ओम बिरला को अपनी टिकट पर भेज दिया विदेश, एपस्टीन फाइल वाले मंत्री का मिला समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी जब विवादों में घिर जाते हैं या उन्हें लगता है उनके सामने आने से विवाद होगा यो वो अपनी जगह किसी मंत्री को भेज देते हैं। लेकिन इस बार पीएम मोदी को खुद जिस कार्यक्रम में जाकर भारत का नेतृत्व करना था

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या मोदी के कार्यकाल में नैतिकता बिलकुल खत्म हो चुकी है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर एक तरफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है उन्हीं ओम बिरला को पीएम मोदी ने अपनी जगह भारत से बाहर जा कर भारत का नेतृत्व करने का फैसला लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी जब विवादों में घिर जाते हैं या उन्हें लगता है उनके सामने आने से विवाद होगा यो वो अपनी जगह किसी मंत्री को भेज देते हैं। लेकिन इस बार पीएम मोदी को खुद जिस कार्यक्रम में जाकर भारत का नेतृत्व करना था वहां उन्होंने अपनी जगह लोकसभा स्पीकर को भेजने का फैसला लिया है। यही नहीं पीएम मोदी को अपने जिस मंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगना चाहिए था। जिस मंत्री के नाम से उनकी पूरी सरकार की ही नहीं बल्कि भारत की बदनामी हो रही है, प्रधानमंत्री मोदी अपने उसी मंत्री को खुलेआम जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। तो वो कौन सा मंत्री है जिसको जन्मदिन की बधाई देकर मोदी ने अपने लिए आफत खड़ी क ली है और स्पीकर ओम बिड़ला को मोदी कहां भेज रहे हैं.
आपको याद होगा कि आज से कुछ महीनें पहले जब बांग्लादेश के हालात बिगड़े थे। वहां रहने वाले हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रहा था तो उसको लेकर भारत में काफी माहौल बनाया गया था। जोश दिखाया गया था। टीवी डिबेट्स में हिंदुओं को लेकर एंकरों की फौज खड़ी हो गई थी। बहाने बहाने से अपने देश के अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जाने लगा था। आईपीएल में जब एक बांगलादेशी क्रिकेटर की एंट्री हुई तो कहर टूट पड़ा। बीजेप नेताओं ने टीम के को-ओनर शाहरुख़ खान को निशाना बनाकर उन्हें देश द्रोही घोषित कर दिया गया।
किसी ने बीसीसीआई से एक सवाल नहीं पूछा बाबाओं से लेकर यूपी के मंत्रियों और छुटपुट नेताओं ने देश के सुपरस्टार को गालियां दी। ये सब पूरा माहौल बनाया गया लेकिन मोदी ने बांग्लादेश को लेकर एक बयान नहीं दिया। उलटा शेख हसीना को पनाह दे रखी। हिंदुओं की सरकार बताने वालों ने बांगलादेश के हिंदुओं को लेकर एक कदम नहीं उठाया। उलटा इसको लेकर घुसपैठियों का मुद्दा बनाकर चुनाव प्रचार किया। और अब जब बांग्लादेश के हालात सामान्य होने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के चेयरमैन तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश में नई सरकार का गठन होने जा रहा है तो मोदी जी फिर एक बार दुबक कर बैठ गए हैं।
दरअसल, 17 फ़रवरी को ढाका में तारिक रहमान बतौर प्रधानमंत्री शपथ लेने जा रहे हैं जिसके शपथ ग्रहण समारोह के लिए पीएम मोदी सको बुलावा आया है। लेकिन बदनामी के डर से मोदी ने इस ईवेंट से दूरी बना ली है और अपनी जगह लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को भेजने का फैसला ले लिया है। जी हां, तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी नहीं, बल्कि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला जाएँगे। भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट्य़स के जरिये बताया जा रहा है कि मोदी 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मैक्रों भारत में एआई इंपैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आ रहे हैं। इसलिए मोदी बांग्लादेश नहीं जा पाएंगे। इसके बजाय ओम बिड़ला को भेजा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में विदेश सचिव विक्रम मिश्री के भी उनके साथ जाने की बात कही गई है।
कुछ दिनों पहले ही विपक्ष ने ओम बिड़ला के खिलाफ जब अविश्वास प्रस्ताव लानो का फैसला किया तो ओम बिड़ला ने कह दिया था कि वो नैतिकता के आधार पर वोटिंग हो जाने तक अब लोकसभा का कार्रवाई में हिस्सा बनेंगे। लेकिन अभी सदन में वोटिंग भी नहीं हुआ और मोदी ने सारी नैतिकताओं को ताक पर रखते हुए उन्हीं ओम बिड़ला को भारत का नेतृत्व करने के लिए आगे कर दिया है जिनकी खुद की कुर्सी पर तलवार लटक रही है।
वहीं जिन मोदी भक्तों को ये लग रहा है कि मोदी ने बांग्लादेश में कदम न रख कर बांग्लादेश को आंख दिखा दी है जब बांग्लादेश में नई सरकार बनने का फैसला हुआ तो सबसे पहले बधाई देने वाले हमारे प्रधानमंत्री ही थे। 12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी ने 300 सीटों वाली संसद में 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। फिर 13 फरवरी को मोदी ने सबसे पहले तारिक रहमान को फोन किया और बधाई दी.
