ब्राह्मणों के अपमान के आरोपों में घिरी Yogi सरकार, Brajesh Pathak ने खोल दिया मोर्चा

बीते कल हुए SI भर्ती परीक्षा के एक सवाल में अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक जवाब पूछा गया था और ऑप्शन्स में पंडित भी दिया गया था..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीते कल उत्तर प्रदेश में पुलिस सब-इंस्पेक्टर यानी SI भर्ती परीक्षा का एक सवाल अब विवाद विवाद की वजह बन गया है…और तो और इस विवाद में विपक्ष नहीं बल्कि योगी सरकार अपनो के ही निशाने पर आ गई है…SI भर्ती परीक्षा के किस सवाल पर अपनो के ही निशाने पर आई योगी सरकार और आखिर क्या है पूरा विवाद,

बीते कल हुए SI भर्ती परीक्षा के एक सवाल में अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक जवाब पूछा गया था और ऑप्शन्स में पंडित भी दिया गया था…इसी को लेकर अब ब्राह्मण समाज के कई संगठनों ने नाराजगी जताई है और इसे अपने सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है…अब सोशल मीडिया पर ये सवाल वायरल होते ही बहस तेज हो गई…कई लोग पूछ रहे हैं कि आखिर भर्ती परीक्षा के पेपर में पंडित शब्द को इस तरह के सवाल से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी…कुछ लोगों का कहना है कि ये सिर्फ एक प्रश्न बनाने की गलती है…लेकिन दूसरी तरफ कई लोग इसे ब्राह्मणों का अपमान बता रहे हैं…यही वजह है कि अब ये मामला केवल एक परीक्षा का सवाल नहीं रहा…बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है…

दरअसल, उत्तर प्रदेश में आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के हिंदी सेक्शन में एक सवाल पूछा गया था कि…अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द क्या होगा?…इसके चार ऑप्शन्स दिए गए थे…उन्हीं ऑप्शन्स में एक ऑप्शन पंडित भी था…सवाल सामने आने के बाद कई लोगों ने कहा कि पंडित शब्द को अवसरवाद या मौके के हिसाब से बदलने वाले व्यक्ति के रूप में पेश करना गलत है…ब्राह्मण समाज के लोगों का कहना है कि…पंडित शब्द हमेशा से विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के रूप में इस्तेमाल होता आया है…ऐसे में इस शब्द को इस तरह के सवाल में जोड़ना उनकी भावनाओं को आहत करने वाला है…

इस सवाल के सामने आने के बाद कई ब्राह्मण संगठनों ने खुलकर नाराज़गी जताई है…उनका कहना है कि ये केवल एक शब्द नहीं बल्कि एक पूरे समाज की पहचान है…कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ब्राह्मण समाज ने हमेशा भाजपा का साथ दिया है…लेकिन अब उसी सरकार में उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है…कुछ संगठनों का कहना है कि ये पहली बार नहीं है जब उन्हें ऐसा महसूस हुआ हो….उनका आरोप है कि पिछले कुछ समय से ऐसे कई मामले सामने आए हैं…जिनमें ब्राह्मण समाज को लेकर विवाद खड़े हुए…इसी वजह से इस सवाल को लेकर उनकी नाराजगी और भी ज्यादा बढ़ गई है…

इस मामले में सबसे दिलचस्प बात ये है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने भी इस सवाल पर आपत्ति जताई है…उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्राजेश पाठक ने इस सवाल को गंभीर बताया और कहा कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली चीज़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा…उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी होगी…एक्स पर पोस्ट करते हुए डिप्टी सीएम ने लिखा कि…उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है।

सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं ।संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी तरह भाजपा विधायक रमेश चंद्र मित्रा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस सवाल पर आपत्ति जताई…उन्होंने कहा कि…हिंदी पेपर में पूछा गया ये सवाल बेहद आपत्तिजनक और संवेदनशील है…उनके अनुसार, ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ का सही उत्तर अवसरवादी होता है, लेकिन विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द को शामिल करना गलत है…भाजपा विधायक ने कहा कि…पंडित शब्द विद्वान और धार्मिक सम्मान से जुड़ा होता है…इसलिए इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना अनुचित और असंवेदनशील है…इसके साथ ही रमेश चंद्र मित्रा ने पेपर सेट करने वाली कमेटी के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है…

