आरक्षण का दावा न करने पर क्या मिलेगा लाभ? HC ने दिया स्पष्ट जवाब
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा न करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ की शिकायत नहीं कर सकता.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा न करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ की शिकायत नहीं कर सकता. कोर्ट के इस फैसले का असर अब आने वाली नई भर्तियों में सीधे तौर पर देखने को मिलेगा.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा न करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ से वंचित होने की शिकायत नहीं कर सकता है. कोर्ट ने सहायक शिक्षक भर्ती मामले में कहा कि यदि संबंधित स्तर पर आरक्षण का दावा नहीं किया गया, तो बाद में उसे अमान्य माना जाएगा.
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की अध्यक्षता वाली सिंगल बेंच ने सहायक शिक्षक (प्राथमिक), विज्ञान के पद पर भर्ती प्रक्रिया में हुए चयन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने पाया कि उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को दिए गए क्षैतिज आरक्षण के तहत की गई नियुक्ति में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सहायक शिक्षक (प्राथमिक) के पद के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लिया था. उसने दलील दी कि विज्ञान विषय में चंपावत जिले के लिए चयनित उम्मीदवार को उससे कम अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्त कर दिया गया. याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता ने 28 जनवरी, 2026 को प्रकाशित चयन सूची को रद्द करने, प्रतिवादी की नियुक्ति को निरस्त करने और उसे उसकी योग्यता के आधार पर नियुक्त करने का निर्देश देने की अपील की थी.
आरक्षण की जानकारी स्पष्ट देना जरूरी
राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि चयनित उम्मीदवार ने राज्य आंदोलनकारी योजना का लाभ उठाया था. इस प्रावधान के तहत उत्तराखंड राज्य के आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राज्य सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाता है, जिसके अंतर्गत नियुक्ति की गई थी.
भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सरकारी आदेशों के अनुसार क्षैतिज आरक्षण लागू होगा. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्वयं राज्य आंदोलनकारी श्रेणी से संबंधित है, लेकिन उसने चयन प्रक्रिया के दौरान इस लाभ का दावा नहीं किया था.
बिना दावा किए नहीं मिल सकता लाभ
अदालत ने फैसला सुनाया कि संबंधित स्तर पर आरक्षण का दावा किए बिना कोई उम्मीदवार इसका लाभ न मिलने की शिकायत बाद में नहीं कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि चूंकि प्रतिवादी को एक अलग आरक्षित श्रेणी के तहत नियुक्त किया गया था, इसलिए उसकी योग्यता की तुलना सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार की योग्यता से नहीं की जा सकती है.



