गलती से भी सोनी का टीवी मत लेना, रो पड़ोगे!

पूरा मामला सोनी ओएलईडी ब्राइवा का

  • क्रोमा से खरीदारी की गलती भी मत करना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। यदि आप टीवी खरीदने निकले हैं तो जरा ठहर जाइए कहीं ऐसा न हो कि दुकान से सोनी कंपनी का महंगा ओएलईडी टीवी लेकर घर आएं और कुछ ही हफ्तों बाद टीवी की जगह सर्विस सेंटर के चक्कर काटते रह जाएं। एक ग्राहक की शिकायत ने सोनी के प्रीमियम टीवी और क्रोमा की आफटर सेल सर्विस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब इतना बढ़ चुका है कि ग्राहक ने सोनी इंडिया और क्रोमा इंफिनिटि रिटेल लि. को सिर्फ 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि अब न मरम्मत चाहिए न रिप्लेसमेंट और न सोनी का कोई दूसरा टीवी हमे पूरा पैसा ब्याज सहित वापस चाहिए।
पूरा मामला Sony OLED BRAVIA 8 II, मॉडल नंबर 55XR80M2 का है जिसे शिकायतकर्ता मनीष मौर्या ने 7 जून 26 को मुंबई के अंधेरी स्थित क्रोमा स्टोर से खरीदा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक करीब एक महीने के भीतर ही टीवी में गंभीर तकनीकी खराबी सामने आ गई। सोनी के अधिकृत तकनीशियन ने टीवी की जांच और मरम्मत की लेकिन समस्या दोबारा पैदा हो गई। इसके बाद टीवी पूरी तरह बंद हो गया। इस मामले में सोनी कंपनी के पास दो सर्विस रिक्वेस्ट भी दर्ज कराई गयी जिनका शिकायत क्रम इस प्रकार है INCA2601200847 और INCA 2601532036।

टीवी आपका, पैसा मेरा पूरा वापस करो

शिकायतकर्ता ने अपने पहले कानूनी नोटिस में रिफंड रिपलेसमेंट का विकल्प रखा था लेकिन अब ग्राहक ने रिपलेस्मेंट का विकल्प वापस लेते हुए केवल फुट रिफंड चुना है। पत्र में टीवी की पूरी इन्वाईस/परचेज प्राइज लागू ब्याज सहित लौटाने की मांग की गई है। मनीष मौर्या का कहना है कि पहले कानूनी नोटिस में 30 लाख रुपये के मुआवजे और हर्जाने की मांग की गई थी और फुल रिफंड मांगने से यह दावा खत्म नहीं होगा। उन्होंने असुविधा सेवा में कमी, मानसिक परेशानी, व्यावसायिक कार्य में बाधा और कानूनी खर्च समेत अन्य दावों को सुरक्षित रखने की बात कही है। मनीष ने दोनों कंपनियों को 24 घंटे की डेडलाइन दी है। मांग की गई है कि इस अवधि में लिखित रूप से फुट रिफंड मंजूर किए जाने और उसकी प्रक्रिया शुरू होने की पुष्टि की जाए तथा रकम लौटाने की निश्चित समयसीमा बताई जाए।

बहुत हुआ पैसा रिफंड करो

मनीष मौर्या के मुताबिक उसकी सहमति से सोनी के अधिकृत प्रतिनिधि खराब टीवी को जांच और सर्विस के लिए अपने साथ ले गए। एक सप्ताह गुजर गया लेकिन टीवी वापस नहीं आया और समाधान भी नहीं मिला। यानी जिस प्रीमियम टीवी के लिए हमने ने पूरी कीमत चुकाई वह खरीद के महज तीन महीने के भीतर लंबे समय से उसके इस्तेमाल में ही नहीं है। मनीष ने सोनी और क्रोमा को भेजे अपने ताजा शिकायती पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि वह टीवी की मरम्मत स्वीकार नहीं करेगा। रिप्लेसमेंट भी नहीं चाहिए। सोनी का दूसरा मॉडल भी नहीं चाहिए। उनका कहना है कि बार बार खराबी और पहले किए गए सर्विस प्रयास के बाद वह इस लेन-देन को आगे जारी नहीं रखना चाहता।

