ट्रिपल तलाक मामले में पटना कोर्ट का फैसला, पत्नी को तलाक देने वाले पति को जेल
बिहार की राजधानी पटना में तीन तलाक से जुड़े एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। पत्नी को ट्रिपल तलाक देने के मामले में पति को दो साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजधानी पटना में तीन तलाक से जुड़े एक मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। पत्नी को ट्रिपल तलाक देने के मामले में पति को दो साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने दोषी पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम जमा नहीं करने पर उसे एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, जुर्माने से वसूल की जाने वाली राशि शिकायतकर्ता को देने का निर्देश दिया गया है।
21 साल की शादी के बाद अदालत तक पहुंचा मामला
इस मामले की खास बात यह है कि पति-पत्नी की शादी को 21 साल हो चुके थे और उनके तीन बच्चे भी हैं। लंबे समय तक चले वैवाहिक रिश्ते के बाद पत्नी को ट्रिपल तलाक देने का मामला सामने आया, जिसके बाद विवाद कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। पत्नी की शिकायत पर मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर पति को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
दो साल की जेल और 6,500 रुपये का जुर्माना
अदालत ने दोषी पति को दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, उस पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सश्रम कारावास का मतलब ऐसी जेल की सजा से है, जिसमें कैदी को नियमानुसार श्रम करना होता है। इस मामले में अदालत ने कारावास के साथ आर्थिक दंड भी निर्धारित किया है। अदालत के आदेश के मुताबिक, यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने के रूप में वसूल की गई रकम शिकायतकर्ता को दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है।
2001 में हुई थी शादी, 2022 में पहुंचा मामला थाने
मामले के अनुसार, रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया की शादी नौशाद अहमद से 9 नवंबर 2001 को हुई थी. दोनों के तीन बच्चे भी हुए. शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2022 में नौशाद ने पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की. पत्नी के चेहरे पर तेजाब फेंकने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया गया. इसके बाद 5 सितंबर 2022 को नौशाद ने पत्नी को ट्रिपल तलाक दे दिया. मामले को लेकर रजिया सुल्तान ने फुलवारीशरीफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई.
प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 326, 511, 354(बी), 379 और 427 के साथ मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने अनुसंधान के बाद 31 जुलाई 2023 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया. अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाहों ने अदालत में गवाही दी. सुनवाई के बाद अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला अधिनियम की धारा 4 और भारतीय दंड संहिता की धारा 323 तथा 341 के तहत दोषी पाया. अदालत ने ट्रिपल तलाक देने के मामले में दो साल के सश्रम कारावास और 6,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
क्या है ट्रिपल तलाक कानून?
भारत में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक को अवैध घोषित किया गया है. कानून के अनुसार, पति द्वारा बोलकर, लिखकर, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से या किसी अन्य तरीके से ऐसा तत्काल तलाक घोषित करना, जिसे कानून में परिभाषित किया गया है, शून्य और अवैध है. इस कानून की धारा 4 के तहत तीन तलाक देने वाले पति को अधिकतम तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है.
कानून की धारा 5 में पीड़ित मुस्लिम महिला और उसके आश्रित बच्चों के लिए भरण-पोषण भत्ते का प्रावधान है. वहीं, धारा 6 के तहत नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित प्रावधान किया गया है. इस कानून का उद्देश्य तत्काल तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाने के साथ विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है.
शिकायत के बाद सजा तक पहुंचा मामला
इस मामले में शिकायत वर्ष 2022 में दर्ज हुई, पुलिस ने जांच के बाद 2023 में आरोपपत्र दाखिल किया और इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत फैसला आया. अदालत ने नौशाद को ट्रिपल तलाक देने के मामले में दोषी मानते हुए सजा सुनाई है. यह फैसला बताता है कि ट्रिपल तलाक से जुड़े मामलों में शिकायत, पुलिस अनुसंधान, अभियोजन और न्यायिक सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.