जबकि, भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि…जिस तरीके से इस प्रश्न को बनाया गया है और पंडित शब्द को फिर से टारगेट किया गया है जो बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में मुख्यमंत्री जी से निवेदन करता हूं…जिन लोगों ने इस मानसिकता के साथ प्रश्न पत्र बनाया है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो उनको जेल भी भेजा जाना चाहिए जैसा कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा है मैं भी चाहता हूं कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो हर जात ने देश की आजादी के लिए बहुत काम किया है उनमें से ब्राह्मणों का भी बहुत बड़ा श्रेय और योगदान है…

तो जैसा कि आपने देखा कि SI परीक्षा में सवाल के जवाब में ऑप्शन में पंडित होने को लेकर  किस तरह से खुद योगी सरकार में मौजूदा डिप्टी सीएम से लेकर भाजपा के तमाम नेता नाराजगी जाहिर कर रह हैं और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं…वहीं इस विवाद के बाद कुछ लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि…क्या सच में सरकार ब्राह्मण समाज को निशाना बना रही है…कुछ ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई ऐसे विवाद सामने आए हैं…जिनमें उन्हें लगा कि उनके सम्मान को ठेस पहुंची है……

वहीं इसे लेकर भाषा विशेषज्ञों का कहना है कि पंडित शब्द का मूल अर्थ विद्वान व्यक्ति होता है…संस्कृत और हिंदी साहित्य में ये शब्द अक्सर किसी ज्ञानी व्यक्ति या विद्वान के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है…हालांकि, उत्तर भारत में ये शब्द ब्राह्मण समुदाय के साथ भी जुड़ गया है…इसलिए जब इसे किसी नेगेटिव वे में इस्तेमाल किया जाता है…तो विवाद खड़ा हो जाता है…

इस पूरे विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने अब चुनौती है कि…वो इस मुद्दे को कैसे संभालती है…सरकार पहले ही भर्ती परीक्षाओं को लेकर सख्त रुख दिखाती रही है…मुख्यमंत्री कई बार कह चुके हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएग…लेकिन इस बार मामला पेपर लीक या परीक्षा में धांधली का नहीं बल्कि प्रश्न की भाषा और सामाजिक संवेदनशीलता का है…वहीं इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने संदर्भित प्रश्न के संबंध में जांच के आदेश दिए हैं…मामले में सीएम योगी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई थी…

अब इसे लेकर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई दे रहा है…एक तरफ लोग इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बता रहे हैं…उनका कहना है कि भर्ती परीक्षा में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए…दूसरी तरफ कुछ लोग कह रहे हैं कि ये एक सामान्य सवाल हो सकता है और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है…लेकिन, सवाल ये है कि ये राजनीति में ये इतना बढ़ा मामला क्यों?….

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं…ब्राह्मण समाज को भाजपा का एक बड़ा समर्थक माना जाता है…ऐसे में इस तरह का विवाद राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो जाता है…विशेषज्ञों का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर सकता है…जबकि सरकार इसे जल्दी से जल्दी शांत करना चाहेगी…

लेकिन, इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है कि…क्या ये सिर्फ quesyion paper तैयार करने की गलती थी या फिर किसी की लापरवाही?…हालांकि, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा…लेकिन इतना तो तय है कि एक छोटे से सवाल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है…पुलिस SI भर्ती परीक्षा का ये सवाल अब केवल परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं रह गया है…बल्कि, ये अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है…

ब्राह्मण समाज के कुछ संगठन इसे अपमान बता रहे हैं…विपक्ष सरकार पर हमला कर रहा है और सरकार जांच की बात कर रही है…ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाती है…क्योंकि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े ऐसे विवाद केवल एक शब्द का मामला नहीं होते…बल्कि वो सीधे समाज की भावनाओं और सरकार की संवेदनशीलता से जुड़े होते हैं..

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