संसद में अब तक का सबसे बड़ा हंगामा, पीएम की कुर्सी घिरी, नहीं देने दिया भाषण

अगर तुम हमारे नेता को बोलने नहीं दोगे तो हम भी तुमको बोलने नहीं देंगे।' ये कहना था कल उन विपक्षी सांसदों जिन्होंने कल संसद में इतना हंगामा किया, इतना विरोध किया कि प्रधानमंत्री मोदी अपना भाषण दिए बिना ही उलटे पांव वापस लौट गए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अगर तुम हमारे नेता को बोलने नहीं दोगे तो हम भी तुमको बोलने नहीं देंगे।’ ये कहना था कल उन विपक्षी सांसदों जिन्होंने कल संसद में इतना हंगामा किया, इतना विरोध किया कि प्रधानमंत्री मोदी अपना भाषण दिए बिना ही उलटे पांव वापस लौट गए।

ये पहली बार हुआ होगा जब प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में न तो पुरानी सरकार की विफलताओं पर चर्चा की, न किसी सवाल से बचे, न संसद में झूठ बोल पाए और न नेहरू की गलतियां निकाल पाए और वो इसलिए क्योंकि कल प्रधानमंत्री मोदी अपना अभिभाषण ही नहीं दे पाए। खबरों के मुताबिक कहा जा रहा है कि कल शाम 5 बजे लोकसभा में पीएम मोदी का अभिभाषण होना था, उनको धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देना था. इसके लिए पीएम मोदी लोकसभा में पहुंच भी चुके थे.लेकिन उनका अभिभाषण शुरू होने से पहले ही सदन की कार्यवाही 1 मिनट के अंदर ही स्थगित कर दी गई। तो कल आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में आने पहले ही उलटे पांव भाग गए? क्या उनको किसी का बात का डर था? क्या राहुल गांधी कल कुछ ऐसा करने वाले थे जिसके डर से साहेब नहीं आए? क्यों आखिर प्रियंका गांधी ने पहले ही कह दिया था कि पीएम मोदी नहीं आएंगे? क्या महिला सांसद को देखकर वो शर्मा गए?

पहले आप कल शाम संसद की कार्रवाई पर नजर डालिए। शाम 5 बजते ही संसद की कार्यवाही शुरू होती है। पीठासीन संध्या राय आकर कार्यवाही शुरू करने के आदेश देती हैं लेकिन 5 बजकर 1 मिनट पर ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाती है। सिर्फ 1 मिनट के अंदर।

पीठासीन आईं और एक मिनट मुश्किल से संसद चली और फिर स्थगित कर दी गई। अब इसके पीछे की असली वजह क्या है। इसे लेकर सरकार और विपक्षी नेताओं के अपने अपने दावे हैं। पहले जानते हैं बीजेपी का इसको लेकर क्या कहना है। बीजेपी ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री जहां बैठते हैं, विपक्ष के लोग वहां तक चढ़ गए थे यही नहीं उन्होंने तो यहां तक कहा कि विपक्ष की महिला सदस्यों ने पीएम की चेयर का घेराव कर लिया था और उनकी मंशा प्रधानमंत्री पर हमले की थी.

मनोज तिवारी की तरह ही बाकि एनडीए सांसदों ने भी विपक्षी सांसदों और खासकरके महिल सांसदों को लेकर ऐसे ही आरोप लगाए हैं। लेकिन विपक्ष का इसको लेकर कुछ और दावा है। कल संसद का पूरा दिन किसी सिनेमा से कम नहीं था। मजबूत विपक्ष किस तरह से सरकार पर हावी हो सकता है इसकी तस्वीर कल हमें देखने को मिली। कल संसद के अंदर और बाहर दोनों ही जगह विपक्षी सांसद सरकार पर भारी पड़ते दिखाई दिये। मकर द्वार की सीढ़ियों पर बैठे निलंबित सांसदों ने तो कल किसी को नहीं बक्शा। जब कल केंद्रीय मंत्री पियुष गोयल एंट्री कर रहे थे तो निलंबित सांसदों ने कैसे कैसे नारे लगाए।

