चैतर वसावा की सजा पर सियासी संग्राम, केजरीवाल का BJP पर हमला, गुजरात में बढ़ा आक्रोश

आप विधायक चैतर वसावा को मिली सात साल की सजा के बाद गुजरात की राजनीति गरमा गई है... अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर तूफान आ गया है.. आम आदमी पार्टी के लोकप्रिय आदिवासी विधायक चैतर वसावा को राजपीपला सेशन कोर्ट ने सात साल की जेल की सजा सुना दी है.. उनकी पत्नी शकुंतला वसावा.. और सात अन्य लोगों को भी इसी सजा मिली है.. कोर्ट ने हर एक पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है.. इस फैसले के बाद आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है.. और उन्होंने इसे साजिश बताया.. और कहा कि आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है.. केजरीवाल का कहना है कि बीजेपी इस मामले से आदिवासी समाज को दबाना चाहती है.. लेकिन जनता इसका जवाब देगी..

आपको बता दें कि यह पूरा मामला नवंबर 2023 का है.. लेकिन कोर्ट का फैसला 23 जून 2026 को आया.. नर्मदा जिले के राजपीपला कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.वी. हीरपारा ने यह फैसला सुनाया.. घटना अक्टूबर 2023 की रात की बताई जाती है.. जब डेडियापाडा में वन विभाग के अधिकारियों के साथ विवाद हुआ था.. अब इस फैसले ने गुजरात की सियासत को गर्म कर दिया है.. आप इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है..

चैतर वसावा गुजरात के नर्मदा जिले की डेडियापाडा (एसटी) सीट से आप के विधायक हैं.. 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने गुजरात में पांच सीटें जीती थीं.. और उनमें डेडियापाडा भी शामिल थी.. चैतर वसावा आदिवासी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं.. वे आदिवासी अधिकारों, भूमि अधिकार और स्थानीय मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं.. उन्होंने भिल प्रदेश की मांग भी की थी.. जो चार राज्यों के आदिवासी इलाकों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने की बात थी.. उनकी लोकप्रियता आदिवासी बहुल इलाकों में काफी है.. यही वजह है कि आप उन्हें भरूच लोकसभा सीट से उम्मीदवार भी घोषित कर चुकी है..

आपको बता दें कि अक्टूबर 2023 के अंत में वन विभाग की टीम डेडियापाडा इलाके में अवैध कब्जे वाली फसलों को हटाने गई थी.. सरकारी वन भूमि पर कुछ लोग फसल उगा रहे थे.. जिन्हें हटाया गया.. इसके बाद चैतर वसावा के आवास पर वन अधिकारियों को बुलाया गया.. वहां चर्चा के दौरान विवाद बढ़ गया.. पुलिस के मुताबिक, चैतर वसावा और उनके समर्थकों ने अधिकारियों को गालियां दीं.. उन पर हाथ उठाया, थप्पड़ मारे.. और 60,000 रुपये की वसूली की.. आरोप है कि वसावा ने हवा में फायरिंग भी की.. जो अनलाइसेंस्ड हथियार से हुई थी..

2 नवंबर 2023 को इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई.. इसमें दंगा, सरकारी अधिकारियों पर हमला, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गईं.. चैतर वसावा कुछ समय फरार रहे.. फिर दिसंबर 2023 में सरेंडर कर दिया.. उनकी पत्नी शकुंतला पहले ही गिरफ्तार हो चुकी थीं.. कोर्ट में लंबी सुनवाई चली.. अंत में कोर्ट ने सभी को दोषी करार दिया.. और सात साल की सजा सुनाई.. इस सजा के साथ चैतर वसावा की विधायकी भी खतरे में पड़ गई है.. क्योंकि दो साल से ज्यादा की सजा होने पर विधायक पद रद्द हो सकता है..

अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया दी.. उन्होंने कहा कि यह साजिश है.. बीजेपी आदिवासी नेता को दबाने की कोशिश कर रही है.. केजरीवाल का आरोप है कि जब आप ने आदिवासी समाज के एक युवा नेता को आगे बढ़ाया.. तो बीजेपी बर्दाश्त नहीं कर पाई.. और उन्होंने कहा कि बीजेपी आदिवासी समाज के खिलाफ है.. उन्होंने चैतर भाई को नहीं, पूरे आदिवासी समाज पर हमला किया है.. केजरीवाल ने आदिवासी समाज से अपील की कि वे इस अन्याय का जवाब वोट से दें.. आप का कहना है कि चैतर वसावा आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ रहे थे.. इसलिए उन पर झूठा केस बनाया गया..

 

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