सुप्रीम कोर्ट ने NCLT-NCLAT के ढांचे पर जताई चिंता, इतने हफ्ते में पेश करना होगा प्रस्ताव
अदालत ने दोनों संस्थानों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए उनके अध्यक्षों से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने दोनों संस्थानों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए उनके अध्यक्षों से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है। इसमें इमारतों, जमीन, जरूरी सुविधाओं और कर्मचारियों की जरूरतों की जानकारी शामिल होगी। अदालत ने उम्मीद जताई है कि यह जानकारी चार सप्ताह के भीतर उसके सामने रख दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह निर्देश दिया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से भी कहा है कि NCLT और NCLAT में जल्द से जल्द सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील संजीव सेन ने NCLT की मुख्य पीठ में बुनियादी ढांचे की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वहां इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा रहा है, दो मंजिलें बंद हैं और अदालतें अपनी आधी क्षमता के साथ काम कर रही हैं. इससे ट्रिब्यूनल के रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ रहा है.
हर पीठ के लिए रजिस्ट्रार स्तर के अधिकारी पर भी विचार
सीजेआई जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि NCLT और NCLAT के अध्यक्ष ही इन संस्थानों की जरूरतों का सबसे बेहतर आकलन कर सकते हैं, इसलिए दोनों से ऐसा व्यापक प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है, जिसमें ट्रिब्यूनलों के सुचारु संचालन के लिए जरूरी संसाधनों का ब्योरा हो. सुप्रीम कोर्ट ने NCLT से यह विचार करने को भी कहा कि प्रत्येक पीठ में न्यायिक रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए उप-पंजीयक (डिप्टी रजिस्ट्रार) या संयुक्त पंजीयक (ज्वाइंट रजिस्ट्रार) स्तर का अधिकारी नियुक्त करना कितना उपयोगी होगा.
अटॉर्नी जनरल ने संयुक्त बैठक का दिया सुझाव
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने प्रस्ताव दिया कि सरकार, ट्रिब्यूनल के नेतृत्व और बार के प्रतिनिधियों के बीच संयुक्त बैठक आयोजित की जाए. बैठक में जरूरतों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाए जा सकते हैं. अदालत ने केंद्र सरकार से भी कहा कि NCLT और NCLAT को जरूरी बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएं.
पहले भी जताई जा चुकी है चिंता
NCLT और NCLAT में बुनियादी ढांचे, सदस्यों और कर्मचारियों की कमी का मुद्दा पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने उठ चुका है. अदालत इन ट्रिब्यूनलों में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति तथा अपर्याप्त सुविधाओं से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है. अब दोनों ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों से विस्तृत प्रस्ताव मांगे जाने के बाद उनकी जरूरतों का आकलन कर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी. अदालत का जोर इस बात पर है कि इन संस्थानों के रोजमर्रा के कामकाज को मजबूत करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हों.



