सांसदों को बगावत करना पड़ेगा भारी? एक्टिव मोड में उद्धव-राउत!
उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसमें से सिर्फ 3 सांसद ही पहुंचे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र में इन दिनों सियासी बवाल मचा हुआ है। आलम ये है सांसद पैसों में बिक रहे हैं, अपने ही नेता से गद्दारी करके बगावत पर तुले हुए हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं शिवसेना UBT की जिसमें जमकर फुटौवल मची हुई है। दरअसल शिवसेना यूबीटी में अभी बहुत बड़ा झटका लगा है।
उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसमें से सिर्फ 3 सांसद ही पहुंचे। बाकी 6 सांसद गायब रहे। ये 6 सांसद अब उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर रहे हैं और एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करके उन्होंने अलग ग्रुप बनाने की बात कही है। खबर ये भी है कि उद्धव के 6 बागी सांसदों को दिल्ली से जयपुर शिफ्ट कर दिया गया है क्योंकि शिंदे को ये डर सता रहा है की कहीं ये सांसद अपना मन न बदल लें यानी ‘हृदय परिवर्तन’ न कर लें।
एक तरफ बंगाल में टीएमसी में टूट देखने को मिल रही है. यही टूट की ‘आग’ अब उद्धव खेमे तक पहुंच गई है. सूत्रों के मुताबिक, ये सभी सांसद शिंदे गुट को समर्थन देने का मन बना चुके हैं. इस बीच शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दावा किया कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये ऑफर किए गए. खैर पार्टी ने इन्हें 7 दिन का जवाब मांगा है, लेकिन ये सांसद पार्टी की बैठक से दूर रहे। वहीं बैठक में तीन लोकसभा सांसद- अरविंद सावंत, राजभाऊ वाजे और अनिल देसाई शामिल हुए।
संजय राउत खुद राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस बैठक में मौजूद थे। राउत ने साफ तौर पर कहा कि जो सांसद इस बैठक में नहीं आए, उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है। पार्टी ने अब इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा पार्टी उनकी सदस्यता रद्द करने पर भी विचार करेंगी।
संजय राउत ने बागी रुख अपनाने वाले सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि कल जब वे स्पीकर से मिले थे, तो उसकी तस्वीर सार्वजनिक हुई थी। उन्होंने चुनौती दी कि अगर अन्य 6 सांसद भी स्पीकर से मिले हैं, तो उनकी तस्वीर दिखाई जाए। राउत ने इसे रणनीति नहीं विश्वासघात करार दिया। उन्होंने आगे कहा कि ये सांसद अभी भी पार्टी के सदस्य हैं और पार्टी के चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव जीते हैं।
अगर वे पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। राउत ने भाजपा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश और खासकर महाराष्ट्र की राजनीति को गंदा कर दिया है, जिसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। वहीं इससे पहले भी अपने एक्स पोस्ट में संजय राउत ने लिखा, “अपना सपना मनी मनी! यह चौंकाने वाली और घिनौनी बात है कि खबर है कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए आज रात ₹15 करोड़ प्रति सांसद की पेशकश की जा रही है.” अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस को टैग किया है.
घटना शिवसेना के लिए नई नहीं है, लेकिन उद्धव गुट के लिए बहुत दर्द भरी है। 2022 में एकनाथ शिंदे ने विद्रोह किया था, तब भी पार्टी टूट गई थी। अब फिर से वही कहानी दोहराई जा रही है।
उद्धव ठाकरे ने हमेशा बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा, हिंदुत्व और महाराष्ट्र के हित की बात की है। लेकिन कुछ सांसदों ने व्यक्तिगत फायदे के लिए पार्टी को धोखा दिया। शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग गुट बनाने का फैसला किया। बागी सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं।
ये सांसद लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नाम पर, शिवसेना के मशाल चिन्ह पर चुने गए थे। महाविकास अघाड़ी (MVA) के सहयोग से जीते थे। लेकिन अब ये लोग उसी पार्टी और गठबंधन को छोड़कर शिंदे-बीजेपी गुट में जाना चाहते हैं। ये साफ तौर पर वोटरों के साथ धोखा है। अगर बात की जाए की आखिर इन नेताओं ने बगावत क्यों की होगी ? तो इसकी एक वजह पावर और पैसे की भूख लगती है। तभी तो पैसों के लेन-देन की खबरें समने आईं और 15 करोड़ जैसे आंकड़े भी चर्चा में आए। शिंदे गुट में शामिल होने पर मंत्रिपद, टिकट या अन्य फायदे का लालच दिया गया होगा।
