मोदी के फ्लॉप शो में भयंकर बवाल, फोटो खिंचवाने के चक्कर में लगी लंका
बात इतनी बिगड़ गई बाहर खड़े लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। आपने अब तक गोदी मीडिया पर अब तक AI इंपैक्ट समिट 2026 की चमचमाती तस्वीरें देख ली होंगी लेकिन हम आपको इस समिट की वो तस्वीरें दिखाएंगे जिससे इस पूरे समिट की असलियत बाहर आ गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या हुआ जब पीएम मोदी ने अपना पीआर करने के चक्कर में पूरे देश की बदनामी करा दी? क्या हुआ जब रील बनाने के चक्कर में पीएम मोदी ने अपने ही समिट का कचरा करा दिया?
बात इतनी बिगड़ गई बाहर खड़े लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। आपने अब तक गोदी मीडिया पर अब तक AI इंपैक्ट समिट 2026 की चमचमाती तस्वीरें देख ली होंगी लेकिन हम आपको इस समिट की वो तस्वीरें दिखाएंगे जिससे इस पूरे समिट की असलियत बाहर आ गई है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी जहां इस समिट में पहुंचकर फोटोबाजी कर रहे थे वहीं जिन लोगों को मोदी के आने के चलते के समिट से बाहर कर दिया गया उन लोगें ने इस समिट की पूरी सच्चाई सबूत के साथ सोशल मीडिया पर बताई है। तो कैसे प्रधानमंत्री मोदी से समिट के पहुंचने से पूरे ईवेंट का कबाड़ा हो गया और कैसे ये समिट एआई की जगह चोरी का अड्डा बनकर रह गया.
राजधानी दिल्लीके भारत मंडपम में एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन हो रहा है। यह इस साल देश में आयोजित होने जा रहे सबसे हाई प्रोफाइल इवेंट्स में से एक बताया जा रहा था। इस ओयाजन में दुनिया के कई बड़े नाम शामिल होने थे जो एआई के भविष्य और इसके असर पर जो लोग बात करते। इसमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, माइक्रोसॉफ्ट के को फाउंडर बिल गेट्स जैसे दिग्गज शामिल थे।
लेकिन आज अचानक से प्रधानमंत्री मोदी की एंट्री हो जाती है जिससे पूरे समिट का कबाड़ा हो जाता है। उनका पीआर शो से लोगों को इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है कि सोशल मीडिया पर थू-थू होने लग जाती है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी को पहले 19 फरवरी को इस समिट में आना था लेकिन फिर अचानक से मन हुआ कि चलो आज ही चलते हैं। फिर क्या था। जो अंदर थे उन्हें बाहर निकाला गया। सूट टीई पहने वो लोग ना गेट के बाहर जा सकते थे और ना समिट के अंदर। बिना खाना पानी के वो लोग घंटों फंसे रहे और मोदी जी अंदर अपने मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ पहुंचकर फोटो खिंचवाने में बिजी रहे। लोगों को इस समिट में न कार की चाबी लेने का मौका मिला न लैपटॉप। मोदी जी आए अंबानी के बेटे से मिले वीडियो बनाया और चले गए।
गजब तो तब हो गया जब यही समिट चोरों का अड्डा बनकर रह गया। जी हां, इस एआई समिट में भयंकर रूप से चोरी हो गई। ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि यहां आए लोगों का कहना है। बेगलुरु के एक उद्यमी ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी से स्टॉल से डिवाइसेज चोरी हो गए हैं। NeoSapien नाम की एक कंपनी के सीईओ और को फाउंडर धनंजय यादव का दावा है कि यह घटना उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पहले वहां मौजूद लोगों को बूथ खाली करने को कहा गया था। उन्होंने घटना को हैरान करने वाला बताते हुए सवाल उठाया कि उनकी कंपनी के AI वियरेबल कैसे चोरी हो सकते हैं, जब वहां एक्सपो एरिया में सिर्फ सुरक्षाकर्मियों को जाने की अनुमति थी।
धनंजय यादव की कंपनी एआई वियरेबल डिवाइसेज बनाती है जो बातचीत को ट्रैक करने और भावनाओं के विश्लेषण में सक्षम है। यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘AI इंपैक्ट समिट का पहला दिन हमारे लिए दर्दभरा रहा। ‘ उन्होंने कहा कि वह वास्तव में इस समिट को लेकर उत्साहित थे, जिसका पहली बार भारत में आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर इस इकोसिस्टम और सरकार के प्रयासों का समर्थन करना चाहता था। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह चौंकाने वाला था।’ धनंजय ने अपने इस पोस्ट के तस्वीरें और वीडीयो भी साझा की है।
