जहां-जहां SIR, वहां-वहां वोट चोरी! कांग्रेस का आरोप, प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, सुनियोजित साजिश
SIR को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं... पार्टी का कहना है कि गुजरात समेत कई राज्यों में SIR के नाम पर चुन-चुनकर खास वर्गों...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.. जहां हर नागरिक का एक वोट महत्वपूर्ण होता है.. लेकिन हाल के वर्षों में, चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोग्राम पर गंभीर आरोप लग रहे हैं.. SIR का मकसद मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है.. लेकिन विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, इसे ‘वोट चोरी’ का हथियार बता रहे हैं.. गुजरात में यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है.. जहां लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.. राहुल गांधी जैसे नेता कहते हैं कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर खास वर्गों के वोटर्स को हटा रहे हैं.. ताकि चुनावों में फायदा मिले..
आपको बता दें कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है.. जो मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चलाई जाती है.. इसमें घर-घर जाकर जांच होती है.. डुप्लिकेट नाम, मृत व्यक्ति, स्थानांतरित हुए लोग या विदेशी नागरिकों को हटाया जाता है.. यह सामान्य संशोधन से अलग है.. क्योंकि इसमें गहन जांच होती है.. जैसे दस्तावेजों की सख्त जांच और फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियां दर्ज करना.. चुनाव आयोग के मुताबिक, SIR का उद्देश्य चुनावों को निष्पक्ष बनाना है.. लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया अब राजनीतिक हथियार बन गई है.. गुजरात में SIR दिसंबर 2025 में शुरू हुआ.. और जनवरी 2026 तक चला.. जहां ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद लाखों आपत्तियां आईं..
गुजरात में SIR की प्रक्रिया को देखें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं.. RTI से मिली जानकारी के अनुसार.. गुजरात की मतदाता सूची में 5.08 करोड़ से घटकर 4.34 करोड़ रह गई.. यानी 73.73 लाख नाम हटाए गए.. यह 14-15% की कमी है.. जो 2002 के SIR से बहुत ज्यादा है.. 2002 में सिर्फ 60,494 नाम हटे थे.. और कुल सूची में 0.19% की बढ़ोतरी हुई थी.. इस बार शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा.. जैसे सूरत में 25.7% और अहमदाबाद में 23% नाम हटे.. माइग्रेशन, डुप्लिकेट वोट और मौतें कारण बताए गए हैं.. लेकिन आरोप है कि यह चुन-चुनकर किया गया.. कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी ने खुलासा किया कि भाजपा कार्यालयों से फॉर्म 7 भेजकर 14-15 लाख कांग्रेस समर्थक वोटर्स के नाम हटाए गए.. उनके अपने क्षेत्र में 24,000 और दरियापुर में 28-29,000 आपत्तियां दर्ज हुईं.. मकर संक्रांति के बाद अचानक लाखों फॉर्म 7 जमा हुए.. जिनमें एक ही नाम से दर्जनों आपत्तियां थी.. कांग्रेस का कहना है कि नाम किसी के.. हस्ताक्षर किसी के, लेकिन चुनाव आयोग चुप रहा..
राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोप सबसे तीखे हैं.. राहुल गांधी ने कई बार कहा कि SIR ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के संवैधानिक अधिकार को खत्म कर रहा है.. उन्होंने बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान में पैटर्न बताया.. जहां भाजपा को हार दिखती है, वहां वोटर्स गायब हो जाते हैं.. गुजरात में उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी पसंद की मतदाता सूची बना रही है.. पिछड़ों और दलितों को हटा रही है.. कांग्रेस ने दावा किया कि नवसारी लोकसभा क्षेत्र (सीआर पाटिल का) की चोरयासी विधानसभा में 6.09 लाख वोटर्स में से 30,000 फर्जी हैं.. डुप्लिकेट नाम, स्पेलिंग गलतियां, पता बदलकर दोबारा नाम दर्ज कराए गए हैं.. पूरे गुजरात में 62 लाख से ज्यादा फर्जी नाम हो सकते हैं.. राहुल ने 2023 मध्य प्रदेश चुनावों में भी 30-35 लाख वोटों की कमी को SIR से जोड़ा.. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं, बल्कि साजिश का हिस्सा है.. कांग्रेस ने पत्र लिखकर आपत्तियों की जानकारी मांगी, लेकिन जवाब नहीं मिला..
चुनाव आयोग कहता है कि SIR एक कानूनी प्रक्रिया है.. जो मतदाता सूची को सटीक बनाती है.. राहुल गांधी के आरोपों पर आयोग ने कहा कि वे SIR का समर्थन करते हैं या विरोध.. क्योंकि SIR डुप्लिकेट वोटर्स हटाती है.. बिहार में 65 लाख नाम हटे.. लेकिन कांग्रेस ने एक भी अपील नहीं की.. आयोग ने हरियाणा में भी कहा कि डुप्लिकेट वोटर्स पर कोई सबूत नहीं दिए गए.. गुजरात में आयोग ने कहा कि प्रक्रिया पारदर्शी है.. आपत्तियां जांच के बाद ही स्वीकार होती हैं.. लेकिन विपक्ष कहता है कि आयोग डिलीटेड वोटर्स का ब्रेकडाउन नहीं देता.. कितने माइनॉरिटी, कितने दलित? सुप्रीम कोर्ट ने भी जनवरी 2026 में आयोग से पूछा कि माइग्रेशन का बहाना क्यों.. जबकि भाजपा कहती है विदेशी घुसपैठिए हटाए जा रहे हैं.. आयोग का कहना है कि यह चुनावों से पहले जरूरी है.. लेकिन BLO की खुदकुशी जैसी घटनाएं दबाव दिखाती हैं..



