वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर मचा बवाल
विपक्ष ने एनडीए व मोदी सरकार पर उठाए सवाल, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा बोले- कल कमिश्नर बदला और आज ये कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद से सियासी बवाल मच गया है। सपा, कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी , राजद, टीएमसी व सोशल मीडिया पर मोदी सरकार की आलोचना हो रही है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए इसे गुंडागर्दी और तानाशाही करार दिया है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान ने हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार दिया है। लेकिन ऐसा लगता है कि गृह मंत्रालय इस अधिकार को खत्म करना चाहता है। दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। गृह मंत्रालय ने ही एक दिन पहले पुराने कमिश्नर को हटाकर दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति की थी। अगर उनकी पहली बड़ी कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सख्ती करना है, तो यह चिंता की बात है. इससे लगता है कि सरकार संविधान से ज्यादा राजनीतिक आदेशों को महत्व दे रही है.
उन्होंने आगे कहा, पहले महिला पहलवानों के प्रदर्शन में कार्रवाई हुई, फिर पूर्व सैनिकों के साथ भी सख्ती की गई. अब सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से भी यही संदेश मिलता है कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की समस्या मान रही है. यह दुख की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों को इस तरह दबाने की कोशिश हो रही है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई गैर जिम्मेदाराना : शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना की। शरद पवार ने इस कदम को गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों पर ध्यान देने के बजाय मूकदर्शक बनी रही। शनिवार को बारामती में पत्रकारों से बातचीत में शरद पवार ने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर सरकार ने वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। दरअसल वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगडऩे के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने कहा कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन कार्यकर्ता नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इस विवाद के कारण कथित तौर पर कुछ छात्रों की मौत के विरोध में 28 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
मेरी अनुमति के बिना सोनम का कोई इलाज न किया जाए: गीतांजलि
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। इस घटनाक्रम के बीच वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी अनुमति के बिना वांगचुक का किसी भी प्रकार का उपचार नहीं किया जाना चाहिए। गीतांजलि आंग्मो ने बातचीत में कहा कि वह अभी सफदरजंग अस्पताल में हैं और उनका पक्ष बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि मेरी अनुमति के बिना उन्हें कोई दवा नहीं दी जाए और न ही कोई इलाज किया जाए। मेरी सहमति के बिना कोई भी उपचार शुरू नहीं होना चाहिए और यदि इस दौरान कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसके लिए मैं सभी को जिम्मेदार मानूंगी। वांगचुक की पत्नी ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के पुलिस के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वांगचुक बिल्कुल ठीक दिख रहे थे और उन्हें अचानक अस्पताल ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी और उनके डॉक्टर की अनुमति के बिना किसी भी तरह का मेडिकल उपचार देना गलत होगा। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि सोनम वांगचुक को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने कहा कि यह कदम उनकी आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से जल्द से जल्द जगह खाली करने और आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया है। वहीं, अस्पताल में भर्ती होने से पहले शुक्रवार रात जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अपना संकल्प दोहराया था। उन्होंने कहा था कि भले ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, लेकिन वह अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर का 2० प्रतिशत हिस्सा क्षीण हो चुका है। वांगचुक ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार युवाओं की आवाज सुने।
प्रियंका चतुर्वेदी की सरकार व बीजेपी को चेतावनी-लोग ये भूलेंगे नहीं
आदित्य ठाकरे के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को उनकी भूख हड़ताल खत्म करवाने के लिए किसी मंत्री को भेजना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय दिल्ली पुलिस को भेज दिया गया, प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर ट्वीट कर सरकार को घेरा है.। प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- उनका अनशन खत्म करवाने के लिए किसी मंत्री को भेजने के बजाय सरकार ने दिल्ली पुलिस को भेजा, लोग इसे भूलेंगे नहीं। प्रियंका ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता भी जाहिर की और लिखा, सोनम जी, हमें आपकी जरूरत है ताकि आप आगे भी संघर्ष जारी रख सकें। हो सकता है मुझे इस बयान के लिए ट्रोल किया जाए, लेकिन फिर भी मैं कहूंगी कि सीजेपी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए वांगचुक को बलि का बकरा नहीं बना सकता।
केंद्रसरकार भारी दबाव में है : पायलट
सोनम वांगचुक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता का दावा
