अजीत पवार की मौत पर उठते सवाल ?

- टीएमसी के बाद सपा ने जताया संदेह, न्यायिक जांच की मांग
- पंचतत्व में विलीन हुए एनसीपी नेता, अंतिम संस्कार में तमाम दिग्गज शामिल
- और अब सबसे बड़ा सवाल- एनसीपी की ‘घड़ीÓ की चाबी किसके हाथ?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति आज शोक में है लेकिन इस शोक के बीच सवालों की आवाज भी उतनी ही तेज है। बारामती के पास हुए रहस्यमय प्लेन क्रैश में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत सिर्फ एक दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश। यह सवाल अब सियासी गलियारों से निकलकर राष्ट्रीय बहस बन चुका है। टीएमसी के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी इस मौत पर संदेह जताते हुए स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग कर दी है। उधर आज बारामती में अजीत पवार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें गृहमंत्री समेत देश के तमाम बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए। सबके मन में था कैमरे होंगे सलामी होगी लेकिन वह (अजीत पवार ) साथ नहीं चलेंगे।
अलविदा अजीत अंतिम विदाई में जुटी भीड़
आज बारामती में अजीत पवार को अंतिम विदाई दी गई। देश गृहमंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, तमाम केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री सब मौजूद रहे। इसमें अपार भीड़ जुटी। श्रद्धांजलि सभा हुई। उधर शोकसभा में मौन होगा लेकिन देश के भीतर सवाल बोलते रहेंगे क्या जांच निष्पक्ष होगी? क्या सच्चाई सामने आएगी? या फिर यह मामला भी फाइल में बंद होकर इतिहास में दफन हो जाएगा?
जब अजीत पवार ने कहा था बीजेपी के भ्रष्टाचार की फाइलें मेरे पास हैं
अजीत पवार के पुराने बयान आज फिर से चर्चा में हैं। कई मौकों पर उन्होंने इशारों में और कभी-कभी खुलकर कहा था कि बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलें मेरे पास हैं। समय आने पर सब सामने आएगा। हालांकि उन्होंने कभी किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति समझने वाले जानते हैं कि यह बयान हल्के में नहीं थे। यही वजह है कि आज विपक्ष यह सवाल पूछ रहा है कि क्या अजीत पवार सिर्फ एक राजनीतिक सहयोगी थे या फिर सत्ता के भीतर असहज सच जानते थे? क्या उनकी मौत से कुछ फाइलें हमेशा के लिए दफन हो गईं? ममता बनर्जी ने भी इसी बिंदु को रेखांकित करते हुए कहा है कि जब कोई नेता सत्ता के भीतर की सच्चाई जानता है तो उसकी सुरक्षा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं लोकतांत्रिक मुद्दा बन जाती है।
यह हादसा नहीं, साजिश हो सकती है : रविदास
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा का बयान इस पूरे मामले में आग में घी डालने जैसा है। उन्होंने साफ कहा है कि बारामती प्लेन क्रैश सामान्य दुर्घटना नहीं लगती। जिस तरह से घटनाक्रम हुआ वह कई सवाल खड़े करता है। यह साजिश का नतीजा भी हो सकता है। इस मामले में न्यायिक जांच अनिवार्य है। मेहरोत्रा ने कहा कि अजीत पवार कोई साधारण नेता नहीं थे। वह महाराष्ट्र की सत्ता संरचना की रीढ़ रहे हैं। चाहे वित्त विभाग हो, सहकारिता हो या सरकार के भीतर शक्ति संतुलन। जिस व्यक्ति के पास सत्ता के भीतर की सबसे संवेदनशील फाइलें रही हों उसकी मौत को सिर्फ तकनीकी खराबी कह देना जनता के साथ धोखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विमान की तकनीकी स्थिति की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? सपा कार्यकर्ताओं ने देशभर में प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। सवाल नम्बर एक — उड़ान से पहले सुरक्षा ऑडिट किस एजेंसी ने किया? सवाल नम्बर दो — हादसे के तुरंत बाद जांच की दिशा पहले से तय क्यों दिख रही है?
एनसीपी की ‘घड़ी’ अब किसके हाथ?
अजीत पवार की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं एनसीपी की सत्ता संरचना की भी मौत है। अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि पार्टी की ‘घड़ी’ की चाबी किसके हाथ जाएगी? क्या शरद पवार फिर से पूरी कमान संभालेंगे? क्या पार्टी में नया सत्ता संघर्ष शुरू होगा? या फिर यह शून्य एनसीपी को और कमजोर कर देगा? अजीत पवार वह नेता थे जो संगठन, सरकार और सत्ता तीनों को एक साथ संभालते थे। उनकी गैरमौजूदगी सिर्फ भावनात्मक नहीं रणनीतिक नुकसान भी है।
दुर्घटना या साजिश? विपक्ष का सीधा आरोप
बारामती प्लेन क्रैश को लेकर भारत की विपक्षी राजनीतिक दलों ने सवालों की झड़ी लगा दी है। प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अजीत पवार की मौत को सीधे साजिश करार दिया था और कहा था कि अजीत लगातार महायुति सरकार से हटने की बात कह रहे थे। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राजनीतिक हस्ती की मौत को महज तकनीकी खराबी कहकर टाला नहीं जा सकता। अब सपा का सुर भी उसी लाइन पर है। सपा से पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर रविदास मेहरोत्रा ने कहा है कि अगर सब कुछ सामान्य था तो इतनी जल्दबाजी क्यों? ब्लैक बॉक्स की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं कि जा रही। उन्होंने कहा हे कि राजनीति में संयोग और दुर्घटनाओं पर भरोसा कब तक चलेगा।
सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी बने
टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि यह सिर्फ महाराष्ट्र का मामला नहीं है। जब सत्ता के भीतर के रहस्य रखने वाला नेता इस तरह मारा जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है। ममता बनर्जी ने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कमेटी बनाए जाने की शर्त रखी है। उनका कहना है कि उन्हें देश कि किसी और एजेंसी पर अब भरोसा नहीं रहा। ममता बनर्जी का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि वह अजीत पवार को व्यक्तिगत रूप से जानती थीं और कई मंचों पर उनके साथ दिख चुकी हैं। उन्होंने साफ कहा है कि राजनीति में असहज सवाल पूछना अपराध नहीं है। अपराध है सवालों को दबाना।




