चार सौ साल बाद भी कायम है खैराबाद के बावन डंडे के ताजिये की परंपरा, श्रद्धा के साथ हुआ समापन

मोहब्बत, आस्था और कौमी एकता की मिसाल माने जाने वाले सीतापुर के खैराबाद नगर का ऐतिहासिक बावन डंडे का ताजिया शनिवार देर शाम धार्मिक रस्मों के साथ कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में मोहब्बत, आस्था और कौमी एकता की मिसाल माने जाने वाले सीतापुर के खैराबाद नगर का ऐतिहासिक बावन डंडे का ताजिया शनिवार देर शाम धार्मिक रस्मों के साथ कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

करीब चार सौ साल पुरानी इस परंपरा को निभाने के लिए हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे का माहौल देखने को मिला। खैराबाद का यह ताजिया अपनी अनूठी परंपरा और ऐतिहासिक महत्व के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मोहर्रम की 11वीं तारीख को निकलने वाला यह ताजिया नगर की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

रौजा दरवाजा पर सुबह से उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

शनिवार को रौजा दरवाजा स्थित यूसुफ खान गाजी की दरगाह के बाहर चौक पर बावन डंडे का ताजिया रखा गया। सुबह से ही यहां अकीदतमंदों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। लोगों ने ताजिये पर फूल-मालाएं चढ़ाईं और शर्बत पेश कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। नगर के अलावा आसपास के गांवों और जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग ऐतिहासिक ताजिये के दीदार के लिए पहुंचे। लोगों ने मन्नतें मांगीं और धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया।

बावन मोहल्लों के डंडों से तैयार होता है ऐतिहासिक ताजिया

मान्यता के अनुसार खैराबाद के बावन डंडे के ताजिये का इतिहास लगभग चार सौ वर्ष पुराना है। इसे नगर के बावन मोहल्लों से एक-एक डंडा लाकर तैयार किया जाता है, जिसके कारण इसका नाम बावन डंडे का ताजिया पड़ा। यह परंपरा वर्षों से सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द का संदेश देती आ रही है। ताजिये के निर्माण और आयोजन में नगर के लोगों की सामूहिक भागीदारी इस परंपरा की खास पहचान है।

दादा मियां की दरगाह से निकला जुलूस

दोपहर बाद दादा मियां की दरगाह से ताजिया जुलूस के रूप में कर्बला के लिए रवाना हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस दौरान लोगों की जुबां पर “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। मातमी धुनों के बीच आगे बढ़ रहे जुलूस में पुरुषों के साथ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल रहे। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने शर्बत और लंगर की व्यवस्था कर जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया।

कर्बला में धार्मिक रस्मों के बाद किया गया सुपुर्द-ए-खाक

देर शाम ताजिया कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत धार्मिक रस्मों को पूरा करने के बाद उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे और लोगों ने नम आंखों से ताजिये को विदाई दी। पूरे आयोजन के दौरान खैराबाद नगर में शांति और सौहार्द का वातावरण बना रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

बड़े आयोजन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। जुलूस के मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से चार सौ साल पुरानी यह परंपरा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और खैराबाद ने एक बार फिर अपनी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की।

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