BJP पर आक्रमक हुईं ममता, शाह को दी धमकी! ‘दुष्ट’ ताकतों को दिया अल्टीमेटम!

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है...जहां चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो....लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से पूरी ताकत झोंक दी है....

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है…जहां चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान भले ही अभी नहीं हुआ हो….लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से पूरी ताकत झोंक दी है….

खास तौर पर सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी जंग बेहद तीखी होती जा रही है…इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने पूरे राजनीतिक गलियारे में भूचाल ला दिया है और बंगाल की राजनीति एक बार फिर देश की सुर्खियों में आ गई है….

दरअसल, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर ऐसा बयान दे दिया…जिसे भाजपा ने खुली धमकी करार दिया है…ममता बनर्जी ने कहा कि अगर वो चाहतीं…तो अमित शाह को होटल से बाहर निकलने ही नहीं देतीं…ममता के इस बयान के सामने आते ही सियासी विवाद तेज हो गया….भाजपा ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला बयान बताया….जबकि TMC भाजपा पर इसे राजनीतिक संदर्भ से तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा रही है……

सबसे पहले आपको ममता बनर्जी का बयान बता देते हैं…जिसकी वजह से ये पूरा बवाल शुरू हुआ…तो हाल ही में एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला और उन्होंने कथित तौर पर कहा कि….अगर वो चाहतीं…तो शाह को उनके होटल से बाहर निकलने नहीं देतीं….इस बयान ने आग में घी का काम किया है…सीएम ममता का ये रुख ये दिखाता है कि वो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को ये संदेश देना चाहती हैं कि बंगाल में ममता बनर्जी का ही राज चलता है…भाजपा ने इसे लोकतंत्र की हत्या और खुली धमकी करार दिया है…जबकि TMC इसे भाजपा की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक स्वाभाविक आक्रोश बता रही है….

ममता बनर्जी का ये बयान ऐसे समय में आया है…जब बंगाल में चुनावी माहौल लगातार गरम होता जा रहा है…माना जा रहा है कि करीब दो महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है…ऐसे में हर बयान, हर भाषण और हर ट्वीट चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है…ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC अब भाजपा पर सीधे और आक्रामक हमले के मूड में नजर आ रही है…एक ओर ममता बनर्जी ने अमित शाह को सीधी धमकी दी…तो वहीं दूसरी तरफ 1 जनवरी को TMC के स्थापना दिवस के मौके पर ममता बनर्जी ने भाजपा पर खुलकर हमला बोलते हुए…

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि….तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में मातृभूमि और बंगाल की जनता की सेवा के उद्देश्य से की गई थी…ममता ने साफ शब्दों में कहा कि…मा, माटी, मानुष की पार्टी TMC ‘दुष्ट ताकतों’ के आगे नहीं झुकेगी….उनका ये बयान अब सीधे तौर पर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना माना जा रहा है…

ममता बनर्जी ने अपने संदेश में बंगाल के विकास, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और जनता की आवाज को दबाने की कोशिशों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही…उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के बलिदान को याद करते हुए कहा कि TMC ने हमेशा जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ी है और आगे भी जनता के साथ खड़ी रहेगी…ममता का ये संदेश साफ तौर पर चुनावी बिगुल फूंकने जैसा था…लेकिन, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह आक्रामक रणनीति पर उतर चुकी हैं…2021 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा ने लगातार केंद्र की एजेंसियों और चुनाव आयोग के जरिए TMC को घेरने की कोशिश की है…अब ममता उसी आक्रामक भाषा में जवाब देती दिखाई दे रही हैं…ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश बना रहे…

दूसरी ओर, TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है…उन्होंने कहा कि कोई भी अहंकारी या दमनकारी ताकत बंगाल की जनता के संकल्प को तोड़ नहीं सकती….अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई अपनी तीखी बहस का भी जिक्र किया…जिसने राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी…अभिषेक बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि…जब हमने बात रखनी शुरू की तो मुख्य चुनाव आयुक्त अपना आपा खो बैठे…वो मेरी बात पर गुस्सा होने लगे…मैंने उनसे कहा कि आप नॉमिनेटेड हैं और मैं जनता द्वारा चुना हुआ हूं…

आप अपने बॉस के प्रति जिम्मेदार हैं…मैं बंगाल की जनता के प्रति जिम्मेदार हूं…अगर उनमें हिम्मत है, तो मीटिंग की फुटेज सार्वजनिक करें…इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि..उन्हें इस संस्था और देश को बर्बाद करने के मिशन पर भेजा गया है। उन्होंने ढाई घंटे चली बैठक की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की चुनौती भी दी और दावा किया कि बैठक में वही बोलते रहे।

हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि…टीएमसी चुनाव से पहले माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है…वहीं ममता बनर्जी के शाह को धमकाने वाले बयान पर भाजपा भड़क उठी और सरकार बनाने का दावा ठोक दिया….BJP नेता और एक्टर मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि….उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी है…हम इस बार पश्चिम बंगाल में निश्चित रूप से सरकार बनाएंगे….

जमीनी हकीकत ये भी है कि बंगाल की राजनीति हमेशा से आक्रामक और भावनात्मक रही है…ममता बनर्जी खुद को बंगाल की अस्मिता की रक्षक के रूप में पेश करती रही हैं…हर चुनाव में वो बाहरी बनाम बंगाल की लड़ाई का नैरेटिव खड़ा करती हैं…अमित शाह को लेकर दिया गया बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है…जिसमें ममता ये संदेश देना चाहती हैं कि बंगाल में अंतिम फैसला बंगाल की जनता करेगी, न कि दिल्ली…..वहीं भाजपा की रणनीति इसके ठीक उलट है…

भाजपा ममता सरकार पर भ्रष्टाचार, हिंसा, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर हमला बोल रही है…भाजपा का आरोप है कि टीएमसी शासन में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और राजनीतिक हिंसा आम बात हो गई है…वहीं TMC भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाती रही है…

चुनाव आयोग को लेकर उठा विवाद भी आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है….टीएमसी लगातार आरोप लगा रही है कि आयोग केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहा है….जबकि आयोग खुद को स्वतंत्र और निष्पक्ष बताता है…और ये टकराव चुनावी प्रक्रिया के दौरान और तेज हो सकता है…कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर तीखे और आक्रामक दौर में देखी जा रही है…

एक ओर सीएम ममता बनर्जी और टीएमसी खुलकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं…बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और संस्थाओं पर सवा…..सब कुछ आगामी चुनावी का हिस्सा बन चुका है….तो वहीं दूसरी तरफ आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी…ये सियासी जंग और भी तेज होती नजर आएगी…

ऐसे में अब देखना ये होगा कि सीएम ममता बनर्जी की आक्रामक रणनीति और बंगाल की अस्मिता का कार्ड कितना असर दिखाता है….और क्या भाजपा अपने परिवर्तन के नारे के साथ टीएमसी को कड़ी टक्कर दे पाती है या नहीं…………लेकिन, इतना तो तय है कि पश्चिम बंगाल का ये चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं…..बल्कि सियासी वर्चस्व और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है…..

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