अब धनंजय कोई अकेले नहीं थे जिनके साथ ऐसा हुआ। मेइत्रा वाघ भी गेट बाहर की भीड़ की तस्वीर शेयर करके हुए लिखते हैं कि गेट बंद होने की वजह से वो अपने ही स्टॉल तक नहीं जा पा रहे हैं तो दूसरे लोग कैसे आएंगे। Kritika Kapoor लिखती है कि ये लोगों को मेन गेट पर इंतज़ार करवा रहे हैं। हॉल, मीटिंग रूम और एक्सपो एरिया भी 2 घंटे के लिए बंद कर दिए गए हैं क्योंकि मोदी जी आ रहे हैं। क्या वे 2 घंटे तक रहेंगे? क्या वे हर जगह एक साथ मौजूद हैं? वो आगे लिखती हैं कि मैनेजमेंट भी काफी खराब है, सभी लोग परेशान और नाराज़ हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी को इससे कोई फायदा मिला है। एक दूसरी पोस्ट में कृतिका फोटो शेयर करते हुए लिखती हां कि, “हम लोग सच में फर्श पर बैठे हुए थे। मैंने सोचा था कि थोड़ा कंटेंट बना लूं और इसका थोड़ा प्रमोशन कर दूं, लेकिन यहां तो प्रमोट करने लायक कुछ भी नहीं है।” एक और यूजर हैं केनज़े, जो वेब थ्री क्रियेटर हैं। इन्होंने भी कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि, देश के सबसे बड़े टेक इवेंट में खाने के स्टॉल के लिए कैश साथ लेकर चलें।
मतलब आप सोचिए मोदी जी डिजिटल पेमेंट का ढेल पूटते फिर ते हैं और पूरे समिट में यूपीआई पेमेंट काम नहीं कर रहा है। Angshuman Chudhary नाम के यूजर लिखते हैं कि, “असली सवाल यह है कि इन एआई टेक लोगों में से कितने लोग इवेंट की शिकायतों से आगे बढ़कर असली समस्याओं पर बोलेंगे — उनके “प्रधान सेवक” का बहुत ज्यादा घमंड, सिस्टम की बड़ी नाकामी, गलतियों के लिए कोई जिम्मेदारी न लेना, और नए काम करने वालों की अनदेखी?” इसी तरह से रीसिकिल के को फाउंडर है पुनीत जैन। इन्होंने भी सोशल मीडिया पर अपनी भड़ाय़स निकालते हुए लिखा है कि, “एक एआई समिट जिसने अपने ही बनाने वालों को किनारे कर दिया? सुबह 7 बजे लाइन,9 बजे एंट्री, 12 बजे पूरी तरह खाली कराया गया, घंटों तक सैनिटाइजेशन, शाम 5 बजे पीएम का दौरा और यहीं डे 1 खत्म।
वो आगे लिखते हैं कि इस बीच एग्ज़िबिटर, डेलीगेट और स्टार्टअप फाउंडर बाहर खड़े रहे। न पानी, न कोई साफ जानकारी। मीडिया में जश्न दिखाया गया, लेकिन ज़मीन पर हालात अव्यवस्था जैसे थे। अगर एंट्री सिर्फ चुनिंदा खास मेहमानों के लिए थी, तो पहले ही साफ बता देना चाहिए था।पूरा इकोसिस्टम बुलाकर फिर उन्हें बाहर कर देना ठीक नहीं है। भारत का एआई भविष्य ऐसे नहीं बनाया जाता.”
तो कुल मिलाकर सवाल सीधा है कि क्या देश में टेक्नोलॉजी का भविष्य फोटो सेशन से बनेगा या सिस्टम से? नरेंद्र मोदी के अचानक दौरे ने जिस तरह से पूरे एआई इंपैक्ट समिट को अव्यवस्था में बदल दिया, उसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में स्टार्टअप फाउंडर्स को अपने ही स्टॉल से बाहर कर दिया जाए, घंटों बिना जानकारी के खड़ा रखा जाए, डिजिटल इंडिया के दावे के बीच यूपीआई काम न करे, और सुरक्षा के नाम पर एक्सपो एरिया खाली करवा दिया जाए, तो फिर यह टेक्नोलॉजी का उत्सव कम और पीआर इवेंट ज्यादा लगता है।
दुनिया के सामने भारत को एआई हब के रूप में पेश करने का दावा किया गया था। कहा गया था कि यहां इनोवेशन, स्टार्टअप और युवाओं की ताकत दिखाई देगी। लेकिन ज़मीन पर जो तस्वीर सामने आई, वह कुछ और ही कहानी कहती है। जिन लोगों ने मेहनत से अपने प्रोडक्ट बनाए, जिन स्टार्टअप्स ने अपने सपनों के साथ यहां कदम रखा, वही लोग गेट के बाहर फर्श पर बैठे नजर आए। अंदर कैमरे चमक रहे थे, बाहर लोग परेशान थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारी प्राथमिकता टेक्नोलॉजी है या तामझाम? अगर एआई समिट में ही एआई कंपनियों के डिवाइस चोरी हो जाएं और जिम्मेदारी तय न हो, तो भरोसा कैसे बनेगा?
अगर नए उद्यमियों की आवाज़ को अनदेखा कर सिर्फ हाई-प्रोफाइल मुलाकातों पर फोकस होगा, तो इकोसिस्टम मजबूत कैसे होगा? इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी कि भारत का एआई भविष्य सिर्फ बड़े नामों और बड़ी तस्वीरों से नहीं बनेगा। इसके लिए पारदर्शिता, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और प्रतिभाओं का सम्मान जरूरी है। वरना हर समिट के बाद बस यही सवाल गूंजेगा कि क्या यह टेक्नोलॉजी का मंच था या सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का पीआर शो?



