असम में क्यों नहीं थम रहा बाढ़ का कहर? 101 मौतें, 1.26 लाख लोग प्रभावित
असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर है, जहां 101 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 जिलों के 1.26 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं. गोलाघाट, शिवसागर और नगांव सर्वाधिक प्रभावित हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर है, जहां 101 लोगों की मौत हो चुकी है और 10 जिलों के 1.26 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं. गोलाघाट, शिवसागर और नगांव सर्वाधिक प्रभावित हैं.
असम में भारी बारिश के बाद पैदा हुई बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है. 10 अगस्त की असम फ्लड रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 101 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं राज्य के 10 जिलों में 1,26,431 लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं.
DRIMS की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का असर राज्य के 25 राजस्व सर्किल और 458 गांवों तक पहुंचा है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अब भी बाढ़ की मुश्किलों से जूझ रहे हैं. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित गोलाघाट जिला है. यहां 71,061 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में 21,600, नगांव में 16,908 और जोरहाट में 13,166 लोग प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा चराइदेव में 2,539, कार्बी आंगलोंग में 852 और दरांग में 305 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है.
इन जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान
बाढ़ प्रभावित जिलों में नगांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजाई, दरांग, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर, कछार, चराइदेव और जोरहाट शामिल हैं. इन क्षेत्रों में बाढ़ के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों के सामने आवागमन समेत कई तरह की परेशानियां बनी हुई हैं. हालांकि राज्य के कुछ हिस्सों में बाढ़ का पानी घटने लगा है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और मौतों का आंकड़ा 101 तक पहुंचने से प्रशासन की चुनौती अभी भी बनी हुई है. लगातार बारिश के कारण नदियों और जलस्रोतों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है.
बाढ़ से बिगड़े हालात
असम में हर साल बाढ़ बड़ी आबादी के लिए संकट लेकर आती है. इस बार भी भारी बारिश के बाद कई जिलों में हालात बिगड़े. अब राहत एजेंसियों और जिला प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने और हालात सामान्य करने की चुनौती है. फिलहाल प्रशासन की नजर जलस्तर और मौसम की स्थिति पर बनी हुई है. आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि बाढ़ का संकट और बढ़ता है या प्रभावित इलाकों में राहत की स्थिति तेजी से सामान्य होती है.



