मौत के बाद हुआ चौंकाने वाला खुलासा, सियासी साजिश का शिकार हुए अजित पवार?

विपक्ष उनकी मौत को पीछे कोई हादसा नहीं बल्कि सियासी साजिश बता रहा है। वहीं अब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ जिसने शक की सुई को बीजेपी की ओर घुमा दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजीत पवार अपने हादसे के पहले बड़ा प्लान बना रहे थे? क्या चाचा शरद पवार के साथ मिलकर इस प्लान से बीजेपी को बड़ा झटका देने वाले थे? जब से बीते बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार की विमान हादसे में उनकी मौत हुई है तभी से इसको लेकर कई सवाल खडे़ हो रहे हैं।

विपक्ष उनकी मौत को पीछे कोई हादसा नहीं बल्कि सियासी साजिश बता रहा है। वहीं अब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ जिसने शक की सुई को बीजेपी की ओर घुमा दिया है। जिस दिन अजित एक बड़ा खेला करने का प्लान बना रहे थे। तो अपनी मौत से पहले अजित पवार 8 फरवरी को कौन सा बड़ा खेला करने वाले थे?

आज से करीब एक हफ्ते पहले महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मच गया था जब शिव सेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने दावा किया था कि ‘अजित पवार की एनसीपी का शरद पवार की पार्टी के साथ विलय होगा’। तभी से बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बज गई थी। अब संजय राउत का बयान ऐसे समय में आया जब महाराष्ट्र के निकाय चुनावों के नतीजों के बाद से ही राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर की खबरें तेज हो गई थीं। सियासी गलियारों में यह चर्चा आम हो गई थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट दोबारा एक होने की दिशा में बढ़ रहे हैं। कई दौर की बातचीत, बैक चैनल संपर्क और साझा रणनीति पर विचार का सिलसिला चल रहा था।

बताया जा रहा था कि यह केवल राजनीतिक अफवाह नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर आकार ले रही प्रक्रिया थी। गुप्त सूत्रों के हवाले से यह कहा जा रहा था कि औपचारिक घोषणा की तैयारी लगभग पूरी थी और बस सही समय का इंतजार किया जा रहा था। यह संभावित एकता भारतीय जनता पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती थी। क्योंकि अगर एनसीपी के दोनों धड़े फिर से एक मंच पर आते तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत क्षेत्रीय ध्रुव बनता, जो भविष्य में सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता था। लेकिन इन सब अटकलों के बीच अचानक अजीत पवार की विमान हादसे में मौत की खबर आई और पूरा घटनाक्रम जैसे थम सा गया। जिस प्रक्रिया को अंतिम चरण में बताया जा रहा था वह अचानक अनिश्चितता में चली गई और जो राजनीतिक खतरा मंडराता दिख रहा था वह फिलहाल रुकता नजर आने लगा।

इसी बीच इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना दिया। रिपोर्ट के मुताबिक 8 फरवरी को दोनों एनसीपी गुटों के विलय की संभावना थी। यह तारीख कई बैठकों और आपसी सहमति के बाद तय की गई थी। दिवंगत अजीत पवार को दोनों गुटों के बीच सबसे अहम कड़ी बताया जा रहा था। उन्होंने शरद पवार गुट के नेताओं के साथ बातचीत दोबारा शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे कथित तौर पर विश्वास बहाली और भविष्य की संयुक्त रणनीति बनाने में सक्रिय थे। रिपोर्ट में वरिष्ठ एनसीपी विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी एसपी नेता शशिकांत शिंदे के हवाले से कहा गया कि बातचीत अंतिम चरण में थी।

