इंजन की कमी से जूझ रहे Tejas Mk-1A को राहत, GE से 12 इंजन की सप्लाई
तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान कार्यक्रम में गति आई है. GE Aerospace अब इंजन सप्लाई में तेजी ला रहा है, जिससे HAL द्वारा उत्पादन बढ़ाया जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक एक पूरी स्क्वाड्रन तैयार हो जाए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान कार्यक्रम में गति आई है. GE Aerospace अब इंजन सप्लाई में तेजी ला रहा है, जिससे HAL द्वारा उत्पादन बढ़ाया जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक एक पूरी स्क्वाड्रन तैयार हो जाए.
भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA Tejas Mk-1A कार्यक्रम में अब रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, इस साल के अंत तक Tejas Mk-1A के लिए कम से कम 12 और इंजन मिल जाएंगे. HAL के पास फिलहाल 27 एयरफ्रेम तैयार हैं. इनमें 11 विमानों में इंजन लगे हैं, जबकि 16 विमान रिजर्व इंजन के साथ उड़ान भर चुके हैं.
GE Aerospace ने सप्लाई चेन की दिक्कतों के बाद अब हर महीने 4 इंजन देने का भरोसा दिया है. सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक कम से कम एक पूरी Tejas Mk-1A स्क्वाड्रन तैयार हो जाए और2033 तक 180 विमानों की डिलीवरी पूरी हो. यह स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
2021 में शुरू हुआ बड़ा Mk-1A कार्यक्रम
Tejas Mk-1A के मौजूदा बड़े कार्यक्रम की शुरुआत 13 जनवरी 2021 को हुई, जब CCS ने भारतीय वायुसेना के लिए 83 विमान खरीदने को मंजूरी दी. इसमें 73 Tejas Mk-1A फाइटर और 10 Mk-1 ट्रेनर शामिल था. खरीद के लिए करीब 45,696 करोड़ और डिजाइन, डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 1,202 करोड़ की लागत आई थी.
इसके बाद 3 फरवरी 2021 को HAL को करीब 48,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया. योजना के मुताबिक पहले 3 विमान तीसरे साल और उसके बाद हर साल 16 विमान देने थे. पूरी डिलीवरी आठ साल में पूरी होनी थी.
पहले 83 विमानों के लिए GE Aerospace के F404-IN20 इंजन चुने गए. कुल 99 इंजन की सप्लाई होनी थी. लेकिन ग्लोबल सप्लाई चेन और उत्पादन से जुड़ी दिक्कतों के कारण इंजन की डिलीवरी में देरी हुई. यही देरी आगे चलकर Tejas Mk-1A की उत्पादन और डिलीवरी टाइमलाइन के लिए बड़ी चुनौती बनी.
मई 2022 में Mk-1A ने भरी पहली उड़ान
20 मई 2022 को Tejas Mk-1A प्रोटोटाइप ने पहली उड़ान भरी. इसके बाद विमान के एवियोनिक्स, हथियार और दूसरे सिस्टम के परीक्षण आगे बढ़े. 2023 में Astra Beyond Visual Range Air-to-Air Missile समेत कई हथियारों और सिस्टम का परीक्षण भी किया गया.
इसके बाद 28 मार्च 2024 को पहला प्रोडक्शन-स्टैंडर्ड Tejas Mk-1A पहली बार आसमान में उड़ा. लेकिन उत्पादन विमान तैयार होने के बावजूद इंजन और सप्लाई से जुड़े मुद्दों के कारण IAF को डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी. यानी 2021 में बनाई गई शुरुआती डिलीवरी टाइमलाइन से कार्यक्रम काफी पीछे चला गया. वहीं, 25 मार्च 2025 को GE Aerospace ने HAL को पहला F404-IN20 इंजन सौंपा. यह पहले 83 विमानों के लिए तय 99 इंजनों की सप्लाई का हिस्सा था. हालांकि सप्लाई की रफ्तार अभी भी उत्पादन की जरूरत के मुताबिक नहीं थी.
सितंबर 2025: 97 और Tejas का ऑर्डर
25 सितंबर 2025 को रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 97 और LCA Mk-1A का करार किया. इसमें 68 फाइटर, 29 ट्विन-सीटर समेत कुल 97 विमान की डील हुई. इसकी कीमत टैक्स को छोड़कर लगभग 62,370 करोड़ से ज्यादा थी, डिलीवरी 2027-28 तक देने की बात हुई थी. इस ऑर्डर के साथ Tejas Mk-1A का कुल ऑर्डर 180 विमानों का हो गया.
कुल रकम कितनी?
पहले 83 विमानों का कॉन्ट्रैक्ट करीब 48,000 करोड़ और दूसरे 97 विमानों का कॉन्ट्रैक्ट 62,370 करोड़ से ज्यादा का है. दोनों प्रमुख एयरक्राफ्ट कॉन्ट्रैक्ट की घोषित रकम जोड़ने पर यह राशि 1.10 लाख करोड़ से ज्यादा होती है. हालांकि दोनों कॉन्ट्रैक्ट की कीमतों की संरचना अलग है और दूसरे करार की राशि टैक्स छोड़कर है, इसलिए इसे सीधे प्रति विमान कीमत नहीं माना जा सकता.
नवंबर 2025: 97 विमानों के लिए 113 नए इंजन
7 नवंबर 2025 को HAL और GE Aerospace के बीच 97 नए Mk-1A विमानों के लिए 113 F404-GE-IN20 इंजन और सपोर्ट पैकेज का समझौता हुआ. इनकी डिलीवरी 2027 से 2032 के बीच होनी है. सूत्रों के मुताबिक इस इंजन पैकेज की कीमत 1 अरब डॉलर से ज्यादा बताई गई है. यह 97 विमानों के 62,370 करोड़ से ज्यादा वाले मुख्य कॉन्ट्रैक्ट से अलग इंजन-सप्लाई समझौता है.
अब मौजूदा स्थिति में HAL के पास 27 Tejas Mk-1A एयरफ्रेम तैयार हैं. इनमें 11 विमानों में इंजन लगे हैं, जबकि 16 विमानों ने रिजर्व इंजन के साथ उड़ान भरी है. हथियारों का इंटीग्रेशन लगभग पूरा बताया गया है, लेकिन AESA रडार की परफॉर्मेंस से जुड़े अंतिम मुद्दों पर काम जारी है. GE के मुताबिक हर महीने 4 इंजन मिलने हैं. इसी रफ्तार से 2026 के अंत तक एक पूरी स्क्वाड्रन तैयार कर लिया जाएगा.
वहीं, दूसरे ऑर्डर के 97 विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होनी है और छह साल में पूरी होनी है. मौजूदा योजना के मुताबिक यह डिलीवरी अवधि सितंबर 2027 से सितंबर 2033 तक है. मौजूदा योजना के मुताबिक 180 Tejas Mk-1A की पूरी डिलीवरी 2033 तक पूरी करने का लक्ष्य है.
Tejas Mk-1A में क्या खास?
Mk-1A को मूल Tejas Mk-1 से ज्यादा आधुनिक कॉन्फिगरेशन के साथ तैयार किया गया है.
इसमें प्रमुख रूप से AESA रडार
Beyond Visual Range मिसाइल क्षमता
Electronic Warfare Suite
Air-to-Air Refuelling क्षमता शामिल हैं.