कल संसद के बाहर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने तो बम ही फोड़ दिया था जब वो हाथों में जनरल नरवणे की इस किताब को लहराते हुए प्रेस के सामने आ गए जिससे मोदी, शाह और राजनाथ सिंह की दो दिनों सांसे फूल रही थी। दो दिनों तक राहुल गांधी इस किताब की महज पांच लाइनों को पढ़ने की कोशिश करते रहे लेकिन उन्हें इजाजत नहीं दी गई।

राहुल गांधी जनरल नरवणे की किताब के कुछ हिस्से को संसद में कोट करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन सरकार के मंत्री और स्पीकर राहुल को उस पर बात करने पर अड़ंगा लगा रहे थे। उनको बोलने नहीं दे रहे थे। तो आज राहुल गांधी संसद के बाहर ही जनरल नरवणे की किताब को लहराते हुए प्रेस के सामने आ गए और सबके सामने इसे पढ़कर बताने लगे। इतना ही नहीं उन्होंने इस दौरान ये भी बताया कि वो इस किताब को पीएम मोदी को भेंट करने वाले हैं। उनका इंतजार है। लेकिन राहुल का कहना था कि पीएम मोदी शायद आज आएंगे ही नहीं। क्योंकि वे भारत-यूएस ट्रेड डील पर बोलना नहीं चाहते हैं। अब देखिए राहुल कुछ कहें और वो सच न हो ऐसा हो सकता है। वहीं संसद की कार्यवाही स्थगित बोने के बाद राहुल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए अपनी बाइट शेयर की। उन्होंने लिखा कि- “जैसा मैंने कहा, पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वो डरे हुए हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते।”

दोनों तरफ से अपने अपने दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जो कल संसद में धमाका हुआ उस बारूद में माचिस देने वाले मोदी के होनहार सासंद निशिकांत दूबे थे। दरअसल, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कल लोकसभा में गांधी परिवार पर लिखी गई ऐसी किताबों का जिक्र किया जिनमें आपत्तिजनक बातें भी लिखी गई हैं. दुबे के बयान पर सदन में हंगामा हो गया. विपक्ष की महिला सांसदों ने निशिकांत दुबे को घेरने की कोशिश की थी। जिसके बाद कार्यवाही स्थगित हो गई। लेकिन ये मामला यहीं नहीं थमा। बाद में स्पीकर के चैंबर में भी ये सांसद आप में भिड़ गए। विपक्षी सांसदों का सिर्फ इतना कहना था कि जब राहुल को एक किताब पर नहीं बोलने दिया गया तो फिर कैसे भाजपा के सांसद को बोलने की इजाजत दी गई।

कल के घटनाक्रमों से इतना साफ है कि सत्ता पक्ष सच्चाई से भाग रहा है और विपक्ष उसी सच्चाई को देश के सामने रखने की कोशिश कर रहा है। जब प्रधानमंत्री खुद सदन में मौजूद होकर भी बोल नहीं पाते और कार्यवाही एक मिनट में ठप हो जाती है और विपक्ष के सवालों से बचने के लिए हंगामे का बहाना बनाया जाता है, तो सवाल सरकार पर ही उठते हैं। एक तरफ राहुल गांधी को किताब की कुछ लाइनें पढ़ने से रोका जाता है और दूसरी तरफ भाजपा सांसदों को छूट मिलती है तो ये दोहरे मापदंड नहीं तो क्या है? लोकतंत्र में जवाब देना पड़ता है। कुर्सी की ताकत से आवाज दबाई जा सकती है लेकिन सच नहीं। कल का पूरा घटनाक्रम यही दिखाता है कि डर विपक्ष में नहीं बल्कि सत्ता की कुर्सी पर बैठ लोगों में है।

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