ज्ञानेश के चक्कर में मोदी ने अपने पैरों पर मार ली कुल्हाड़ी, विपक्ष आगबबूला

मोदी सरकार साम, दाम, दंड, भेद लगा रही है कि ज्ञानेश का इस्तीफा न हो भले ही जनता के साथ तानाशाही जैसा बर्ताव क्यों न करना पड़े।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा सरकार के दिन खत्म होते नजर आ रहे हैं। कहते हैं न जब जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ जाता है।

ठीक वैसा ही हो रहा है इन दिनों भाजपा सरकार के साथ क्योंकि जबसे वोट चोरी और चुनाव आयोग की काली करतूत सामने आई है जबसे जनता और विपक्ष सड़कों पर है लेकिन वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल भाजपा डैमेज कंट्रोल करने में लगी हुई है। अब अपनी इज्जत और सत्ता बचाने की लालच में बीजेपी ज्ञानेश कुमार की कुर्सी हर हाल में बचाना चाह रही है।

क्योंकि कहीं ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया तो यह साबित हो जाएगा कि सरकार वोट चोरी से बनी है वो भी ज्ञानेश कुमार के बदौलत। ऐसे में ज्ञानेश का इस्तीफा न सिर्फ मोदी सरकार की पोल खोलेगा बल्कि आगामी चुनावों में जनता का भरोसा चुनाव आयोग पर नहीं होगा और चुनाव EVM की जगह बैलेट पेपर से करवाने की मांग तेज हो जाएगी और देश की गद्दी पर कुंडली मारे बैठे हुए मोदी-शाह को भी सत्ता से हाथ धोना पड़ जाएगा।

मोदी सरकार साम, दाम, दंड, भेद लगा रही है कि ज्ञानेश का इस्तीफा न हो भले ही जनता के साथ तानाशाही जैसा बर्ताव क्यों न करना पड़े। और सरकार ऐसा कर भी रही है अभी तक जहां प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल का प्रयोग किया जाता था उन्हें गाड़ियों में भूसे की तरह भरकर ले जाया जाता था वहीं दूसरी तरफ अब प्रोटेस्ट स्थल को ही बैन कर दिया जाता है। अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है।

सरकार ने 33 साल पहले जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगह तय किया था। यहीं पर अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना हुआ था। गृह मंत्रालय की बनाई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं। इस साल रामलीला मैदान सिर्फ 29 से 31 दिसंबर तक ही खाली है।

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विरोध प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की थी.

नई व्यवस्था समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर लागू की गई है.” हालिया आदेश में कहा गया है कि समिति ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को विरोध प्रदर्शन के लिए नई जगह अधिसूचित किए जाने की सिफ़ारिश की है. इसमें कहा गया है, “इन तीनों स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया अलग से जारी की जाएगी.

ये तीनों स्थान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में हैं. इनके तय होने से प्रदर्शन अब संसद के आसपास के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र से दूर होंगे. रामलीला मैदान दिल्ली के बीच है, जबकि बुराड़ी मैदान उत्तर-पश्चिमी दिल्ली और सीबीडी मैदान पूर्वी दिल्ली में है. रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब 3 किलोमीटर दूर है.

इस वजह से यह अन्य दोनों स्थानों के मुकाबले जंतर-मंतर के अधिक क़रीब है. बुराड़ी मैदान जंतर-मंतर से लगभग 21 किलोमीटर दूर है, जबकि सीबीडी मैदान इससे 13 किलोमीटर दूर है. रामलीला मैदान में राजनीतिक रैलियों और जन आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है. इनमें 1975 में जयप्रकाश नारायण की रैली और 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुआ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शामिल हैं. जबकि बुराड़ी मैदान तब चर्चा में आया जब 2020 में किसान आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से आंदोलनकारियों को वहां जाने के लिए कहा गया था.