उद्धव ठाकरे की पार्टी में सांसदों को कोई बड़ा पद या फायदा नहीं मिल रहा था, जबकि शिंदे गुट सत्ता में है। ये सांसद अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए उद्धव पर इल्जाम लगाते हैं। लेकिन असल में ये लोग बालासाहेब की विरासत को बेच रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने कभी सत्ता के लिए सिद्धांत नहीं छोड़े। उन्होंने 2022 में मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया, लेकिन शिंदे के साथ नहीं गए। ये सांसद उसी बलिदान को बर्बाद कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने मतोश्री या दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई। तीन लाइन का व्हिप जारी किया गया था, मतलब सबको आना जरूरी था। सिर्फ अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे और अनिल देसाई जैसे वफादार सांसद पहुंचे। बाकी ने बहाने बनाए। ये गैर-हाजिरी साफ बगावत है।
जब नेता बुलाए तो सब आना चाहिए। लेकिन ये सांसद जानबूझकर दूर रहे ताकि अलग ग्रुप बनाने का रास्ता साफ हो। उद्धव ठाकरे शांत हैं, लेकिन सख्त। उन्होंने कहा कि जो जाना चाहते हैं जा सकते हैं, लेकिन पार्टी के नियमों के खिलाफ नहीं। संजय राउत और अन्य नेताओं ने कहा कि बागियों के खिलाफ डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई होगी। लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखी गई है कि किसी अलग गुट को मान्यता न दी जाए।
ये 6 सांसद वफादारी का प्रमाणपत्र फेल हो गए। इन्होंने उद्धव ठाकरे का विश्वास तोड़ा। इन्होंने शिवसेना के कार्यकर्ताओं, वोटरों और बालासाहेब की आत्मा को ठेस पहुंचाई। चुनाव के समय उद्धव के नाम पर वोट मांगे, लेकिन सत्ता के लालच में पार्टी छोड़ दी।ये लोग महाराष्ट्र की राजनीति को कलंकित कर रहे हैं।
एकनाथ शिंदे ने 2022 में जो किया, अब ये उसी रास्ते पर चल रहे हैं। लेकिन इतिहास गद्दारों को कभी माफ नहीं करता। लोग इन सांसदों को “खरीदे गए” कह रहे हैं। 15 करोड़ या मंत्रिपद जैसे आरोप इनकी साख गिरा रहे हैं।ये सांसद अगर शिंदे गुट में गए तो महाविकास अघाड़ी को भी नुकसान पहुंचेगा। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल इन्हें धोखेबाज कह रहे हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ये सिर्फ उद्धव का नहीं, पूरे MVA का विश्वासघात है।
ऐसे में अगर बात की इससे पार्टी पर क्या असर पड़ेगा। यूबीटी के पास 9 में से अब सिर्फ 3 सांसद बचेंगे। ये संख्या कम हो जाएगी, लेकिन उद्धव ठाकरे की छवि मजबूत रहेगी। वो सिद्धांतवादी नेता के रूप में उभरेंगे। कार्यकर्ता और आम लोग उनसे और जुड़ सकते हैं क्योंकि गद्दारी देखकर लोग नाराज हैं।
शिंदे गुट को फायदा होगा, लेकिन लंबे समय में शिवसेना की एकता टूटने से पार्टी कमजोर होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल मचेगी। 7 दिन का नोटिस दिया गया है। जवाब न देने पर डिसक्वालिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। स्पीकर फैसला करेंगे। कानूनी लड़ाई होगी। उद्धव गुट मजबूती से लड़ रहा है।ये घटना दिखाती है कि राजनीति में वफादारी कितनी जरूरी है। कुछ लोग पैसे और पद के लिए सब बेच देते हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे जैसे नेता सिद्धांत पर टिके रहते हैं।
इसे लेकर नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पाला बदलने की अफवाहों के बीच सांसद राजाभाऊ वाजे ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने मीडिया से कहा कि वह उद्धव ठाकरे के साथ हैं और हमेशा रहेंगे। यह बयान उन चर्चाओं के बाद आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि यूबीटी के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि उद्धव ठाकरे लिए अब विधायकों को संभालना मुश्किल हो गया है. सांसद संभालना मुश्किल हो गया है. नौ में से छह सांसद साथ छोड़ चुके हैं और एकनाथ शिंदे के साथ जा चुके हैं.
साथ ही शिवसेना की एमएलसी मनीषा कायंदे ने कहा कि आज पार्टी की कमान एकनाथ शिंदे संभाल रहे हैं. शिवसेना यूबीटी में ये दरार कहीं न कहीं चिंता का विषय है, लेकिन उद्धव ठाकरे को और मजबूत बनाएगी। बागी सांसदों ने खुद को छोटा कर लिया। इन्होंने वोटरों का अपमान किया, पार्टी का विश्वास तोड़ा और महाराष्ट्र की राजनीति को शर्मसार किया।
सच्चे शिवसैनिक उद्धव के साथ खड़े रहेंगे। गद्दारों का अंत हमेशा बुरा होता है।लोगों को इन बागी सांसदों को याद रखना चाहिए। अगले चुनाव में इनके खिलाफ वोट देकर सबक सिखाना चाहिए। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की आवाज हैं, और उनकी लड़ाई जारी रहेगी।



