ट्विशा शर्मा मौत मामले की CBI जांच की सिफारिश, दोबारा पोस्टमार्टम के लिए हाईकोर्ट पहुंचे परिजन

भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की है। परिजनों ने साक्ष्य छिपाने और निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का आरोप लगाया है। वहीं दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर परिवार हाईकोर्ट पहुंच गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश कर दी है। वहीं दूसरी ओर मृतका के परिजन अब दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। परिवार का आरोप है कि मामले में साक्ष्यों को छिपाने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। परिजनों ने यह भी दावा किया है कि ट्विशा शर्मा के ससुराल पक्ष में एक पूर्व जिला जज के प्रभाव के कारण निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

दहेज मृत्यु का मामला दर्ज

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3/4 के तहत केस दर्ज किया गया है। सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अब CBI को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत CBI को पूरे मध्य प्रदेश में जांच का अधिकार देने की सहमति भी प्रदान कर दी गई है।

जांच में षड्यंत्र और दुष्प्रेरण की भी होगी पड़ताल

सरकारी आदेश के अनुसार CBI केवल मौत की परिस्थितियों की ही नहीं, बल्कि मामले से जुड़े संभावित षड्यंत्र, साक्ष्य छिपाने और दुष्प्रेरण जैसे पहलुओं की भी जांच करेगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस केस को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

दोबारा पोस्टमार्टम के लिए हाईकोर्ट पहुंचे परिजन

इसी बीच ट्विशा शर्मा के परिजनों ने मृतका के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां हैं। उनका कहना है कि भोपाल एम्स में किए गए पोस्टमार्टम में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते परिवार को रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है।

निचली अदालत से खारिज हो चुकी है याचिका

गौरतलब है कि दो दिन पहले भोपाल की एक अदालत ने ट्विशा शर्मा के परिजनों की दोबारा पोस्टमार्टम कराने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उच्च न्यायालय मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर उचित निर्णय देगा।

सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा

ट्विशा शर्मा केस को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे दहेज उत्पीड़न और प्रभावशाली लोगों के दबाव से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले पर सबकी नजर CBI जांच और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। यह केस आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित कानूनी और सामाजिक बहसों में शामिल हो सकता है।

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