपी से गठबंधन कर लिया…ये मीडिया से पता चला…ये अच्छी बात नहीं है….राज्य अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर आपको पार्टी से निलंबित किया जाता है….
यही नहीं, कांग्रेस ने सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया…इस एक्शन से कांग्रेस का संदेश बिल्कुल साफ था कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर कोई भी फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा……..अब दोस्तों, यही उदाहरण कल्याण-डोंबिवली के मामले में भी दिया जा रहा है….संजय राउत के बयान से ये संकेत मिल रहा है कि राज ठाकरे भी अपने नेताओं के खिलाफ वैसी ही सख्ती दिखा सकते हैं…..राउत के मुताबिक, राज ठाकरे का मानना है कि अगर किसी ने पार्टी के खिलाफ जाकर निर्णय लिया है…तो उसे पार्टी में रहने का हक नहीं है…
संजय राउत ने यहां तक कहा कि MNS एक अनुशासित पार्टी है और वहां पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है…उन्होंने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने अंबरनाथ में अपने पार्षदों पर कार्रवाई की…उसी तरह MNS में भी जो पार्टी के खिलाफ काम करेगा, उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा….
इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी बड़ा बयान दिया है….उन्होंने कहा कि महापौर पद महायुति गठबंधन का ही होगा….जो भी पार्टी विकास के लिए शिवसेना का समर्थन करेगी…उसे साथ लिया जाएगा…उन्होंने साफ किया कि अभी महापौर, उपमहापौर और विभिन्न समितियों के अध्यक्ष पदों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है…श्रीकांत शिंदे के मुताबिक, इन पदों पर फैसला लेने का अधिकार एकनाथ शिंदे और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चौहाण के पास है…दोनों नेताओं की आज बैठक हो सकती है…जिसमें इन पदों से जुड़ी रूपरेखा तय की जाएगी…
इसी बीच मुंबई समेत राज्य के 29 नगर निगमों में आज मेयर पद के लिए लॉटरी प्रक्रिया होनी है…इस लॉटरी के जरिए ये तय किया जाएगा कि महापौर पद सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होगा….इसके बाद संबंधित कैटेगरी के उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे……लेकिन दोस्तों, असली सवाल ये है कि क्या राज ठाकरे वाकई कल्याण-डोंबिवली में एकनाथ शिंदे की शिवसेना से हाथ मिलाने वाले MNS नेताओं पर एक्शन लेंगे?….क्या वो भी कांग्रेस की तरह सख्त कदम उठाएंगे और अपने ही पार्षदों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएंगे?……….
क्योंकि, संजय राउत के बयान से ये साफ झलकता है कि राज ठाकरे इस पूरे घटनाक्रम से खुश नहीं हैं…राउत का कहना है कि राज ठाकरे मानते हैं कि ये न तो उनकी व्यक्तिगत राय है और न ही पार्टी की आधिकारिक नीति…अगर स्थानीय स्तर पर नेताओं ने मनमानी की है, तो उसके लिए उन्हें जिम्मेदारी भी लेनी होगी…
जबकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर राज ठाकरे अपने नेताओं पर कार्रवाई करते हैं…तो ये MNS के लिए एक बड़ा संदेश होगा…इससे पार्टी के अंदर अनुशासन मजबूत होगा और भविष्य में कोई भी नेता पार्टी लाइन के खिलाफ जाने से पहले सौ बार सोचेगा….वहीं दूसरी ओर, अगर राज ठाकरे कोई कार्रवाई नहीं करते हैं…तो विपक्ष को ये कहने का मौका मिल जाएगा कि MNS की कथनी और करनी में फर्क है……ऐसे में पार्टी की छवि को नुकसान भी हो सकता है……
कुल मिलाकर दोस्तों, कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का ये मामला सिर्फ एक स्थानीय गठबंधन का मुद्दा नहीं रह गया है….ये अब महाराष्ट्र की राजनीति में अनुशासन, नेतृत्व और पार्टी लाइन के सवाल से जुड़ गया है…..आने वाले दिनों में ये साफ हो जाएगा कि राज ठाकरे अपने नेताओं पर कांग्रेस की तरह नकेल कसते हैं या फिर इस मामले को यहीं खत्म कर देते हैं……लेकिन इतना तो तय है कि संजय राउत के बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है….सबकी नजर अब राज ठाकरे के अगले कदम पर टिकी है…क्या वो अंबरनाथ की तरह सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर कल्याण-डोंबिवली का ये गठबंधन यूं ही चलता रहेगा?



