अब सिनेमा फिर से इंसान से बात करेगा

- बेटी वन्या के जन्मदिन से संजय शर्मा ने लांच किया 4PM FILMS
- आखिर मर्द क्यों रोता है जैसे संवदेनशील विषय से दर्शकों के सामने पेश की पहली शार्ट फिल्म ‘इश्तियाक’
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आज के दौर में जब सिनेमा तेज आवाज, त्वरित कट्स और सतही भावनाओं का गुलाम होता जा रहा है। ऐसे समय में लखनऊ से उठी एक कोशिश ने यह याद दिलाया कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं होतीं वह समाज का दर्पण भी होती हैं।
4पीएम मीडिया संस्थान जिसने सीमित संसाधनों, सीमित बजट और असीम विश्वास के साथ वेब पत्रकारिता में अपनी बादशाहत कायम की है आज उसी भरोसे को सिनेमा की भाषा में आगे बढ़ाने जा रहा है। जी हां संपादक संजय शर्मा ने 4 PM Films के बैनर तले अपनी पहली शार्ट फिल्म इश्तिायक को पेश किया है। फिल्म उस सोच की शुरुआत है जो मानती है कि कहानियां चिल्ला कर नहीं बल्कि धीरे-धीरे दिल में उतर कर असर करती हैं। इश्तियाक एक ऐसी फिल्म जो उस सवाल को उठाती है जिसे समाज अक्सर अनसुना कर देता है कि आखिर मर्द क्यों रोता है।
सिनेमा से मोहब्बत का नतीजा
कुछ फिल्में परदे पर उतरती हैं और कुछ फिल्में जमीन से उगती हैं। इश्तियाक उसी दूसरी कि स्म की फिल्म है जो एसी कमरों में नहीं, बल्कि पसीने, धैर्य और जिद से बनी है। यह फि ल्म न तो किसी बड़े बैनर की मेहरबानी है और न किसी स्टारडम का शोर यह कहानी कहने की जिद है और सिनेमा से बेइंतिहा मोहब्बत का नतीजा।
संवेदना का निचोड़ है फिल्म
4 PM Films के पीछे खड़ा नाम है संजय शर्मा। एक ऐसा पत्रकार जिसने खबरों की भीड़ में भी हमेशा इंसान को खोजा। अब वही इंसान कैमरे के जरिये वह सवाल पूछ रहा है जिससे समाज अक्सर मुह फेर लेता है। संजय शर्मा के लिए इश्तियाक कोई प्रयोग नहीं है बल्कि यह उन वर्षों की संवेदना का निचोड़ है जो उन्होंने समाज को करीब से देखते हुए अर्जित की।
उपदेश नहीं हकीकत का आईना
समाज ने मर्द को हमेशा मजबूत देखा लेकिन कभी कमजोर होने की इजाजत नहीं दी। रोना मर्द के हिस्से में गुनाह बना दिया गया। इश्तियाक इसी गुनाह पर सवाल उठाती है। यह फिल्म न तो उपदेश देती है न ही किसी को कटघरे में खड़ा करती है। यह बस एक आईना रखती है ऐसा आईना जिसमें हर दर्शक खुद को देख सकता है। बेहतरीन लोकेशन, सटीक संवाद, संयमित अभिनय और संवेदनशील फिल्मांकन इश्तियाक़ को भीड़ से अलग खड़ा करता है। यह फ़िल्म बताती है कि जब विषय सच्चा हो तो भव्यता नहीं ईमानदारी ही सबसे बड़ी तकनीक होती है।
बेटी वन्या के जन्म दिन पर तोहफा
