सुनवाई की लंबी लिस्ट देख जज बोले – मैं भूखा और थका हूं
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 235 मामलों की सूची थी, जिसमें से सिर्फ 29 नए मामले सुने जा सके.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने अत्यधिक कार्यभार और लंबी सुनवाई के कारण थकान महसूस करते हुए चंद्रलेखा सिंह याचिका में फैसला सुरक्षित रखा.
उन्होंने कहा कि वे निर्णय लिखाने में शारीरिक रूप से असमर्थ हैं.इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 235 मामलों की सूची थी, जिसमें से सिर्फ 29 नए मामले सुने जा सके.
देश की अदालतों का हाल किसी से छिपा नहीं है. लगभग हर कोर्टरूम जजों की कमी से जूझ रहा है. तो वहीं दूसरी तरफ मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में ज्यादा काम को लेकर भी कुछ अनोखी स्थिति देखने को मिली है. मामलों की सुनवाई और फैसला सुना रहे जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने लंबी सुनवाई के बाद कहा कि वे बहुत थक गए हैं, अभी फैसला लिखवाने की हालत में नहीं हैं. यही वजह है कि उन्होंने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा, मैं भूखा, थका और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने में असमर्थ महसूस कर रहा हूं, इसलिए निर्णय सुरक्षित रखा जाता है. न्यायमूर्ति ने चंद्रलेखा सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया. यह याचिका 2025 में डीआरटी के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी.
क्या है पूरा मामला?
लखनऊ बेंच में चल रहा यह पूरा मामला चंद्रलेखा सिंह की याचिका से जुड़ा हुआ है, जो साल 2025 में डीआरटी (कर्ज वसूली अधिकरण) के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी. हालांकि इस मामले में मई 2025 में ही हाईकोर्ट ने डीआरटी का आदेश रद्द कर दिया था. इसके साथ ही तुरंत नए सिरे से मामले की सुनवाई के आदेश भी दिए थे.
हालांकि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में भी चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, क्योंकि एक पक्ष को सुना नहीं गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट छह महीने के भीतर इस मामले का दोबारा फैसला करे. ह छह महीने की समय-सीमा 24 फरवरी 2026 को खत्म होने वाली थी. इसके बाद भी कोर्ट में फैसला नहीं हो पाया.
जस्टिस विद्यार्थी पर काम का ज्यादा प्रेशर?
मामले के सुनवाई के दिन ही जस्टिस विद्यार्थी की कोर्ट में कुल 235 मामले लिस्टेड किए गए थे. इनमें 92 मामले नए थे. 101 पुराने, 39 विविध आवेदन के अलावा 3 अतिरिक्त सूची के मामले भी शामिल किए गए थे. पूरी दिन चले काम के बाद भी शाम 4:15 बजे तक वह सिर्फ 29 नए मामलों की ही सुनवाई कर पाए थे.
थकान की वजह से नहीं सुनाया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए इस खास मामले की सुनवाई शाम 4:15 बजे शुरू हुई और करीब 7:10 बजे तक चली.दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों ने लंबी बहस हुई. नवाई खत्म होने के बाद जज ने कहा कि वह बहुत थक चुके हैं और अभी फैसला लिखना संभव नहीं है. जज ने साफ किया कि यह सिर्फ शारीरिक थकान की वजह से था और इसलिए निर्णय सुरक्षित रखा गया है.



