‘सामने आओ मोदी-शाह’
राहुल की ललकार से दिल्ली में सियासी तूफान

- संसद के भीतर अब आर-पार की लड़ाई
- शाह के समर्थन में सत्ता का शक्ति-प्रदर्शन तो राहुल का सीधा वार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस और बीजेपी के बीच की राजनीतिक लड़ाई अब आर-पार की स्थिति में पहुंच चुकी है। राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर लगाये आरोपों और चर्चा की मांग के जवाब में आज एनडीए सांसदों ने तिरंगा हाथ में लेकर संसद परिसर में जुलूस निकाला और नारे लगाये। वहीं राहुल गांधी ने एक बार फिर दो टूग लहजे में कहा है कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री में हमारे सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं। दिल्ली में आज की सुबह संसद परिसर ने एक ऐसा राजनीतिक दृश्य देखा जिसमें तस्वीरें बहुत कुछ कह रही थीं लेकिन असली कहानी तस्वीरों के पीछे छिपी थी। एक तरफ सत्ता के गलियारों में एकजुटता का प्रदर्शन था। एनडीए सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ खड़े दिखाई दिए। तिरंगा लहराया गया नारे लगे और संदेश देने की कोशिश हुई कि सरकार के भीतर कोई दरार नहीं कोई डर नहीं और कोई पीछे हटने वाला नहीं है।
राहुल गांधी की चुनौती का जवाब कौन देगा?
लेकिन उसी वक्त विपक्ष की तरफ से एक ऐसी आवाज उठी जिसने इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि अगर सत्ता इतनी मजबूत है तो फिर राहुल गांधी की चुनौती का जवाब कौन देगा? राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनमें उनके सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। यह सिर्फ एक राजनीतिक तंज नहीं था। यह संसद के उस माहौल में फेंका गया राजनीतिक पत्थर था जहां पिछले कई दिनों से सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। और यहीं से आज की कहानी शुरू होती है क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि राहुल गांधी ने क्या कहा। सवाल यह है कि राहुल ने यह बात ऐसे वक्त क्यों कही जब सत्ता पक्ष खुद को पूरी ताकत के साथ एकजुट दिखाने में जुटा था? क्या यह महज संयोग है कि एक तरफ एनडीए सांसद अमित शाह और सरकार के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं और दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सीधे चुनौती दे रहे हैं?
राहुल गांधी की तीन मांगे
राहुल गांधी ने कहा कि इसलिए हमारी तीन मांग हैं। पहली यह कि अमित शाह सदन में आकर बयान दें और इस्तीफा दें। हमारे छात्रों पर हुए हमले के लिए माफी मांगें। राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी पर सदन में चर्चा हो। उन्होंने झारखंड के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों के लिए मेरा संदेश स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है। शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा की हम निंदा करते हैं चाहे वह कहीं भी हो।
गृह मंत्री बताए पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया
राहुल गांधी ने बयान जारी करते हुए कहा है कि पिछले 15 दिनों से न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री में सदन में आने की हिम्मत है और न ही अपने किए को स्वीकार करने का साहस है। दिल्ली में छात्रों के साथ जो हुआ उस पर दोनों में से किसी ने भी कोई टिप्पणी करना जरूरी नहीं समझा। राहुल गांधी ने कहा कि सवाल कभी यह नहीं था कि गृह मंत्री संसद में आकर किसी सामान्य विषय पर भाषण दें इसकी जरूरत न तो हमें है और मुझे विश्वास है कि देश की जनता को भी नहीं होगी। जनता भी गृह मंत्री से छात्रों के साथ हुई बर्बरता पर जवाब सुनना चाहती है। उन्हें स्पष्ट करना होगा कि दिल्ली में हमारे युवाओं पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया।
गृह मंत्री का इस्तीफा हो
राहुल गांधी ने कहा है कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और सवाल यह है कि क्या उन्होंने पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था या उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। राहुल गांधी ने कहा कि दोनों ही स्थितियों में उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गांधी के मुताबिक उनका गुब्बारा फट चुका है। उसे रिपेयर कर फिर से गैस भरने की कोशिश की जा रही है। लेकिन उसे रिपेयर नहीं किया जा सकता। उनमें हिम्मत नहीं है कि वे सदन में आएं। पूरे देश ने देखा कि छात्रों पर पैलेट गन से हमला किया गया उन्हें कील वाली लाठियों से मारा पीटा गया। ऐसे में दो बातें जो बहुत अहम हैं कि गृह मंत्री ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को मारने का आदेश दिया और वह इसके दोषी हैं। उनको पता ही नहीं था कि छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया ऐसे में वह अयोग्य हैं।
लड़ाई का ट्रेलर सामने आ चुका है?
सत्ता का संदेश साफ है हम एक हैं राहुल का संदेश उससे भी ज्यादा साफ है कि अगर एक हैं तो सामने आइए। यही वह टकराव है जिसने आज की राजनीति को महज बयानबाजी से निकालकर आमने सामने की लड़ाई में बदल दिया है। एनडीए का शक्ति प्रदर्शन उस समय सामने आया है जब मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव बना हुआ है। इससे पहले छात्र आंदोलन नीट से जुड़े विवाद पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री की जवाबदेही को लेकर राहुल गांधी और विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। राहुल गांधी ने हाल में अमित शाह को हटाने और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग तक की थी।
तस्वीर का दूसरा पहलू
सत्ता के पास संख्या है सरकार के पास संसदीय बहुमत है संसद में एनडीए के सांसद हैं और संगठन की ताकत भी पास है। लेकिन इनसब के बावजूद विपक्ष का नेता बार-बार उसी जगह चोट कर रहा है जहां सत्ता सबसे ज्यादा संवेदनशील दिखाई देती है और वह है जवाबदेही। राहुल गांधी का पूरा राजनीतिक नैरेटिव इसी सवाल के इर्द गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है कि अगर सरकार सही है तो सवालों से बचने की जरूरत क्यों है? और यही सवाल आज की राजनीति में सबसे विस्फोटक बन चुका है। क्योंकि लोकतंत्र में ताकत का मतलब सिर्फ बहुमत नहीं होता। ताकत का मतलब सवाल सुनने की क्षमता भी होता है। और राहुल गांधी इसी बिंदु को हथियार बना रहे हैं।




