US-भारत ट्रेड डील पर गुजरात में बढ़ी सियासत, AAP ने मांगा राज्यपाल से समय

US-भारत ट्रेड डील को लेकर गुजरात में किसान, व्यापारी और मध्यम वर्ग से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में हैं... AAP ने इन समस्याओं को... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने देशभर में हलचल मचा दी है.. इस डील को सरकार ऐतिहासिक बता रही है.. लेकिन विपक्ष और किसान संगठन इसे किसानों के लिए घातक मान रहे हैं.. खासकर गुजरात में इस समझौते का असर किसानों, व्यापारियों.. और मध्यम वर्ग पर पड़ने की बात हो रही है.. आम आदमी पार्टी गुजरात इकाई ने इस मुद्दे पर जोरदार विरोध जताया है.. AAP के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी ने विधायकों.. और क्षेत्रीय नेताओं के साथ मिलकर गुजरात के राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है.. वे राज्यपाल से मिलकर ट्रेड डील के नुकसान, किसानों की समस्याओं, व्यापारियों की दिक्कतों, मध्यम वर्ग की मुश्किलों.. और छोटे लोगों के लिए कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं.. जिसको लेकर AAP का कहना है कि यह डील गुजरात की लॉबी को बुरी तरह फंसा रही है.. और राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है..

जानकारी के मुताबिक 3 फरवरी 2026 को भारत.. और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए.. यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुआ.. डील के तहत दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेंगे.. अमेरिका ने भारत के कुछ उत्पादों पर शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया है.. भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने का वादा किया है.. समझौते में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने का इरादा जता रहा है.. जिसमें कृषि उत्पाद भी शामिल हैं.. अमेरिका से आने वाले मुख्य उत्पाद मक्का, सोयाबीन तेल, डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGS), रेड सोरघम, ट्री नट्स, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स हैं.. भारत ने इन पर शुल्क 0% से 30% तक कम करने का फैसला किया है.. जिसको लेकर सरकार का कहना है कि इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.. और भारत के निर्यात बढ़ेंगे.. लेकिन किसान संगठन और विपक्ष इसे किसान-विरोधी बता रहे हैं..

वहीं यह समझौता कुछ किसानों को फायदा दे सकता है.. भारत के चाय, कॉफी, मसाले, फल और अन्य उत्पाद अमेरिका में कम शुल्क पर निर्यात हो सकेंगे.. इससे निर्यात करने वाले किसानों को नया बाजार मिलेगा.. 2024 में भारत का अमेरिका के साथ कृषि व्यापार अधिशेष 1.3 बिलियन डॉलर था.. जो बढ़ सकता है.. लेकिन ज्यादातर किसानों के लिए यह नुकसानदायक है.. अमेरिकी किसान भारी सब्सिडी पाते हैं.. जिससे उनके उत्पाद सस्ते होते हैं.. भारत में ये उत्पाद सस्ते दाम पर आएंगे तो स्थानीय किसानों की फसलें नहीं बिकेगी.. अमेरिकी सोयाबीन तेल और DDGS के आयात से भारतीय तिलहन किसानों को नुकसान होगा.. किसान सोयाबीन और मूंगफली से मक्का और चावल की ओर शिफ्ट हो सकते हैं.. जिसे संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे किसान-विरोधी बताया है.. वे कहते हैं कि यह MSP को कमजोर करेगा और कॉर्पोरेट को फायदा देगा.. पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसान हड़ताल की योजना बना रहे हैं.. गुजरात में कपास और मूंगफली के किसान प्रभावित होंगे.. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह डील 10 साल में टैरिफ कम करेगी.. लेकिन किसानों को एडजस्ट करने का समय नहीं मिलेगा..

ट्रेड डील से छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग भी प्रभावित हो सकते हैं.. अमेरिकी उत्पाद सस्ते आएंगे तो स्थानीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.. अमेरिकी फल, नट्स और अन्य उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दाम पर उपलब्ध होंगे.. तो स्थानीय व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होगा.. मध्यम वर्ग के लिए महंगाई बढ़ सकती है.. क्योंकि कुछ उत्पाद महंगे हो सकते हैं.. साथ ही, कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी जुड़ सकते हैं.. क्योंकि किसानों के विरोध से हड़ताल और प्रदर्शन हो सकते हैं.. गुजरात में छोटे व्यापारी और किसान पहले से ही महंगाई और बाजार की समस्याओं से जूझ रहे हैं.. AAP का कहना है कि यह डील गुजरात की लॉबी को बुरी तरह फंसा रही है.. क्योंकि राज्य के निर्यातक तो फायदा उठा सकते हैं.. लेकिन आम किसान और व्यापारी नुकसान में रहेंगे..

आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी पूरे देश में इस डील के खिलाफ अभियान चला रही है.. AAP ने ट्रेड डील हटाओ, किसान बचाओ नाम से कैंपेन शुरू किया है.. पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है.. अमेरिकी राष्ट्रपति कह रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा.. जो महंगा पड़ेगा.. सस्ते विदेशी उत्पाद आने से भारतीय किसान तबाह हो जाएंगे.. AAP पंजाब के नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने डील को किसानों का सबसे बड़ा विश्वासघात बताया.. गुजरात में AAP प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी ने विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है.. वे राज्यपाल से मिलकर डील के नुकसान पर चर्चा करना चाहते हैं.. AAP का कहना है कि वे गुजरात के गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे और सरकार को घेरेंगे.. पार्टी का दावा है कि यह डील अमेरिकी दबाव में हुई है.. और इससे छोटे कारोबारियों को भी नुकसान होगा..

जानकारी के मुताबिक AAP गुजरात के नेतृत्व ने राज्यपाल से समय इसलिए मांगा है.. क्योंकि वे डील के गुजरात पर असर पर चर्चा करना चाहते हैं.. इशुदान गढ़वी ने कहा कि यह डील गुजरात के किसानों और व्यापारियों के लिए खतरा है.. अमेरिकी उत्पाद सस्ते आएंगे तो स्थानीय बाजार बर्बाद हो जाएंगे.. मध्यम वर्ग पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा.. और छोटे लोगों के लिए कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है.. AAP के विधायक और क्षेत्रीय नेता इस मीटिंग में शामिल होंगे.. पार्टी का कहना है कि राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर डील पर पुनर्विचार की मांग की जाएगी.. गुजरात में AAP की यह कवायद BJP को घेरने की रणनीति है.. क्योंकि राज्य BJP का गढ़ है और यहां किसान मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है.. AAP ने गुजरात में हाल के दिनों में किसान आंदोलनों में हिस्सा लिया है.. और अब इस डील को मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रही है..

केंद्र सरकार ने डील को किसानों के लिए फायदेमंद बताया है.. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसानों के हित सुरक्षित हैं.. डेयरी और कृषि पर कोई रियायत नहीं दी गई है.. सरकार का कहना है कि संवेदनशील उत्पादों पर कोई समझौता नहीं हुआ है.. अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रॉलिंस ने डील को अमेरिकी किसानों के लिए अच्छा बताया.. लेकिन किसान संगठन इससे सहमत नहीं हैं.. सरकार ने कहा कि डील से भारतीय निर्यात बढ़ेगा.. और किसानों को फायदा होगा.. लेकिन विपक्ष इसे किसान-विरोधी बता रहा है.. कांग्रेस नेता परताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह डील भारतीय किसानों को बेच दिया है.. अमेरिकी उत्पाद आने से MSP कमजोर होगा.. BJP ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है..

 

 

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