वेनेजुएला में शिक्षा सुधारों की हकीकत: मुफ्त पढ़ाई के बावजूद क्यों नहीं बदले हालात?

वेनेजुएला में शिक्षा के क्षेत्र में समय-समय पर बड़े सुधार किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद देश की शिक्षा व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिला है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: वेनेजुएला में शिक्षा के क्षेत्र में समय-समय पर बड़े सुधार किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद देश की शिक्षा व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिला है।

सरकार की ओर से 7 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए 9 साल का पाठ्यक्रम पूरी तरह मुफ्त रखा गया है, फिर भी शिक्षा के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों का अभाव और आर्थिक संकट ने शिक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे सुधारों का असर ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।

अमेरिका के वेनेजुएला पर स्ट्राइक करने और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद पूरे देश में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है. यहां की सरकार और कई क्रांतियों की चर्चा हो रही है जिसमें बार-बार पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज का नाम सामने आ रहा है जिन्होंने इस देश में कई रिफॉर्म किए और एक ऐसे देश की नींव रखी जहां सभी के अधिकारों को सुरक्षित किया जाने लगा.

इस खबर में हम वेनेजुएला में हुए एजुकेशन रिफॉर्म्स की बात करेंगे. कैसे एक देश जहां पर सिर्फ अमीरों के लिए ही शिक्षा उपलब्ध थी धीरे-धीरे सभी के लिए यह एक अधिकार बन गई. हालांकि कई रिफॉर्म्स के बाद भी शिक्षा के क्षेत्र  में वेनेजुएला में हालात बदले नहीं गए हैं.

वेनेजुएला के सिस्टम को जानने के लिए हमें सबसे पहले 1700वीं सदी में जाना पड़ेगा. जहां पर 1721 में वेनेजुएला में सबसे पहली यूनिवर्सिटी बनाई गई थी. लेकिन, उस दौर में शिक्षा सिर्फ अमीरों के लिए ही थी और ज्यादातर देश की जनता कमाने-खाने में लगी हुई थी. शिक्षा पर किसी का फोकस नहीं था और यह सिलसिला दशकों तक इस देश में यूं ही चला. इस दौरान सिर्फ धनी परिवार के सदस्य ही ट्रैवलिंग से, प्राइवेट टीचरों से और प्रतिबंधित किताबों से शिक्षा प्राप्त करते थे. कई दशकों तक यही व्यवस्था चलती रही जिसकी वजह से वेनेजुएला शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ गया.

कोई बड़ा बदलाव नहीं हो सका
कई दशकों तक चली इस व्यवस्था से वेनेजुएला में शिक्षा के क्षेत्र में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ था. इसके बाद 27 जून 1980 को तत्कालीन राष्ट्रपति एंटोनियो गुजमैन ब्लैंको ने एक अध्यादेश पारित किया जिसमें 7 साल से 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा फ्री कर दी गई. इस ऐज ग्रुप के बच्चों के लिए शिक्षा फ्री करने के साथ-साथ इसे अनिवार्य भी किया गया. इस कदम से पूरे देश में उस दौरान स्कूलों की संख्या चौगुनी बढ़ गई थी और छात्रों के इनरोलमेंट भी दस गुना बढ़कर करीब 100000 हो गए थे.

शिक्षा में मामले में वेनेजुएला लगातार पिछड़ता ही जा रहा था. इस दौरान 1928 में एक छात्र आंदोलन शुरू हुआ था जिसे तुरंत ही दबा दिया गया. लेकिन, इस आंदोलन ने उस पीढ़ी को जन्म दिया जिन्होंने तानाशाही को खत्म करने और देश में लोकतंत्र लाने में बड़ा योगदान दिया.

बोलिवेरियन करिकुलम ने फूंकी नई जान
पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के शासनकाल में 14 मई 1999 में बोलिवेरियन करिकुलम के तहत स्कूलों में कई किताबों को मंजूरी दी गई जिसमें पाठ्यक्रम में विचारक कार्ल मार्क्स, क्रांतिकारी चे ग्वेरा और लिबरेटर साइमन बोलिवर को शामिल किया गया. इससे समाजवादी देश बनाने के क्षेत्र में एक नींव रखी गई. इस दौरान 6 से 15 साल तक के बच्चों के लिए फ्री शिक्षा अनिवार्य की गई जिसमें कुल 9 साल का पाठ्यक्रम शामिल किया गया. हालांकि बाद में यह व्यवस्था भी बर्बाद हो गई.

फिर बर्बाद हो गई शिक्षा व्यवस्था
वेनेजुएला में ह्यूगो चावेज के कार्यकाल में आमूलचूल बदलाव किए गए थे. लेकिन, देश की आर्थिक व्यवस्था और राजनीतिकरण की वजह से यह व्यवस्था भी बर्बाद हो गई. देश में फ्री शिक्षा तो दे दी गई लेकिन व्यवस्था धराशाई हो गई. जिससे टीचरों की कमी पड़ गई, स्कूलों की बिल्डिंग्स जर्जर हो गईं और एक बार फिर से इस देश में शिक्षा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने से रह गई.

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