4 PM Films के संस्थापक और 4पीएम न्यूज नेटवर्क के संपादक संजय शर्मा ने इस 4 PM Films की शुरूआत अपनी बेटी वन्या के जन्मदिन से की है। चैनल और फिल्म लांच के अवसर पर उन्होंने अपने दिल की बात करते हुए कहा कि एक सपना, जो बहुत समय से दिल में था। एक कोशिश जो सिर्फ मनोरंजन नहीं संवेदना और सवाल लेकर आ रही है। उसे आज पूरा करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि हमने 4 PM Films के नाम से एक नया चैनल इस इरादे से शुरू किया है कि यहां ऐसी कहानियां कहेंगे जो शोर नहीं करेंगी बल्कि चुपचाप दिल तक पहुंचेंगी। उनके मुताबिक इश्तियाक पहली पेशकश है एक नाज़ुक सवाल के साथ कि मर्द क्यों रोता है। यह फिल्म चीखेगी नहीं आरोप नहीं लगाएगी बस आपको अपने भीतर झांकने पर मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि दर्शकों की राय मेरे लिए सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए आप सभी लोगों से निवेदन है कि अपनी राय चैनल के माध्यम से जरूर रखें और आप का भरोसा ही मेरी ताक़त है।
नीयत साफ तो साधन मायने नहीं रखते
४क्करू स्नद्बद्यद्वह्य की शुरुआत बताती है कि अगर नीयत साफ हो तो साधन मायने नहीं रखते। इश्तियाक सिर्फ एक शार्ट फिल्म नहीं यह उस सिनेमा की वापसी है जो इंसान से डरता नहीं उसे समझने की कोशिश करता है। यह शुरुआत है और अगर पहली ही दस्तक इतनी सधी हुई है तो आगे आने वाली कहानियां और भी गहरे सवाल लेकर आएंगी।
इश्तियाक ने रखी गहरी बात
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि इश्तियाक उस विरले वर्ग की फिल्म है जो कम समय में गहरी बात कह जाती है। एक वरिष्ठ फिल्म समीक्षक ने कहा कि यह फिल्म दिखाती है कि मर्दानगी का मतलब पत्थर होना नहीं है। इश्तियाक बिना किसी नाटकीयता के भावनाओं को छूती है। यह शार्ट फि ल्म नहीं खामोशी के साथ एक लंबी बातचीत है। रिलीज के कुछ ही घंटों में दर्शकों की प्रतिक्रियाएं साफ इशारा कर रही हैं कि इश्तियाक ने दिलों को छुआ है। चैनल के कमेंट बाक्स मे एक दर्शक ने लिखा कि बहुत समय बाद कुछ ऐसा देखा जो बोलने पर मजबूर नहीं करता सोचने पर मजबूर करता है। यह फिल्म नहीं एक एहसास है। एक अन्य दर्शक ने लिखा कि हर मर्द को यह फिल्म देखनी चाहिए।
रचा जा सकता है प्रभावशाली सिनेमा
शॉर्ट फिल्म इश्तियाक के लेखक व निर्देशक प्रांशु श्रीवास्तव है। स्क्रीनप्ले व संवाद भी प्रांशु श्रीवास्तव का है फिल्म का प्रोडक्शन हाउस पन्ना पिक्चर है और प्रोड्यूसर संजय शर्मा है। फिल्म में मुख्य कलाकार इश्तियाक खान, डॉ. राकेश सोनी, सुषमा मिश्रा, अमित मिश्रा, गुडिय़ा, संजू आथिया है जबकि अन्य कलाकार प्रवीण खेमिया, आदित्य निर्मालकर, दीपक राय, सिया चौबे, हरि, प्रिया, नीलेश दुबे, राम दुबे, शुभम सरन हैं। यह फिल्म एक सशक्त रचनात्मक टीम का परिणाम है, जहाँ लेखन से लेकर अभिनय तक हर स्तर पर संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी गई है। निर्देशक-लेखक प्रांशु श्रीवास्तव की कलम और दृष्टि ने कहानी को सादगी और गहराई दी है, वहीं कलाकारों ने बिना अतिरिक्त नाटकीयता के भावनाओं को जीवंत किया है।




