एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत गरमाई, महाराष्ट्र की सियासत गरमाई एनसीपी और एसपी एनडीए केकरीब आई

मोदी सरकार के दो अहम बिलों को शरद पवार दे सकते हैं समर्थन

उद्धव ठाकरे का शिंदे गुट पर बड़ा कानूनी सर्जिकल स्ट्राइक
छह बागी सांसदों को भेजा कानूनी नोटिस  

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक एकबार फिर महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। एक ओर जहां ऐसी खबरें आ  रही है कि (एनसीपी- शरदचंद्र पवार) आगामी मानसून सत्र में मोदी सरकार के दो सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्तावों— महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है। तो दूसरी ओर शिवसेना (उबाठा) ने अपने छह बागी लोकसभा सदस्यों को कानूनी नोटिस भेजा है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल ने कहा है कि उसका विरोधी शिंदे गुट के साथ विलय कानूनन संभव नहीं है। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी दल के इस कदम को पूरी तरह बेअसर बताते हुए खारिज कर दिया है। ससंद सत्र पहले देश और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। सूत्रों के हवाले से बेहद अहम खबर सामने आ रही है कि शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी- शरदचंद्र पवार) आगामी मानसून सत्र में मोदी सरकार के दो सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्तावों— महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है। पार्टी का यह कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि उम्मीद है कि शरद पवार गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल हुए बिना ही इन दोनों अहम कानूनों के पक्ष में संसद में मतदान करेगा।
सूत्रों ने बताया कि शरद पवार गुट का एनडीए का हिस्सा बनने का कोई इरादा नहीं है। इसके बजाय, पार्टी इन बिलों पर सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन दे सकती है। फिलहाल एनसीपी (शरद पवार गुट) के आठ सांसद हैं।सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि शरद पवार गुट का एक धड़ा सत्ताधारी सरकार के साथ करीबी सहयोग की वकालत कर रहा है। हालांकि, माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने आंतरिक फूट और संगठन में किसी भी संभावित बंटवारे से बचने के लिए सिर्फ प्रस्तावित बिलों का समर्थन करने की सीमित रणनीति अपनाई है।

शिंदे गुट के साथ इन सांसदों का विलय कानूनन संभव ही नहीं है : सावंत

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने अपने छह बागी लोकसभा सदस्यों को कड़ा कानूनी नोटिस भेजा है। पार्टी का साफ कहना है कि विरोधी शिंदे गुट के साथ इन सांसदों का विलय कानूनन संभव ही नहीं है। दूसरी तरफ, सूबे के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी दल के इस कदम को पूरी तरह से बेअसर बताते हुए खारिज कर दिया है ।शिवसेना (उबाठा) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को लिखे पत्रों में सभी छह सांसदों को याद दिलाया कि उन्होंने साल 24 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और पार्टी के चुनाव चिह्न पर शिंदे गुट के खिलाफ लडक़र जीता था। सावंत ने कहा कि मूल राजनीतिक दल ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ किसी भी तरह के विलय की न तो शुरुआत की है और न ही इसकी अनुमति दी है। संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के पैराग्राफ 4 का हवाला देते हुए सावंत ने स्पष्ट किया कि जब मूल राजनीतिक दल का ही कोई विलय नहीं हुआ है, तो सदन के भीतर विधायी दल के विलय का सवाल ही नहीं उठता और कानून में भी इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। सावंत ने बताया कि पार्टी को सार्वजनिक माध्यमों से बागी सांसदों द्वारा विलय का दावा करने और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क करने की जानकारी मिली है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी अध्यक्ष को पहले ही सूचित कर चुकी है कि इन सांसदों के किसी भी विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए, और अध्यक्ष ने भी अभी तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।

एनसीपी के प्रफुल्लपटेल या सुनीत तटकरे से मुलाकात अफवाह : जयंत

जयंत पाटील ने एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल या सुनीत तटकरे से मुलाकात की अफवाह को खारिज किया है और दावा किया है कि वे इन दोनों नेताओं से कभी नहीं मिले न ही मर्जर पर किसी तरह की कोई चर्चा हुई. जयंत पाटील का दावा है कि अजित पवार की मौत के बाद से दोनों पार्टियों के विलय पर कोई बात नहीं हुई है। यह नहीं कहा जा सकता कि चर्चा बंद हो गई है क्योंकि चर्चा तो अभी शुरू भी नहीं हुई है। जयंत पाटील ने जानकारी दी, हमारे साथ ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है। सुप्रिया सुले ने सांसदों से या पवार साहब से बात की होगी. क्या निर्णय हुआ, मुझे पता नहीं. व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि एमपी-एमएलए की संख्या बढ़ाने से पहले प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद जयंत पाटील ने कहा कहा, मैं अपने विधानसभा क्षेत्र इस्लामपुर के नगराध्यक्ष के अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) के मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने गया था. जब मैं मुख्यमंत्री के वेटिंग रूम में बैठा था, उस समय सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर रहे थे। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनकी मुख्यमंत्री के साथ किस विषय पर चर्चा हो रही थी। उन्होंने आगे कहा, मेरी मुख्यमंत्री से मुलाकात पूरी तरह अलग मुद्दे पर थी. सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की बैठक किस विषय पर थी, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मेरी न तो प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे से कोई मुलाकात हुई और न ही हम तीनों की मुख्यमंत्री के साथ कोई संयुक्त बैठक हुई।

’सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेडऩा नहीं’

पुणे की अदालत ने दी राकांपा नेता को जमानत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पुणे। पुणे की एक अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पदाधिकारी महादेव बालगुडे को जमानत देते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करने मात्र को राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेडऩा नहीं माना जा सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने महादेव बालगुडे की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार के कार्यों की सराहना करने, उन पर टिप्पणी करने और उनकी आलोचना करने का पूरा अधिकार है।
महादेव बालगुडे को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीरें साझा करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दर्शाने वाली सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था, जो देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दस्तावेजों से यह साफ है कि आरोपी ने केवल कुछ सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जो सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हैं।
न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने वाला कोई कार्य किया या राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेडऩे के लिए किसी को उकसाया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में बीएनएस की धारा 152 का लागू होना विवाद का विषय है और आरोपी पर लगाई गई अन्य धाराएं जमानती प्रकृति की हैं। चूंकि पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और जांच पूरी हो गई है, इसलिए अदालत ने आरोपी को और अधिक समय तक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं समझी।

’देश में अब लोकतंत्र नहीं है, तानाशाही सरकार है’

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने आंदोनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में अब लोकतंत्र नहीं है, तानाशाही सरकार है।
कोई मर भी जाए, इससे सरकार को फर्क नहीं पड़ता। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद ने सोनम वांगचुक का समर्थन किया और सरकार को आड़े हाथों लिया। कॉकरोच जनता पार्टी नीट -यूजी में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 17 दिन से अनशन कर रहे हैं।

पटना हाईकोर्ट केआदेश पर भडक़ा सुप्रीम कोर्ट

यौन अपराधों में न्यायिक संवेदनशीलता पर नाराजगी जताई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यौन अपराध के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी समिति की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर अपलोड किया जाए।
यह रिपोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च, 2025 के उस आदेश से उपजे स्वत: संज्ञान वाले मामले में तैयार की गई थी, जिसमें कहा गया था कि किसी लडक़ी के पजामे का नाड़ा खींचना और उसके स्तनों को पकडऩा रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा।
वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसा समय-समय पर होता रहा है और इसमें 9 जुलाई को पटना हाई कोर्ट का एक आदेश भी शामिल है, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं है।

वन नेशन-वन इलेक्शन भाजपा की साजिश : अजय

जेपीसी की बैठक में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधिमंडल हुआ शामिल
बोले प्रतिनिधिमंडल सदस्य- बीजेपी भारत के संविधान, लोकतंत्र और संघीय ढांचे के विरूद्ध

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। संसद की संयुक्त संसदीय समिति के राजधानी लखनऊ में राजनीतिक दलों के नेताओं से संवाद के तहत आयोजित बैठक में यूपी कांग्रेस कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव के सम्बन्ध में पक्ष रखा। कांग्रेस पार्टी ने इस मौके पर 51 पेज में उल्लिखित अपने मत को समिति को सौंपा।
कांग्रेस पार्टी का हमेशा से मत रहा है कि भारत का संविधान और लोकतंत्र अक्षुण्य रहना चाहिए तथा देश के संघीय ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। भारतीय संविधान द्वारा राज्यों को प्रदत्त कल्याणकारी राज्य की अवधारणा बनी रहनी चाहिए। वन नेशन-वन इलेक्शन से अधिकार एवं नियंत्रण का समावेश केन्द्रीयकृत होगा जिससे प्रेसीडेन्शियल राजनीतिक को बढ़ावा मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। कांग्रेस पार्टी का यह भी मत रहा है कि चुनावी व्यय एवं प्रशासनिक सुविधा को कभी भी संविधान संशोधन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, यह संविधान की मूल भावना के प्रतिकूल है।
भारत विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों तथा भिन्न भाषाओं का का देश है। राज्यों की भिन्न- भिन्न परिस्थतियां हैं। कानूनन एक साथ ही चुनाव कराने से तमाम असामान्य परिस्थितियां उत्पन्न होंगी जो देश के सामने एक कठिन संकट उत्पन्न करने वाला हो सकता है। प्रतिनिधिमंडल के बैठक से निकलने के उपरान्त प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय जी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस अवधारणा के तहत हमेशा खड़ी रही है और भारत के संविधान, लोकतंत्र और संघीय ढांचे की मजबूती के लिए कार्य करती रहेगी और इसके विरूद्ध होने वाले किसी भी साजिश को नाकाम करेगी।

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