मेरठ एसएसपी थप्पड़ कांड की गूंज से गरमाई राजनीति

- एनएचआरसी ने जारी किया नोटिस देना होगा जवाब
- डैमेज कंट्रोल करने उतरी मायावती, राकेश टिकैत भड़के अखिलेश यादव ने सुनाई खरी खोटी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मेरठ में पुलिस वैन के भीतर हिरासत में बैठे युवक को पुलिस अधिकारी द्वारा थप्पड़ मारने का मामला तूल पकड़ चुका है और राजनीति चरम पर। सपा समेत दूसरी राजनीतिक दलों ने इस कांड पर आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना के संदर्भ में नोटिस जारी कर मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है। अब इन थप्पड़ों का जवाब देने के लिए यूपी गृह सचिव और डीजीपी को आयोग के सामने पेशी देनी होगी।सवाल सिर्फ घटनाओं का नहीं है सवाल अब उस मानसिकता का बन गया है जो बार-बार पुलिस व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रही है। कभी थाने में फरियादी की सुनवाई पर सवाल उठते हैंं तो कभी हिरासत में पुलिसिया व्यवहार पर तो कभी वर्दी की गरिमा पर। लगातार जवाबदेही का डर कमजोर पड़ता जा रहा है? और कार्रवाई का भरोसा इतना कमजोर हो गया है कि कुछ अधिकारियों को लगता है कि कैमरे बंद हो जाएं तो सब कुछ सामान्य है? मेरठ की घटना ने पूरे देश को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या कानून के राज में ऐसा संभव है कि पुलिस वैन में पुलिस द्वारा पकड़ कर बिठाये गये व्यक्ति को कैमरों के सामने कूट दिया जाए। पकड़ा गया वक्ति कथित तौर इतना नर्वस हो जाए कि वैन में ही अपनी जान देने की कोशिश करें। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर जबर्दस्त उबाल है। लोग बात कर रहे हैं कि पुलिस कैमरे के सामने जब यह कर सकती है तो कैमरे के पीछे क्या नहीं कर सकती।
पुलिस अभिरक्षा में हाथ उठाना तानाशाही
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पुलिस के आचरण पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा है कि घटना कैमरे के सामने घटित हुई है। यह कोई मामूली घटना नहीं है। पुलिस बेअंदाज है और अब उसकी आदत सी हो गयी है। घटना पर कार्रवाई हो वर्ना समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरेगी। किसान नेता राकेश टिकैत ने सबसे कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस की सुरक्षा में बैठे व्यक्ति पर हाथ उठाना तानाशाही है। उनका कहना था कि कानून यदि आम नागरिक पर लागू होता है तो वर्दी पहनने वाले अधिकारी भी उससे ऊपर नहीं हो सकते।
एसपी नहीं गुंडा है..दलित विरोधी है : गौतम
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एसपी अविनाश पांडेय के थप्पड़कांड पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वो एसपी नहीं गुंडा है..दलित विरोधी है..मुस्लिम विरोधी है और संविधान विरोधी है। उन्होंने कहा कि रवि गौतम दलित है इसलिए वो थप्पड़ मार रहा है। इस एसपी के अंदर नफरत भरी हुई है। इस एसपी को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए और गिरफ्तार करके पूछताछ होनी चाहिए। कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क पर जाएगी। यह वही अधिकारी है जिसने कहा था कि ईद पर जो नमाज पढऩे सड़क पर आएगा, उसको बंद करूंगा, उस पर मुकदमा दर्ज करूंगा और पासपोर्ट भी रद्द करूंगा। यह वही अधिकारी है जिसने फिल्म धुरंधर को दो सिनेमा हॉल बुक करके दारोगाओं को दिखाया था। जो हिंदू-मुसलमान करने वाली फिल्म है।
बसपा सुप्रीमो बोली नहीं मिलता न्याय
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा घटना के सदंर्भ में बयान जारी करते हुए कहा है कि ऐसे तरीकों से पीडि़तों को न्याय नहीं मिलता बल्कि उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलितों, वंचितों और उपेक्षित समाज को संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ राजनीतिक शक्ति हासिल करने का रास्ता दिखाया था। बाबा साहब का स्पष्ट संदेश था कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कानून के दायरे में रहकर किया जाए। यदि निचली अदालत से न्याय न मिले तो उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाया जाए। उन्होंने कहा कि मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज, हरदोई और देश के अन्य हिस्सों में जिस प्रकार की घटनाओं के बाद लोगों को उकसाकर आंदोलन कराए जा रहे हैं, उससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने की संभावना कमजोर होती है। इसके बजाय कुछ राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास करते हैं। पहले माहौल को हिंसा, धरना-प्रदर्शन और अशांति से बिगाड़ा जाता है और बाद में उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर मगरमच्छ के आंसू बहाते हैं।
आयोग का डीजीपी को नोटिस अब क्या करेगी पुलिस
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज की घटना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गई है। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं ने डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति की ओर से दी गई शिकायत पर संज्ञान लिया हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में एक शांतिपूर्ण जन प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर बर्बर लाठीचार्ज किया। शिकायत के मुताबिक यह प्रदर्शन एक हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आयी हैं। आयोग ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और प्रमुख सचिव से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि पुलिस को बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी। प्रदर्शनकारियों को कितनी और कैसी चोटें आईं। पुलिस कार्रवाई का आधार क्या था और घायलों को क्या चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।