तमिलनाडु विस में हंगामा, डीएमके और टीवीके सरकार में वार-पलटवार

  • मार्शल ने विधायकों को सदन से निकाला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को उस समय हंगामा हो गया जब द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के उस बयान को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की जिसमें उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। द्रमुक विधायकों ने इसके साथ ही नारेबाजी की, जिसके बाद मुख्य विपक्षी दल के कई विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही द्रमुक के सचेतक ई वी वेलु ने सोमवार को विजय द्वारा दिए गए बयान का हवाला देते हुए मांग की कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मुख्यमंत्री के संदर्भों को सदन के रिकॉर्ड से हटाया जाए, क्योंकि यह सदन के नियमों के विरुद्ध है। वेलु ने सरकारिया आयोग के संदर्भों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि आयोग ने माना था कि कोई अपराध नहीं हुआ था।
कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने सरकारिया आयोग की रिपोर्ट और ईडी के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर मुख्यमंत्री के बयान का बचाव किया। उन्होंने तत्कालीन द्रमुक सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को भी दोहराया। द्रमुक सदस्यों ने इसका विरोध किया। विधानसभा अध्यक्ष जे सी डी प्रभाकर ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों को सदन के रिकॉर्ड से हटाने की मांग खारिज कर दी, जिसके बाद द्रमुक विधायकों की नारेबाजी जारी रही।

आखिर कर दी न लल्लन ने ओछी हरकत

  • लल्लन टॉप ने शहीन/ नफीसा का इंटरव्यू तो किया लेकिन 4पीएम का नाम लिये बिना
  • 4पीएम की कामयाबी से जल रहा लल्लन टॉप, बीजेपी की बी टीम बनता जा रहा है चैनल!

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। इंडिया टुडे ग्रुप का वेब मीडिया हाउस लल्लन टॉप ने पत्रकारिता के नाम पर ऐसी ओछी हरकत की है कि मीडिया में काम करने वाले लोग खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं। दिल्ली की 4पीएम रिपोर्टर शाहीन और नफीसा के साथ हुए पुलिसिया जुल्म की कहानी तो लल्लनटॉप ने उठायी लेकिन पूरी रिपोर्ट में कही भी 4पीएम का नाम नहीं लिया। रिपोर्ट में शहीन नफीसा को 4पीएम सवांददाता नहीं बताया गया।
अगर आप को ऐसा करना था तो फिर इंटरव्यू क्यों लिया? और खबर उठाई तो यह बताने में शर्म क्यों आई कि इसकी शुरुआत आखिर हुई कहां से? शहीन/नफीसा प्रकरण को लेकर अब मीडिया के भीतर ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले को लगभग सभी बड़े टीवी चैनलों और वेब न्यूज प्लेटफॉर्म ने गंभीरता से उठाया। लल्लनटॉप ने भी शहीन नफीसा का इंटरव्यू किया, खबर को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दी और दर्शकों तक मामला पहुंचाया।

खबर सिर्फ कंटेंट नहीं होती

पत्रकारिता की दुनिया में खबर सिर्फ कंटेंट नहीं होती उसके पीछे रिपोर्टर की मेहनत जोखिम और स्रोत तक पहुंच भी होती है। खासकर तब जब किसी संवेदनशील मामले को सबसे पहले जमीन पर मौजूद रिपोर्टर सामने लाता है। यह सवाल पत्रकारिता की उस संस्कृति पर है जहां दूसरे की मेहनत से तैयार हुई खबर को उठाकर व्यूज तो हासिल किए जाएं लेकिन क्रेडिट देने के वक्त कैमरा दूसरी तरफ घुमा दिया जाए। क्योंकि खबर उठाना पत्रकारिता हो सकती है लेकिन खबर की जड़ बताना पत्रकारिता की ईमानदारी है। और सवाल यही है कि शहीन/नफीसा की कहानी में 4पीएम का नाम आखिर गायब क्यों था?

