अगले हफ्ते नौसेना का बड़ा आयोजन, युद्ध की नई तकनीकों पर मंथन
भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर बनाने और भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर बनाने और भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है।
भारतीय नौसेना का प्रमुख नवाचार और स्वदेशीकरण कार्यक्रम ‘स्वावलंबन 2026’ आगामी 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में देश की रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और ऐसी नई तकनीकों को विकसित करना है, जो भविष्य में नौसेना की जरूरतों को पूरा कर सकें।
भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी तकनीकों और देश में बने उपकरणों को बढ़ावा दे रहा है। भारतीय नौसेना भी इसी दिशा में काम कर रही है। ‘स्वावलंबन 2026’ के जरिए देश में विकसित तकनीकों, नए विचारों और आधुनिक रक्षा उपकरणों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और नई तकनीक विकसित करने वाले स्टार्टअप को अपनी क्षमताएं दिखाने का अवसर मिलेगा। इससे नौसेना और भारतीय उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिनके लिए भारत को दूसरे देशों पर कम निर्भर रहना पड़े।
स्वावलंबन कार्यक्रम का दायरा लगातार बढ़ा
स्वावलंबन कार्यक्रम का दायरा लगातार बढ़ रहा है. पहले संस्करण में करीब 800 लोगों ने हिस्सा लिया था, जबकि पिछले साल प्रतिभागियों की संख्या लगभग 3,000 तक पहुंच गई. इस साल 100 से ज्यादा स्टॉल लगाए जाने की उम्मीद है.
नौसेना के मुताबिक, iDEX यानी इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस के तहत भारतीय इनोवेटर्स से 4,000 से ज्यादा प्रस्ताव मिले हैं. करीब 150 MSME और स्टार्टअप भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं. 3,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं को आवश्यकता की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 1,900 करोड़ रुपए से अधिक के कॉन्ट्रैक्ट किए जा चुके हैं.
भविष्य की युद्ध तकनीकों पर खास जोर
इस बार भविष्य की युद्ध तकनीकों पर खास जोर रहेगा. इनमें क्वांटम पोजिशनिंग सिस्टम, हाई-पावर माइक्रोवेव आधारित डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम, एक्स्ट्रा-लार्ज ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल और स्वदेशी रैमजेट इंजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं.
नौसेना का कहना है कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. ड्रोन, मानवरहित सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस सेंसर समुद्री ऑपरेशन के तरीके बदल रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह अपनी जरूरतों के मुताबिक तकनीक विकसित करे और उन्हें जल्द से जल्द ऑपरेशन में शामिल करे.
नौसेना, उद्योग जगत तथा इनोवेटर्स के बीच बेहतर तालमेल
स्वावलंबन 2026 में तकनीक के विकास के साथ-साथ उसके तेजी से परीक्षण, उत्पादन और तैनाती पर भी जोर दिया जाएगा. इसके अलावा, नई तकनीकों में लगातार सुधार करने और नौसेना, उद्योग जगत तथा इनोवेटर्स के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर चर्चा होगी.
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में तीनों सेनाओं और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी स्वदेशी तकनीक विकसित करने वालों के साथ सीधे बातचीत का मौका मिलेगा. साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन की कमजोरियों और तकनीक के विकास एवं उत्पादन के लिए फंडिंग जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा.
नौसेना का लक्ष्य साफ
नौसेना का लक्ष्य साफ है भारत में विकसित तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर समुद्र में इस्तेमाल होने वाली भरोसेमंद सैन्य क्षमता में बदलना. इससे न सिर्फ विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि देश के रक्षा उद्योग और स्टार्टअप को भी नए अवसर मिलेंगे. इस तरह, स्वावलंबन 2026 भारतीय नौसेना की तकनीकी ताकत बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे ले जाने का अहम मंच बनेगा.



