राष्ट्रीय हार के झटके से बीजेपी में अन्तर्कलह

- आरएसएस ने संभाली कमान
- गृहमंत्री अमित शाह पहुंच रहे हैं लखनऊ मरहम लाएंगें या फिर करेंगे सर्जरी!
- नागपुर में हार, महाराष्ट्र में हार, बिहार में हार और यूपी में तो पीएम, सीएम की नाक के नीचे हार गयी बीजेपी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों के बाद देश की सियासत में भूचाल जैसी स्थिति उतपन्न हो चुकी है और सियासी मिजाज बड़ी तेजी से बदल रहा है। चुनाव से पहले क्या किसी ने सोचा था कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से बीजेपी प्रत्याशी हार जाएगा। राजधानी लखनऊ जहां सीएम योगी रहते हैं वहां से बीजेपी प्रत्याशी की बुरी तरह से हार होगी। बिहार में पटना सीट भी हाथ से निकल जाएगी जहां 35 वर्षों से लगातार कमल खिल रहा हो। आरएसएस मुख्यालय जोकि नागपुर में हैं वहां से कांग्रेस उम्मीदवार के चुनाव जीतने का मतलब समझ में आ रहा है किसी को। हार के बाद संगठन के भीतर तालमेल और अंतर्कलह पर सवाल उठने लगे तो मामला साधारण नहीं रह जाता।
चुनाव में हार एक परिणाम है लेकिन हार के पीछे अगर आपसी खींचतान, गुटबाजी और नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी जैसी समस्याएं हों तो वह परिणाम से कहीं बड़ा राजनीतिक संदेश बन जाती है। बीजेपी के लिए चिंता इसलिए भी बड़ी है कि उत्तर प्रदेश उसके राष्ट्रीय राजनीतिक गणित का सबसे महत्वपूर्ण आधार रहा है। यहां संगठन की मजबूती केवल प्रदेश की सत्ता तक सीमित नहीं मानी जाती बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की ताकत से भी जुड़ी है। ऐसे में दूसरे राज्यों के चुनावी झटकों और उत्तर प्रदेश में सामने आ रही चुनौतियों को अलग अलग खानों में रखकर देखना शायद आसान हो लेकिन राजनीतिक रूप से यह अधूरा आकलन होगा। असली परीक्षा यह है कि पार्टी इन संकेतों से क्या सीखती है और अपने संगठन को कितना एकजुट कर पाती है। इसी पृष्ठभूमि में 30 अक्टूबर को गृहमंत्री अमित शाह का लखनऊ दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन और चुनावी रणनीति पर उनकी पकड़ को देखते हुए इस दौरे से यह उम्मीद जोड़ी जा रही है कि प्रदेश में पार्टी की तैयारियों, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और संगठनात्मक जवाबदेही पर नए सिरे से जोर दिया जाएगा। हालांकि दौरे का वास्तविक एजेंडा और बैठकों में होने वाले फैसले ही बताएंगे कि यह सामान्य संगठनात्मक समीक्षा है या किसी बड़ी राजनीतिक चुनौती से निपटने की तैयारी।
बीजेपी के सामने अब दोहरी लड़ाई
बीजेपी के सामने अब दोहरी लड़ाई है। पहली, विपक्ष के सामने अपनी चुनावी ताकत कायम रखने की। दूसरी अपने भीतर भरोसे तालमेल और अनुशासन को मजबूत करने की। क्योंकि जब संगठन की ऊर्जा आपसी टकराव में खर्च होने लगे तो विरोधियों को अलग से मेहनत करने की जरूरत कम पड़ जाती है। लखनऊ में अमित शाह की मौजूदगी इसलिए चर्चा में है। अब निगाह इस पर रहेगी कि बैठकें केवल नसीहतों तक सीमित रहती हैं या संगठन के भीतर जिम्मेदारियां तय करने और अंतर्कलह पर लगाम लगाने के ठोस संकेत भी सामने आते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि बीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ हारी हुई सीटों का हिसाब नहीं बल्कि उस राजनीतिक भरोसे को बनाए रखने की है जिसके दम पर पार्टी चुनावी मैदान में उतरती है।
नागपुर में कांग्रेस की जीत का मतलब
कांग्रेस ने महाराष्ट्रविधान परिषद के नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज कर चौकाया है। कांग्रेस ने बीजेपी को को एक ऐसे क्षेत्र में हराया है जिसे आरएसएस का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से हरा दिया। यह परिणाम नागपुर में कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनावी जीत बनकर सामने आ रहा है। अपनी जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए वंजारी ने कहा कि भाजपा ने इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी उनके बड़े नेता नागपुर में मौजूद थे लेकिन मतदाता हमारे साथ थे। यह परिणाम इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर है और यह उस लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा भी है जिसका प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी करते हैं।
लखनऊ में बड़ी बैठक, शाह करेंगे शिरकत
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी 30 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के जरिए संगठन की रणनीति और चुनावी तैयारियों को धार देगी। डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली इस बैठक का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं अमित शाह करेंगे जबकि समापन सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे। बैठक की अध्यक्षता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी करेंगे। प्रदेश कार्यसमिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन करेंगे। बैठक में पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े, प्रदेश सह-प्रभारी जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, अनंत ओझा और प्रदीप वर्मा के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय अध्यक्षों, क्षेत्रीय महामंत्रियों, महापौरों, जिला पंचायत अध्यक्षों, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों, विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों, जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों और जिला महामंत्रियों सहित संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी बैठक में हिस्सा लेंगे।