पत्रकारिता की आत्मा को ठेस पहुंचाई है लल्लन टॉप ने

लल्लन टॉप ने पूरी कवरेज में उस मूल पत्रकारिता का उल्लेख तक नहीं किया गया जिसके बाद यह मामला व्यापक मीडिया विमर्श का हिस्सा बना। 4पीएम ने इसी को लेकर लल्लनटॉप पर तीखा हमला बोला है। 4पीएम का कहना है कि दूसरे संस्थान शहीन नफीसा को 4पीएम की रिपोर्टर के तौर पर पहचान दे रहे थे तब लल्लनटॉप ने अपनी पूरी स्टोरी में 4पीएम का नाम लेने से परहेज क्यो किया। अगर किसी संस्थान ने किसी रिपोर्टर की मेहनत और उसके द्वारा सामने लाई गई खबर को आधार बनाकर अपनी स्टोरी तैयार की है तो कम से कम पत्रकारिता की बुनियादी ईमानदारी यह मांग करती है कि मूल रिपोर्टिंग का क्रेडिट दिया जाए। पूरा मामला क्रेडिट तक सीमित नहीं है अब सवाल लल्लनटॉप की पत्रकारिता की दिशा पर भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि लल्लनटॉप लगातार अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है और उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 4पीएम की बढ़ती पहुंच और कामयाबी से लल्लनटॉप खुद को असहज महसूस कर रहा है और इसी वजह से उसके कवरेज में 4पीएम को श्रेय देने से बचने की कोशिश दिखाई देती है।

योगी सरकार से सवाल पूछा तो हुदा जरीवाला हुईं गिरफ्तार

  • मस्जिद पर कार्रवाई के बाद उठी आवाज पर पुलिस का पहरा
  • सवालों का जवाब नहीं, गिरफ्तारी क्यों?
  • टिप्पणी के नाम पर सामाजिक कार्यकर्ता पर कार्रवाई क्या असहमति अब शांतिभंग हो गई?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सरकार के फैसले पर सवाल पूछना क्या अब अपराध बन गया है? सत्ता की कार्रवाई पर असहमति जताना क्या कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना जाएगा? और अगर किसी सामाजिक कार्यकर्ता की बात सरकार को असहज करती है तो उसका जवाब तर्क और तथ्य से दिया जाएगा या फिर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा? सहारनपुर में सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला की गिरफ्तारी के बाद यही सवाल तेजी से उठने लगे हैं। मामला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक हुदा जरीवाला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के जिलाधिकारी को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक तौर पर आपत्तिजनक एवं भडक़ाऊ टिप्पणी की।
अधिवक्ता दुष्यंत सिंह की शिकायत पर सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने उन्हें शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन इस कार्रवाई का दूसरा पहलू भी है क्या सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले हर व्यक्ति को भडक़ाऊ बताकर चुप कराया जा सकता है। हुदा जरीवाला के खिलाफ पुलिस का आरोप अभी जांच का विषय है। पुलिस का कहना है कि उनके एक वीडियो के सामने आने के बाद शिकायत की गई और शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि टिप्पणियों से क्षेत्र की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। लेकिन यही वह बिंदु है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच की रेखा पर बहस शुरू होती है।

महिला पत्रकारों से कथित मारपीट के विरोध में पत्रकारों ने सौंपा ज्ञापन

  • पत्रकार सुरक्षा आयोग के गठन समेत कई मांगें उठाईं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
उरई। नई दिल्ली में समाचार संकलन के दौरान 4पीएम की महिला पत्रकारों शाहीन खान एवं नफीसा खान के साथ पुलिस द्वारा कथित मारपीट एवं अभद्रता के विरोध में मंगलवार को डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब, जनपद जालौन के पदाधिकारियों एवं पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
जिलाध्यक्ष मनोज राजा के नेतृत्व में सौंपे ज्ञापन में कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों को समाज और शासन-प्रशासन के सामने लाने का कार्य करते हैं। ऐसे में समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के साथ मारपीट की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। विशेष रूप से महिला पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

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