कॉकरोच जनता पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग को लेकर बीते रोज भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन मांगी थी, लेकिन पुलिस ने इनकार कर दिया। इससे पहले CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक के मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था।

36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया था। वहीं जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के आदेश के बावजूद CJP ने सुबह-सुबह प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ा।

सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने आज कहा कि तिरंगा लेकर CJP के कार्यकर्ता आज सुबह जंतर-मंतर पहुंचे थे। लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। सौरव दास और आशुतोष रांका समेत पार्टी के अन्य सदस्य भी हिरासत में लिए गए हैं। उन्होंने कहा, ”आप विरोध की आवाज को खत्म नहीं कर सकते।” दीपके ने एक फोटो भी पोस्ट किया जिसमें आशुतोष रांका तिरंगा पकड़े नजर आ रहे हैं और उनके पास पुलिसकर्मी हैं। दीपके ने पोस्ट कर लिखा, ”जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराते आशुतोष रांका।”

इस मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा, ”जंतर-मंतर पर फिर से हमारा कब्जा हो गया है! हम जंतर-मंतर में दाखिल हो गए हैं और अब हमें हिरासत में लिया जा रहा है। लेकिन यह हम सभी युवाओं के लिए एक संदेश है कि हम ऐसा कर सकते हैं! ज्ञानू, अब तुम्हारा खेल खत्म है, भाई!” साथ ही उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वो सरकार से सवाल करते और ज्ञानेश कुमार को चेतावनी देते हुए नजर आ रहे हैं।

CJP के विरोध प्रदर्शनों में शामिल दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए कम से कम तीन लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके साथ बसों में भरकर हिरासत केंद्रों में ले जाए गए अन्य लोगों को वहां पीटा गया। इन केंद्रों को अस्थायी तौर पर बनाया गया था।

मेडिकल रिकॉर्ड में चोटों का जिक्र है। खैर बीजेपी सरकार पूरी तरह से डरी हुई है और यही वजह है कि ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। जैसा की हम पहले ही जिक्र कर चुके हैं कि जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने के आदेश दिया है.

इस पर विपक्षी खेमा काफी नाराज चल रहा है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा की कोई भी धरना प्रदर्शन से नहीं रोक सकता. अखिलेश यादव से जब जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा हम जहाँ भी विरोध-प्रदर्शन करेंगे, वही जगह जंतर-मंतर होगी. ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए.

वहीं इस मामले पर AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार डरकर बौखला गई है और ये उसी का नतीजा है. उन्होंने कहा कि आप किसी के प्रदर्शन करने के अधिकार को नहीं छीन सकते हैं. उन्होंने कहा ”तमाम देशवासियों ने देखा जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट अनाउंस हुआ.

सैकड़ों लाखों की संख्या में लोग जमा हो गए, Gen-Z आ गया, तमाम लोग आए. पहले स्टूडेंट ने प्रोटेस्ट किया, फिर अभी दूसरा प्रोटेस्ट सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ तो सरकार को लग रहा होगा कि यहां पर ट्रैफिक जाम हो रहा है, ये हो रहा है, वो हो रहा है. कहीं ना कहीं केंद्र सरकार बौखला गई है, घबरा गई है. ये डर और बौखलाहट का नतीजा है.”

भले ही पुलिस को आगे करके इतना बड़ा कदम उठाया गया हो लेकिन सरकार इस मामले पर घिरती हुई नजर आ रही है। साथ ही खबर यह भी है कि जंतर-मंतर पर पाबंदी लगाए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई दायर याचिका में इन नए विकल्पों की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने दलील देते हुए कहा है कि सर्वोच्च अदालत ने अपने एक पूर्व फैसले में जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए सही जगह माना था। साथ ही, रामलीला मैदान को इसके ऑप्शन के रूप में योग्य नहीं ठहराया था। अब याचिका में नए स्थानों की भौगोलिक स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि जो नए स्थान तय किए गए हैं, वह शहर के लैंडफिल एरिया यानी कूड़े के ढेरों के पास मौजूद हैं। इस वजह से वहां बड़ी संख्या में लोगों का इकट्ठा होना स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिहाज से व्यावहारिक नहीं होगा।

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