अमेरिका से जुड़े NGO की बढ़ी मुश्किलें, 92 करोड़ के विदेशी फंड में हेराफेरी का आरोप
विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम के नियमों को तोड़ा गया. संस्था को मिली ₹92.55 करोड़ की विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल निर्धारित धार्मिक या सामाजिक कार्यों के बजाय दूसरे संदिग्ध कामों के लिए किया गया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम के नियमों को तोड़ा गया. संस्था को मिली ₹92.55 करोड़ की विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल निर्धारित धार्मिक या सामाजिक कार्यों के बजाय दूसरे संदिग्ध कामों के लिए किया गया.
सीबीआई की दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EO-II) ने The Timothy Initiative (TTI), USA और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. FIR में विदेशी फंडिंग के कथित उल्लंघन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने समेत कई आरोप लगाए गए हैं. CBI ने यह FIR 27 अगस्त 2026 को दर्ज की है. ये मामला Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 (FCRA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Information Technology Act की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. इस मामले की जांच इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार गुप्त को सौंपी गई है.
92.55 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग का आरोप
FIR के मुताबिक, आरोप है कि Jonathan S Rajan, Micah Mark, Ajit Verghese Mathal, Varghese Chacko, Bablu Kurmi, Supreme Joy और The Timothy Initiative, USA ने आपराधिक साजिश के तहत अमेरिका के Truist Bank द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में अलग-अलग ATM से विदेशी रकम निकाली.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये (लगभग 99,95,240 अमेरिकी डॉलर) की रकम FCRA के प्रावधानों के कथित उल्लंघन में इस्तेमाल की गई.इसके अलावा जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच करीब 44 करोड़ रुपये विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम समेत कई राज्यों में निकाले जाने की बात सामने आई है.
1000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड बांटने का दावा
ED की जांच रिपोर्ट, जिसके आधार पर गृह मंत्रालय ने CBI को जांच सौंपने की सिफारिश की, में कहा गया है कि 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर Micah Mark के पास 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले थे. रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्डों पर ‘Santosh Kumar’ नाम दर्ज था. जांच एजेंसी का आरोप है कि कार्ड असली उपयोगकर्ता की पहचान छिपाने और KYC नियमों से बचने के लिए इस नाम से जारी कराए गए थे. जांच में भारत में 1000 से ज्यादा ऐसे डेबिट कार्ड वितरित किए जाने की बात भी सामने आई.
TTI की गतिविधियों में रकम इस्तेमाल होने का आरोप
ED की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि Jonathan Rajan TTI के भारत में ऑपरेशंस के प्रभारी थे, जबकि Ajit Verghese Mathai को वित्तीय संचालन से जुड़ा प्रमुख व्यक्ति बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी कार्ड से ATM के जरिए निकाली गई रकम का इस्तेमाल TTI की भारत में होने वाली गतिविधियों के लिए किया जाता था.ED ने आरोप लगाया है कि इनमें प्रशिक्षण, धार्मिक प्रचार और अन्य गतिविधियां शामिल थीं. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि TTI ने भारत में 95 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च किए.
डिजिटल डेटा डिलीट करने का भी आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, 18 अप्रैल 2026 को Micah Mark के ठिकाने पर तलाशी के दौरान Bill.com, QuickBooks और एक HP लैपटॉप पर वित्तीय और अकाउंटिंग से जुड़ा डेटा मौजूद था. रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को Bill.com की भारत से संबंधित जानकारी का एक्सेस प्रतिबंधित हो गया और उसी दिन लैपटॉप को पूरी तरह वाइप कर दिया गया. इसके अगले दिन QuickBooks पर भारत से संबंधित डेटा का एक्सेस भी प्रतिबंधित किए जाने की बात सामने आई.ED ने इसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या उपलब्ध नहीं रहने देने की घटना बताया है. इस संबंध में BNS की धारा 238 के तहत भी कार्रवाई का आधार बनाया गया है.
CBI को क्यों सौंपी गई जांच?
गृह मंत्रालय के FCRA विंग ने ED से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को CBI को सौंपा. मंत्रालय के पत्र में कहा गया है कि FCRA की धारा 43 और केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत मामले की आगे की जांच CBI करे. मंत्रालय ने यह भी कहा कि जांच के दौरान यदि Income Tax Act या Prevention of Money Laundering Act (PMLA) समेत अन्य कानूनों के उल्लंघन की जानकारी सामने आती है तो संबंधित सक्षम एजेंसियों को उचित कार्रवाई के लिए संदर्भ भेजा जा सकता है.



