चारों तरफ से घिरी ममता को सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद
कपिल सिब्बल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तत्काल सुनवाई को राजी

- टीएमसी का इलेक्शन सिंबल फ्रीज होने का मामला
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। चारोंतरफ से निराश होने केबाद टीएमसी व उसकी प्रमुख ममता बनर्जी ने सुप्रीमकोर्ट की चौखट पर गुहार लगाई है। उनकी याचिका शीर्ष अदालत ने सुनने केलिए स्वीकार कर ली है। टीएमसी का इलेक्शन सिंबल फ्रीज होने के मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल बहस करेंगे। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल और घासÓ को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी की ओर से मामले का सुप्रीम कोर्ट में उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए लगाने का भरोसा दिया।
ममता ने की थी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। 18 सितंबर को बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और जोड़ा घास-फूल चुनाव चिन्ह फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान खोने की तुलना एक मां के अपने बच्चे को खोने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला दिन बताया था। बनर्जी ने कहा था कि वह इस अंतरिम व्यवस्था को समझौते के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की असली पहचान और उसके फूल-घास वाले चुनाव चिह्न को वापस पाने के लिए राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तौर पर आखिरी दम तक लड़ेंगी।
आयोग ने कई महीनों तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया : सिब्बल
मामला कोर्ट के सामने रखते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने इस विवाद पर जून में सुनवाई शुरू की थी। ममता बनर्जी गुट ने जुलाई में आयोग के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया था। इसके बाद आयोग ने कई महीनों तक कोई फैसला नहीं लिया। सिब्बल के मुताबिक, जैसे ही पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी हुई, चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया दोनों सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद हुई थी टीएमसी में टूट
चुनाव आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी विधायक दल में हुई बगावत के बाद आया है, जो बाद में संसद तक फैल गई। जून में, 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर से मान्यता हासिल की। पांच दिन बाद, यह बगावत संसद तक पहुंच गई, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने एनसीपीआई का साथ दिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन किया।
टीएमसी के नाम चिन्ह और संगठन पर दो गुटों में विवाद
तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं. ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे का कार्यकाल खत्म हो चुका है और उसे जारी रखना वैध नहीं है। वहीं, ममता बनर्जी गुट इस दावे को खारिज करता है और अपने संगठनात्मक ढांचे को वैध मानता है। इसी विवाद के चलते मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा।
तत्काल रोक की मांग
कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हर दिन नए मापदंड तय कर रहा है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सिब्बल को रोकते हुए कहा कि अभी मामले के गुण-दोष पर बहस न की जाए उन्होंने कहा कि जब मामला सुनवाई के लिए आएगा, तब दूसरे पक्ष के पास भी अपनी दलील रखने का मौका होगा। कोर्ट ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए लेने का भरोसा दिया।
उपचुनाव 6 अक्टूबर को
पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। पश्चिम बंगाल में ये उपचुनाव इसलिए कराने पड़े क्योंकि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने नंदीग्राम सीट छोडऩे का फैसला किया, जबकि एजीयूपी नेता हुमायूं कबीर नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों से जीते थे और उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए
6 अक्टूबर के उपचुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके पारंपरिक ‘जोड़ा फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया गया। आयोग ने दोनों गुटों को अंतरिम तौर पर अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ीÓ चुनाव चिन्ह दिया गया है. वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेसÓ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू की गई है।




