संत कबीर नगर की सुष्मिता का अंतरिक्ष तक सफर, स्पेस आर्ट से भारत की रचनात्मक शक्ति को दे रहीं नई पहचान

ग्राम गंगा देवरिया, खलीलाबाद निवासी सुष्मिता सिंह बक्की आज अंतरिक्ष कला यानी स्पेस आर्ट के क्षेत्र में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर रही हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर एक बेटी ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मक सोच के दम पर अंतरिक्ष की अनंत दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।

ग्राम गंगा देवरिया, खलीलाबाद निवासी सुष्मिता सिंह बक्की आज अंतरिक्ष कला यानी स्पेस आर्ट के क्षेत्र में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर रही हैं।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियर सुष्मिता पिछले सात वर्षों से स्पेस आर्टिस्ट के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने विज्ञान और कला के अनोखे मेल को अपनी पहचान बनाया है। अपनी पेंटिंग्स और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से वह अंतरिक्ष विज्ञान के जटिल विषयों को आम लोगों तक सरल और आकर्षक रूप में पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।

गांव से शुरू हुआ सफर पहुंचा वैज्ञानिक संस्थानों तक

सुष्मिता सिंह बक्की की कला यात्रा ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों तक पहुंचाया है। उनकी स्पेस आर्ट को वैज्ञानिक समुदाय द्वारा भी सराहना मिली है। इसी क्रम में उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), अहमदाबाद जाने का अवसर प्राप्त हुआ, जहां उन्होंने अपनी कला के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति अपनी सोच और दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।

उनकी कला केवल कल्पना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अंतरिक्ष अभियानों, ग्रहों, तारों, ब्रह्मांडीय घटनाओं और वैज्ञानिक अवधारणाओं को कलात्मक रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत करती हैं।

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और NASA वैज्ञानिक को भेंट की पेंटिंग

सुष्मिता सिंह बक्की की उपलब्धियों में एक खास उपलब्धि वह भी है, जब उन्होंने अपनी स्पेस आर्ट पेंटिंग अंतरिक्ष यात्री और वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला को भेंट की। उनकी इस कला को अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा काफी सराहा गया।

इसके अलावा उन्होंने NASA की वैज्ञानिक डॉ. हाशिमा हसन को भी अपनी एक स्पेस आर्ट पेंटिंग भेंट की, जिसे NASA में स्थान मिला। यह उपलब्धि उनके लिए ही नहीं, बल्कि संत कबीर नगर जैसे छोटे जिले के लिए भी गौरव का विषय है।

वहीं, गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिक दीपक सिंह ने भी सुष्मिता की तीन स्पेस आर्ट पेंटिंग्स विशेष रूप से मंगाईं, जो वर्तमान में ISRO कार्यालय में प्रदर्शित हैं।

क्या है स्पेस आर्ट? विज्ञान और कल्पना का अनोखा संगम

सुष्मिता बताती हैं कि स्पेस आर्ट केवल एक पेंटिंग नहीं है, बल्कि यह विज्ञान और कल्पना के बीच एक सेतु का काम करती है।

उनके अनुसार, “स्पेस आर्ट ऐसी कला विधा है जिसमें ब्रह्मांड, ग्रहों, तारों, अंतरिक्ष अभियानों और मानव कल्पना को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं को आम लोगों और नई पीढ़ी तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।”

यह कला लोगों में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा पैदा करती है और विज्ञान को रोचक तरीके से समझने का माध्यम बनती है।

Mission ShakthiSAT से जुड़कर बेटियों को दे रहीं प्रेरणा

हाल ही में सुष्मिता सिंह बक्की Mission ShakthiSAT से जुड़ी हैं। यह एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया के 108 देशों के बच्चों, विशेष रूप से बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान, नवाचार, कहानी, कला और कल्पना के माध्यम से जोड़ना है।

इस मिशन के जरिए बच्चों को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने, नए विचार विकसित करने और अपने सपनों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

सुष्मिता का मानना है कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देना भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रॉकेट वैज्ञानिक डॉ. क्षितिज मल्ल के साथ विशेष कला परियोजना पर काम

सुष्मिता वर्तमान में रॉकेट वैज्ञानिक डॉ. क्षितिज मल्ल के साथ एक विशेष कला श्रृंखला पर कार्य कर रही हैं। इस परियोजना का नाम है“Flow of Energy in the Cosmos – Bharat’s Contribution” इस अनूठी कला श्रृंखला में आधुनिक विज्ञान, भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा और कला का संगम देखने को मिलेगा।

इस परियोजना के तहत तैयार की गई एक विशेष पेंटिंग भारत से लगभग 13,500 किलोमीटर की यात्रा तय कर संयुक्त राज्य अमेरिका जाएगी, जहां इसे डॉ. क्षितिज मल्ल द्वारा स्थापित Brahmand Lab का हिस्सा बनाया जाएगा।

ब्रह्मांडीय ऊर्जा और भारतीय ज्ञान पर आधारित पेंटिंग्स

सुष्मिता के अनुसार इस श्रृंखला की पहली पेंटिंग दशमहाविद्या और ब्रह्मांडीय ऊर्जा की अवधारणा पर आधारित है। इसमें भारतीय आध्यात्मिक विचारों और ब्रह्मांड में ऊर्जा के प्रवाह को कलात्मक रूप में दिखाने का प्रयास किया गया है।

वहीं दूसरी पेंटिंग बिग बैंग थ्योरी और हिरण्यगर्भ जैसे विषयों पर आधारित है। इसमें आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों और भारतीय दर्शन के बीच संबंध को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

सुष्मिता मानती हैं कि दुनिया की हर सभ्यता ने अपने तरीके से सृष्टि और जीवन के रहस्यों को समझने का प्रयास किया है। विज्ञान और दर्शन दोनों ही ऊर्जा को सृष्टि के मूल आधार के रूप में देखते हैं।

भारत की वैज्ञानिक सोच को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का प्रयास

सुष्मिता सिंह बक्की का उद्देश्य केवल कला बनाना नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।

उनका मानना है कि ऊर्जा ही हर निर्माण, परिवर्तन और सृजन का आधार है। उनकी कला इसी विचार को ब्रह्मांडीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।

छोटे शहर से निकली प्रतिभा बनी प्रेरणा

संत कबीर नगर की बेटी सुष्मिता सिंह बक्की की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा किसी स्थान की मोहताज नहीं होती। गांव और छोटे शहरों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अपने ज्ञान, मेहनत और कल्पनाशक्ति के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकती हैं।

विज्ञान, कला और भारतीय संस्कृति को जोड़ने वाली सुष्मिता की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है। उनकी उपलब्धियां न केवल संत कबीर नगर और उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय हैं।
रिपोर्ट- अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर

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