याददाश्त बढ़ाने के लिए करें ये योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
स्मृति का अर्थ उस मानसिक प्रक्रम से है, जिसमें व्यक्ति ज्ञानेंद्रियों से सूचनाओं का ग्रहण करके अपने मस्तिष्क में संचित करता है और जरूरत पडऩे पर उनको प्रत्यावाहित करता है। आसान शब्दों में समझें तो अनुभव किए हुए विषयों का ठीक-ठाक उसी रूप में स्मरण होना स्मृति है। अच्छी याददाश्त में तीव्रता होती है। व्यक्ति सीखी गई बातों को जल्दी याद कर लेता है। साथ ही लंबे समय तक बातें याद रहती हैं। अधिक मात्रा में बातों को याद रख सकते हैं। न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट के मुताबिक, जब मस्तिष्क का कोई भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है तो भी याददाश्त में कोई विशेष गड़बड़ी नहीं होती है। इससे ये बात भी साफ है कि मस्तिष्क के किसी एक हिस्से में स्मृति की समस्त घटनाएं समाहित नहीं होती हैं। कई लोगों की शिकायत होती है कि उनकी याददाश्य या स्मरण शक्ति कमजोर हो रही है। लेकिन ऐसा होता क्यों है? लोग चीजें या बातें भूल कैसे जाते हैं? स्मृति क्षमता घटने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे, दवाएं, अल्कोहल-ड्रग्स, चिंता व तनाव, अत्यधिक मानसिक कार्य, अवसाद, मस्तिष्कीय चोट, संक्रमण, थॉयराइड की गड़बड़ी, अनिद्रा, पोषण की कमी, उम्र का प्रभाव, वैचारिक विकृति, डिमेन्शिया और मानसिक विकार। योग याददाश्त बढ़ाने में सहायक बन सकता है। आसन, प्राणायाम, ध्यान आदि के माध्यम से मस्तिष्क की क्षमता को तीव्र किया जा सकता है और स्मृति के साथ साथ मस्तिष्क की अन्य अद्भुत क्षमताओं को भी बढ़ाया जा सकता है। हालांकि योग के साथ ही पोषण युक्त खानपान और स्वस्थ रहन सहन भी सहायक है।
भ्रामरी प्राणायाम
वर्ष 2006 में भ्रामरी प्राणायाम का स्मृति क्षमता पर पडऩे वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया। 30 छात्राओं ने 30 दिनों तक प्रतिदिन भ्रामरी प्राणायाम के 10 चक्र किए। प्राणायाम आरंभ कराने के पूर्व तथा 30 दिन के पश्चात स्मृति क्षमता का परीक्षण किया गया। परिणामों में पाया गया कि प्राणायाम करने वाले प्रयोज्यों के स्मृति स्तर में वृद्धि हुई।
भुजंगासन
भुजंगासन का अभ्यास पीठ दर्द, साइटिका पेन, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल और अन्य स्पाइनल से संबंधित समस्याओं को ठीक करने में उपयोगी है। साथ ही अस्थमा, डायबिटीज व पेट संबंधित बीमारियों को ठीक करने में उपयोगी है। चूंकि स्पाइनल कार्ड से ही मस्तिष्क के विभिन्न भाग जुड़े हुए होते हैं, इसलिए इसके स्वस्थ रहने पर स्वस्थ मस्तिष्क व स्मृति क्षमता का विकास होता है।
सर्वांगासन
सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से हृदय शुद्ध रक्त को मस्तिष्क की ओर भेजता है, जिससे प्रतेक कोशिका को ऑक्सीजन व ब्लड सप्लाई होने से मस्तिष्क को पोषण मिलता है। इससे मस्तिष्क सक्रिय रहता है जिससे मानसिक शक्ति, ग्रहण शक्ति और बौद्धिक शक्ति बढ़ती है। बच्चों में इसका अभ्यास थॉयराइड व पिट्यूटरी ग्लैण्ड को भी सक्रिय करता है जिसके परिणाम स्वरूप बच्चों की लंबाई भी अच्छी तरह बढ़ती है।
ओम उच्चारण
ध्यान, प्राणायाम और ओम का उच्चारण भी मस्तिष्क की क्षमताओं को बढ़ा सकता है। इसमें पाया गया कि 5 मिनट गहरी श्वास प्रश्चास प्रक्रिया और 30 मिनट का ओम उच्चारण तथा 5 मिनट की प्रार्थना से एक महीने में एकाग्रता, मेमोरी स्तर में अधिक वृद्धि हुई और थकान के स्तर में अधिक कमी हुई। मंत्र का ध्यान या मंत्र उच्चारण स्मृति क्षमता को बढ़ाता है। आंख द्वारा देख गए, कान द्वारा सुने गए और जीभ द्वारा बोले गए शब्दों का स्मृति पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इससे व्यक्ति आसानी से एकाग्र भी होता है और उसका ध्यान इधर उधर भटकता नहीं है। उच्चारण करने से उत्पन्न तरंगें दिमाग पर प्रभाव डालती हैं, जो कि स्मृति क्षमता को बढ़ाने में सहयोग करती हैं।
सिद्धासन
सिद्धासन को योग विज्ञान में सभी आसनों में सर्वश्रेष्ठ और मन के विकारों को नष्ट करने वाला माना गया है। ध्यान और प्राणायाम के लिए यह सबसे उत्तम और स्थिर मुद्रा है। नियमित रूप से सिद्धासन का अभ्यास करने से शरीर और मस्तिष्क को लाभ मिलते हैं। यह मन की चंचलता और आलस्य को दूर कर ध्यान की उच्चतम अवस्था में पहुंचने में मदद करता है। इस मुद्रा में रीढ़ की हड्डी, गर्दन और पीठ पूरी तरह सीधी रहती है, जिससे शरीर का पोस्चर सुधरता है और पीठ दर्द में आराम मिलता है।
मत्स्यासन
मत्स्यासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘मत्स्य’, जिसका अर्थ है मछली और ‘आसन’, यानी बैठने या शरीर की मुद्रा। इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति मछली के समान होती है, जिसमें छाती को ऊपर की ओर उठाया जाता है और सिर को पीछे की तरफ झुकाया जाता है। यह मुद्रा शरीर के ऊपरी हिस्से को फैलाव देती है और पेट के अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। मत्स्यासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और छाती व गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है। मानसिक रूप से यह आसन तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक माना जाता है, जिससे मन शांत रहता है और नींद की गुणवत्ता सुधरती है।



