गुजरात के 2335 स्कूलों में सिर्फ 1-1 शिक्षक, 80 हजार बच्चों का भविष्य दांव पर?
गुजरात की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है... UDISE+ की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 2335 स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के प्राथमिक शिक्षा विभाग में 2,000 से अधिक एक शिक्षक वाले स्कूलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है.. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के मुताबिक.. राज्य के 2,335 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक तैनात है.. इन स्कूलों में 80,053 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.. इस आंकड़े ने गुजरात की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की उपलब्धता.. और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.. रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.. लेकिन अब अधिकारियों ने भी सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सवाल उठाए हैं..
दरअसल, UDISE+ की रिपोर्ट सामने आने के बाद गुजरात के प्राथमिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिलों में तैनात जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों यानी DPEOs.. और प्रशासनिक अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.. विभाग ने अधिकारियों पर प्रशासनिक विफलता, काम में लापरवाही.. और अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने के आरोप लगाए.. अधिकारियों से पूछा गया कि जब स्कूलों में शिक्षकों की इतनी कमी है.. तो इस स्थिति को सुधारने के लिए समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए.. इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के भीतर प्रशासनिक जिम्मेदारी.. और अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है..
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक.. प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने यह नोटिस मुफ्त.. और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009.. और गुजरात सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1971 के तहत जारी किए थे.. विभाग ने अपने नोटिस में शिक्षा के अधिकार कानून का हवाला देते हुए कहा कि.. प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना जरूरी है.. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.. विभाग का कहना था कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लंबे समय तक बने रहने देना गंभीर प्रशासनिक चूक है.. इसी आधार पर अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया.. और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए..
आपको बता दें कि नोटिस में RTE अधिनियम, 2009 की धारा 25(1) का भी उल्लेख किया गया.. इस प्रावधान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना आवश्यक है.. शिक्षा विभाग ने इसी आधार पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश की.. नोटिस में अधिकारियों के कामकाज को गंभीर प्रशासनिक.. और संवैधानिक विफलता से जोड़ते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई.. इसमें वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की संभावना भी जताई गई थी.. साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि.. वे स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करें.. और इस संबंध में आवश्यक प्रमाणपत्र जमा कराएं..