साथ ही उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘तारिक रहमान को बीएनपी की निर्णायक जीत पर गर्मजोशी से बधाई।’ मोदी ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने दोनों देशों के विकास लक्ष्यों पर काम करने की इच्छा जताई।बीएनपी ने भी मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि वे भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहते हैं। दोनों तरफ से सम्मान और चिंताओं का ध्यान रखने की बात कही गई। मतलब मोदी बांग्लादेश की नई सरकार से संबंध तो बना रहे हैं लेकिन उसी टाइम पर वो बांग्लादेश जाने से भी डर रहे हैं। क्योंकि अगल ऐसा होता है तो विपक्ष को मोदी को घुसपैठिये के मुद्दे पर घेरने का मौका मिल जाएगा। साथ ही उनकी कोर हिंदु वोट बैंक भी मोदी से नाराज हो सकता है। ऐसे में मोदी ने बांग्लादेश नी जाने का फासला लिया है और अपनी जगह ओम बिड़ला को भेज दिया है जो कुछ दिन पहले नैतिकता सकी बात कर रहे थे।
मोदी के एक खासमखास केंद्रीय मंत्री हैं हरदीप सिंह पुरी। हरदीप सिंह पुरी वही हैं जिनका नाम एपस्टीन फाइल्स में 430 बार नाम आ चुका है। जिन्होंने कुछ दिन पहले खुद कुबूल किया था कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन ने 3 से 4 बार मुलाकात की है। जिनसे प्रधानमंत्री मोदी को इस्तीफा मांगना चाहिए था, उनको प्रधानमंत्री मोदी खुद जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। जहां दुनियाभर में बस एक बार भी एपस्टीन फाइल्स में नाम आ जाने पर बड़े से बड़े पदें पर बैठे नेता मंत्री और अधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं तो वहीं भारत में गजब ही खेल चल रहा है। पहले तो कहा जाता है कि सब झूठ है।
फिर जब मंत्री जी बुरी तरह फंस जाते हां जेफरी एपस्टीन से उनकी चैट लीक हो जाती है तब हरदीप पुरी जी प्रेम कांफ्रेंस करते हैं। खुद पाक साफ बताते हैं। उससे भी काम नहीं चलता तो वो घूम कर घूम कर गेदी मीडिया को इंटरव्यू देते हैं। और गोदी एंकर तो दो हाथ आगे निकलकर जेफरी एपस्टीन को ही भला मानूस बताने लग जाते हैं। और बेशर्मी की इन्तेहां ततो तब हो जाती है जब इतने गंभीर विवादों से घिरे मंत्री को प्रधानमंत्री मोदी खुद बर्थ डे विश करते हैं। 15 फरवरी को हरदीप सिंह पुरी का जन्म दिन था। इस मौके पर पीएम मोदी ने उनको बर्थडे विश करते हुए एक्स पर पोस्ट किया कि- “केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस सेक्टर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की उनकी कोशिशें तारीफ के काबिल हैं। उनकी लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए प्रार्थना करता हूं।”
तो सकुल मिलाकर मोदी के इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ता की राजनीति में नैतिकता सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गई है। जहां एक तरफ लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला पर विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव लटका हुआ है। जिसकी बहस और वोटिंग मार्च 9 को तय हो चुकी है। वहीं मोदी ने उन्हें ही बांग्लादेश भेजकर भारत का चेहरा बनाया। ये वही स्पीकर हैं जिन्होंने खुद नैतिकता का हवाला देकर सदन की कार्यवाही से दूरी बनाने की बात कही थी, लेकिन अब वो ढाका में तारिक रहमान के शपथ ग्रहण में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वहीं हरदीप सिंह पुरी का केस तो और भी चौंकाने वाला है। एपस्टीन फाइल्स में बार-बार नाम आने के बावजूद, मंत्री जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी, मुलाकातों को ऑफिशियल बताया, लेकिन मोदी ने 15 फरवरी को उनका जन्मदिन विश करते हुए उनकी तारीफों के पुल बांधे। ये दो उदाहरण साफ संदेश देते हैं कि विवाद हो या बदनामी, पार्टी के लोग सुरक्षित हैं, नैतिक जवाबदेही नाम की चीज नहीं बची।ये दो उदाहरण मिलकर दिखाते हैं कि मोदी राज में सत्ता बचाने के लिए नैतिकता को बार-बार कुर्बान किया जा रहा है। बांग्लादेश में संबंध बनाए रखने की मजबूरी, लेकिन घरेलू छवि बचाने का डर है। मंत्री पर आरोप, लेकिन समर्थन जारी है।