जयपुर। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को अस्पताल ले जाए जाने के दौरान थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी, जिसके बाद जंतर-मंतर और आसपास के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। सोनम वांगचुक को लेकर प्रतिक्रियाओं का बाजार गर्म हो गया है। मामले पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, यह सरकार की पूरी तरह से गलत नीति है. सोनम वांगचुक लगभग 2० दिनों से उपवास कर रहे हैं, युवाओं के भविष्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं. फिर भी, सरकार ने न तो कोई बातचीत की, न ही कोई चर्चा शुरू की और न ही इस मामले को स्वीकार किया। कांग्रेस नेता ने आगे कहा, अब, बढ़ते राष्ट्रीय प्रभाव और बढ़ते जन दबाव को देखते हुए, वे जवाबदेही से बचने के लिए उन्हें जबरन अस्पताल ले जा रहे हैं. अगर सरकार ने बातचीत शुरू की होती और उनकी मांगें मान ली होतीं तो यह कहीं बेहतर होता. उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार भारी दबाव में है. असंतोष चरम पर है, और उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना जन आक्रोश को कम करने के बजाय और भडक़ाएगा।
बीजेपी ने एनसीपी (एसपी) व एनसीपी को एकजुट होने का दिया ऑफर
दोनों को केंद्र में एक मंत्री पद देने पर विचार का आश्वासन
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में फिर कोई बड़ा बदलाव होने वाला है? पिछले कुछ दिनों से, चतुर और अप्रत्याशित शरद पवार के बीजेपी से संपर्क साधने की चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि बीजेपी नेतृत्व एनसीपी (एसपी) को एनडीए में एक अलग पार्टी के तौर पर शामिल करने का इच्छुक नहीं है। वे चाहते हैं कि गठबंधन का हिस्सा बनने से पहले यह पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ फिर से एक हो जाए।
बीजेपी ने एनसीपी(एसपी) के अपनी पार्टी में विलय की संभावना को भी खारिज कर दिया है। बीजेपी ने एक लालच भी दिया है। अगर एनसीपी के दोनों गुट फिर से एक हो जाते हैं, तो बाद में हर गुट से केंद्र में एक मंत्री पद देने पर विचार किया जा सकता है। जब से शिवसेना और एनसीपी में फूट पड़ी है, बीजेपी महाराष्ट्र में सबसे ताकतवर पार्टी बनकर उभरी है। वह अच्छी तरह जानती है कि एनसीपी (एसपी) को एक अलग पार्टी के तौर पर गठबंधन में शामिल करने से उसके मौजूदा सहयोगियों के बीच अस्थिरता और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एनसीपी (एसपी) ने संकेत दिया है कि वह परिसीमन बिल पर नरम रुख अपना सकती है, जिसे सरकार ने महिला आरक्षण कानून से जोड़ा है। संविधान संशोधन बिल का मकसद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है। बीजेपी के लिए, एनसीपी (एसपी) के एनडीए में शामिल होने से वह संसद में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच जाएगी जो संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए ज़रूरी है। यही वजह है कि नरेंद्र मोदी सरकार अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन बिल पास नहीं करा पाई थी।
हालांकि, तब से संसद का गणित बदल गया है। लोकसभा में एनसीपीएसपी के पास आठ और राज्यसभा में एक सीट है। हालांकि, एनसीपीएसपी ने समर्थन का कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है।
इस हफ़्ते की शुरुआत में बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगर प्रस्तावित परिसीमन सभी राज्यों में सीटों में एक समान 5० प्रतिशत बढ़ोतरी पर आधारित होता, तो इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होता।
सुले ने पार्टी के एनडीए में शामिल होने की अटकलों को यिा खारिज
सुप्रिया सुले ने पार्टी के एनडीए में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया पिछले 12 सालों से मेरे शपथ लेने और मंत्री पद मिलने की भविष्यवाणी कर रहा है। शनिवार को शरद पवार ने इन अफवाहों को और हवा दी। पवार ने कहा कि अभी इस बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है।
केन-बेतवा मुआवजा में भयंकर धांधली: उमंग
नेता प्रतिपक्ष मप्र का आरोप, बोले- गांव में नहीं रहने वाले मुस्लिम परिवार के खाते में पहुंचा भुगतान
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल । केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि परियोजना से प्रभावित खरिहानी गांव में एक मुस्लिम (खान) परिवार के नाम भी मुआवजा स्वीकृत किया गया, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ऐसा कोई परिवार कभी रहा ही नहीं।
सिंघार ने सवाल उठाया कि जब संबंधित परिवार गांव का निवासी नहीं था तो उसके खाते में मुआवजा कैसे पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि खरिहानी गांव में मकानों के लिए करीब 11 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार लगभग 8 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को दिए गए, जिनका गांव से कोई संबंध नहीं था या जो वर्ष 198०-9० में ही गांव छोड़ चुके थे। उनका दावा है कि आंदोलनकारियों ने दस्तावेजों के आधार पर 5०० से अधिक संदिग्ध मुआवजा मामलों की पहचान की है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कई गांवों में ग्राम सभा की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि अलग-अलग पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में एक जैसी भाषा दर्ज है और कई बैठकों का समय भी एक जैसा दिखाया गया है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताया। सिंघार ने दावा किया कि एक ग्राम पंचायत के कार्यवाही रजिस्टर में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिसने उस समय सरपंच पद संभाला ही नहीं था। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में पुनर्वास और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के मकान तोड़े गए, जबकि उन्हें पूरा मुआवजा और वैकल्पिक पुनर्वास नहीं मिला।
असल प्रभावित आज भी मुआवजे से वंचित
सिंघार ने कहा कि वास्तविक आदिवासी और किसान परिवार आज भी मुआवजे और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि एक कैबिनेट बैठक परियोजना प्रभावित क्षेत्र में भी आयोजित कर प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनी जाएं।
भाजपा और निर्माण कंपनी पर भी साधा निशाना
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी निर्माण कंपनी एनसीसी लिमिटेड ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को 6०० करोड़ रुपये का चंदा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी के बदले कंपनी को परियोजना का हजारों करोड़ रुपये का ठेका मिला। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।



