दिल्ली की इमारतें बनीं मौत का जाल! 20 साल में 10 बड़े हादसे, इतने लोगों की मौत
सत्य निकेतन PG हादसे से इस समय पूरा देश दुख में है. चलिए एक नजर डालते हैं दिल्ली में पिछले 20 सालों में हुए इमारत हादसों पर.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सत्य निकेतन PG हादसे से इस समय पूरा देश दुख में है. चलिए एक नजर डालते हैं दिल्ली में पिछले 20 सालों में हुए इमारत हादसों पर.
इस वक्त देश में दिल्ली PG हादसे की खबर हर किसी की जुबां पर है. दरअसल, यहां सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर 1 बजे 30 साल पुरानी 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जिसमें 6 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई.
इस त्रासदी के बाद नगर निगम (MCD) भले ही पड़ोसी जर्जर इमारतों पर कार्रवाई और नोटिस जारी करने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि दिल्ली के लिए यह कोई पहला हादसा नहीं है. पिछले दो दशकों में इसी तरह के कई हादसे हुए हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, (2006 से 2026) के आंकड़ों पर नजर डालें तो जर्जर ढांचे, अवैध रूप से तानी गई मंजिलें, कमजोर नींव और बिना इजाजत खुदाई की वजह से दिल्ली में 102 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. चलिए एक नजर डालते हैं पिछले 20 सालों के उन खौफनाक इमारत हादसों पर जिन्होंने न जाने कितनी मासूमों की जान ले ली.
सत्य निकेतन हादसा (2026): दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में बिना मेंटेनेंस और सुरक्षा मानकों के चल रही 5 मंजिला पीजी इमारत अचानक ढह गई, जिसमें 6 छात्रों की मौत हुई.
साकेत (सैदुलाजाब) हादसा (2026): साकेत के पास बहुमंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल पर किए जा रहे अवैध निर्माण के बोझ को ढांचा सह नहीं पाया और गिर गया, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई.
रोहिणी सेक्टर हादसा (2026): लगातार हुई मूसलाधार बारिश के चलते रोहिणी इलाके में एक निर्माणाधीन 4 मंजिला इमारत का ढांचा गिर गया, जिसमें 3 लोगों की मौत हुई.
सत्य निकेतन हादसा (2022): इसी इलाके में चार साल पहले भी एक जर्जर भवन में मरम्मत के दौरान हादसा हुआ था, जिसमें 2 लोगों की जान गई थी.
मुस्तफाबाद हादसा (जुलाई 2022): उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद में 20 साल पुरानी 3 मंजिला जर्जर इमारत ढहने से 1 व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए थे.
सब्जी मंडी (मलका गंज) हादसा (सितंबर 2021): उत्तरी दिल्ली में स्थित 70 साल पुरानी एक 3 मंजिला जर्जर इमारत ढहने से 2 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी.
करोल बाग (देव नगर) हादसा (फरवरी 2019): देव नगर में एक पुरानी 4 मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी, हालांकि खुशकिस्मती से इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था.
चांदनी महल हादसा, पुरानी दिल्ली (सितंबर 2011): पास के प्लॉट में बिना सुरक्षा इंतजामों के बेसमेंट की खुदाई की जा रही थी, जिससे सटी हुई 4 मंजिला पुरानी इमारत ढह गई और 7 लोगों की मौत हो गई.
ललिता पार्क त्रासदी, लक्ष्मी नगर (नवंबर 2010): दिल्ली के इतिहास का सबसे भीषण और डरावना हादसा. यमुना के पानी के भराव और घटिया निर्माण के कारण 5 मंजिला अवैध इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी. इस भयावह हादसे में 71 लोगों की मौत हुई थी और 65 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.
उत्तम नगर हादसा (फरवरी 2007): पश्चिमी दिल्ली में एक निर्माणाधीन ढांचे के गिरने से 4 मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी.



