यूसुफ पठान को मिला बड़ा प्रमोशन, TMC के बागी सांसद बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान को नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है... उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.. यूसुफ पठान के इस नए पद पर पहुंचने के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है.. गुजरात से आने वाले यूसुफ पठान का राजनीतिक सफर भले ही अपेक्षाकृत नया हो.. लेकिन क्रिकेट की दुनिया में उनकी पहचान काफी बड़ी है.. वहीं अब NCPI में मिली इस अहम जिम्मेदारी को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है.. वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यूसुफ पठान आने वाले दिनों में NCPI का प्रमुख चेहरा बन सकते हैं..
NCPI की अध्यक्ष फिलहाल काकोली घोष दस्तीदार हैं.. जबकि पार्टी की स्थापना शेवड़ी कुंडू ने की थी.. यूसुफ पठान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर उनकी भूमिका अचानक काफी महत्वपूर्ण हो गई है.. खास बात यह है कि यूसुफ पठान तृणमूल कांग्रेस से बगावत करने वाले सांसदों में शामिल हैं.. ऐसे में पार्टी में उनका यह एलीवेशन केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति है.. या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति भी है.. इस पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.. यूसुफ पठान के पास सेलिब्रिटी स्टेटस है.. और उनकी लोकप्रियता क्रिकेट के मैदान से लेकर आम जनता तक रही है.. इसलिए NCPI में उनकी बढ़ती भूमिका को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है..
यूसुफ पठान के अलावा तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाने वाले कई सांसदों के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी लगातार अटकलें चल रही हैं.. सितंबर 2026 में कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र वर्मा बासुनिया ने एक बड़ा दावा किया था.. उन्होंने कहा था कि NCPI में शामिल 20 बागी सांसदों में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं.. बासुनिया के इस दावे ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी थी.. हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित सांसदों के आधिकारिक फैसले और राजनीतिक घटनाक्रम से ही साफ होगी..
जगदीश चंद्र वर्मा बासुनिया के दावे के मुताबिक.. इन 20 सांसदों में 17 हिंदू सांसद हैं.. इससे पहले ऐसी अटकलें भी सामने आई थीं.. कि बागी सांसदों में शामिल तीन मुस्लिम सांसद वापस तृणमूल कांग्रेस के साथ जा सकते हैं.. हालांकि, बाद में इन तीनों सांसदों की ओर से बीजेपी को समर्थन देने की बात कही गई थी.. इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में यूसुफ पठान को NCPI का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने ने इस पूरे घटनाक्रम को.. और दिलचस्प बना दिया है.. वहीं अब सवाल यह है कि यूसुफ पठान और दूसरे बागी सांसद आने वाले दिनों में किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ते हैं..
यूसुफ पठान के साथ अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान जैसे मुस्लिम सांसदों को लेकर भी अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं.. इन सांसदों के सामने अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखने की चुनौती है.. पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कई सीटों पर महत्वपूर्ण मानी जाती है.. ऐसे में इन सांसदों के किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले का उनके क्षेत्रों की राजनीति पर असर पड़ सकता है.. यही वजह है कि बीजेपी में जाने की अटकलों के बीच इन सांसदों के भविष्य को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं..
आपको बता दें कि यूसुफ पठान को NCPI में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब एक और सवाल चर्चा में है.. क्या यूसुफ पठान इस पार्टी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाएंगे.. खास तौर पर गुजरात को लेकर यह सवाल इसलिए उठ रहा है.. क्योंकि यूसुफ पठान का संबंध गुजरात से है.. अगर आने वाले समय में वह NCPI के संगठन को गुजरात तक विस्तार देने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.. तो वहां की राजनीतिक तस्वीर पर भी चर्चा होना स्वाभाविक है.. गुजरात में बीजेपी के अलावा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी प्रमुख राजनीतिक दलों के रूप में मौजूद हैं.. ऐसे में किसी नए राजनीतिक संगठन का विस्तार वहां नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दे सकता है..
गुजरात में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं.. ऐसे में NCPI में यूसुफ पठान की नई जिम्मेदारी को गुजरात की आगामी राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है.. हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पार्टी गुजरात में किस स्तर पर संगठन खड़ा करेगी.. या यूसुफ पठान को वहां कितनी बड़ी भूमिका दी जाएगी.. अभी तक सामने आए घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि.. उनकी राजनीतिक सक्रियता पर बंगाल के साथ-साथ गुजरात में भी नजर रहेगी.. क्रिकेट की वजह से यूसुफ पठान की पहचान देशभर में है.. और यही लोकप्रियता किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए एक संभावित राजनीतिक पूंजी हो सकती है..