मीडिया हलकों में यह भी चर्चा थी कि महाराष्ट्र में संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को आगे लाने पर अनौपचारिक स्तर पर विचार हो रहा था। यानी यह केवल विलय नहीं बल्कि राजनीतिक पुनर्संरचना की तैयारी थी। जयंत पाटिल ने बताया कि दोनों धड़े हाल के दिनों में कई बार मिले थे। 16 जनवरी को उनके आवास पर बैठक हुई थी जहां चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। 17 जनवरी को शरद पवार के घर पर भी बैठक हुई थी। शशिकांत शिंदे ने कहा कि बातचीत पहले बनी सहमति के अनुरूप आगे बढ़ रही थी। निकाय चुनावों के बाद साथ आने की योजना पर काम हो रहा था। उनके मुताबिक अजीत पवार ने खुद कहा था कि नगर निगम चुनावों के बाद हम एक साथ आएंगे। इस दिशा में बैठकें भी हुई थीं और शरद पवार के मार्गदर्शन की ओर देखते हुए आगे बढ़ने की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी माना कि हालिया घटनाक्रम के बाद प्रक्रिया में देरी हो सकती है लेकिन प्रयास जारी रहेगा।

पुणे और पिंपरी चिंचवड़ जैसे अहम नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों का साथ चुनाव लड़ना इस संभावित एकता का संकेत माना गया। सार्वजनिक मंचों पर भी नेताओं के तेवर नरम दिखे और बयानबाजी में संयम नजर आया। इससे यह संदेश गया कि अंदरूनी मतभेद सुलझाने की कोशिश गंभीरता से चल रही है। जिला परिषद चुनाव भी साथ मिलकर लड़ने की रणनीति पर चर्चा थी ताकि जमीनी स्तर पर तालमेल मजबूत हो और माहौल का आकलन किया जा सके। एनसीपी एसपी के एक नेता ने बताया कि जिला परिषद चुनावों के नतीजों के बाद विलय की औपचारिक घोषणा की रणनीति थी और इसके लिए 8 फरवरी की तारीख तय की गई थी। यह तारीख केवल कैलेंडर की तारीख नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन का अवसर होती जहां दोनों गुट एक मंच पर दिखाई देते। अजीत पवार ने भी रैलियों में संकेत दिए थे कि भविष्य में कोई बड़ा फैसला हो सकता है।

लेकिन अब घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। अजीत पवार के निधन के बाद यह माना जा रहा है कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय लगभग तय दिशा में बढ़ चुका है। पवार परिवार की ओर से उठाए गए कदमों को इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अंदरूनी स्तर पर एकता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार अब अजीत पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर फैसला पवार परिवार के स्तर पर तय होगा। यह भी चर्चा है कि आगे डिप्टी सीएम पद को लेकर निर्णय में शरद पवार की भूमिका अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि दोनों परिवार आपस में बैठकर अंतिम फैसला लेने की तैयारी में हैं। आज या कल यानी अगले दो दिनों के भीतर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह कयास तेज हो गए हैं कि केवल उत्तराधिकारी का सवाल ही नहीं बल्कि दोनों दलों के औपचारिक विलय का ऐलान भी इसी दौर में हो सकता है। दूसरी ओर एनसीपी अजीत गुट के भीतर सुनेत्रा पवार को लेकर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

पार्टी के विधायकों और नेताओं की ओर से मांग उठ रही है कि सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान सौंपी जाए। इसे सहानुभूति और संगठनात्मक एकजुटता दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रस्ताव देने की तैयारी भी की जा रही है ताकि राजनीतिक समीकरणों में संतुलन बनाया जा सके। इन सब घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक अनिश्चित लेकिन निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक तरफ संभावित विलय की कहानी है जो लंबे समय से आकार ले रही थी, दूसरी तरफ अचानक हुए हादसे ने उस कहानी को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बदल दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या 8 फरवरी के लिए तैयार किया गया सियासी खाका बदले रूप में आगे बढ़ेगा या नए नेतृत्व के साथ नई दिशा लेगा। इतना तय है कि अजीत पवार की मौत से पहले जिस बड़े राजनीतिक फेरबदल की जमीन तैयार हो रही थी उसकी गूंज अभी थमी नहीं है और आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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