पड़ोसी पहले नीति पर मनीष तिवारी का सवाल, बोले– कोई पड़ोसी क्यों नहीं अपनाता इंडिया फर्स्ट?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि जब हमारी नीति यह है, तो किसी पड़ोसी देश की 'इंडिया फर्स्ट' नीति क्यों नहीं है? मनीष तिवारी ने पाकिस्तान को एक अपवाद माना.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि जब हमारी नीति यह है, तो किसी पड़ोसी देश की ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति क्यों नहीं है? मनीष तिवारी ने पाकिस्तान को एक अपवाद माना. उन्होंने कहा कि सेना राज्य चलाती है और इसी से सीमा पार आतंकवाद पनपता है.
भारत की पड़ोस नीति पर तंज कसते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति है लेकिन क्या भारत के किसी पड़ोसी देश की ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति है? उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह मूल सवाल है जिसका जवाब हर रणनीतिक विचारक को देना चाहिए, चाहे वह सरकार में हो या बाहर. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिल्कुल अलग मामला है.
मनीष तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान कभी अपनी आदतें नहीं सुधारेगा, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि यह एक ऐसी सेना है जो एक राज्य चलाती है, न कि एक ऐसा राज्य जिसके पास सेना हो. उन्होंने कहा कि इसका असर सीमा पार आतंकवाद के रूप में दिखता है जो वे फैला रहे हैं.
इंडिया फर्स्ट नीति क्यों नहीं?
मनीष तिवारी ने कहा कि जहां तक भारत के बाकी पड़ोसियों की बात है, तो यह मौलिक रूप से अहम है कि हम फिर से इस पर विचार करें और खुद से इस सवाल का जवाब दें कि जब हमारी ‘पड़ोसी पहले’ की नीति है, तो भारत के किसी भी पड़ोसी देश की ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति क्यों नहीं है?
#WATCH | Chandigarh | Congress MP Manish Tewari says, "… The fundamental question is that India has a neighborhood first policy. Do any of India's neighbours have an India-first policy? I think that is the fundamental question which every strategic thinker, whether in… pic.twitter.com/wnx4lcaVHq
— ANI (@ANI) January 25, 2026
हाल ही में 12 जनवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की नई किताब, ए वर्ल्ड एड्रिफ्ट नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में लॉन्च की गई. इस मौके पर युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था के पतन, भारत की रणनीतिक दुविधाओं और जिस तेजी से वैश्विक राजनीति बदल रही है. इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. किताब को पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और अनुभवी राजनयिक यशवंत सिन्हा ने कमला देवी कॉम्प्लेक्स के मल्टी-पर्पस हॉल में लॉन्च किया था.
इस किताब को लेकर यशवंद सिन्हा ने कहा था कि आज संसद के पास गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने का समय भी नहीं है. कई मायनों में जो चीजें महत्वपूर्ण नहीं हैं, वे केंद्र में आ गई हैं. सिन्हा ने तर्क दिया कि यह एक सांसद के नज़रिए से कहीं ज़्यादा है, जो तेज़ी से हो रहे वैश्विक बदलावों का एक विस्तृत विश्लेषण पेश करती है.



