परीक्षा लीक पर महायुद्ध : क्लीन नीट के लिए अब टेलीग्राम पर ताला

  • पूरे देश की राजनीति नीट एग्जाम पर टिकी
  • हैकर्स और सरकार आमने सामने जीतेगा कौन?
  • 21-22 जून को नहीं चलेगा टेलीग्राम
  • 30 जून तक भारत में मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद रखने के निर्देश

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश में शायद ही कभी किसी परीक्षा पर इतनी राजनीतिक प्रशासनिक और नैतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हो जितनी इस बार नीट-यूजी-26 पर लगी हुई है। यह अब केवल मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की परीक्षा नहीं रह गई है। बल्कि यह परीक्षा सरकार की विश्वसनीयता सिस्टम की ईमानदारी और करोड़ों युवाओं के भविष्य की अग्निपरीक्षा बन चुकी है। पिछले वर्षों में पेपर लीक के आरोपों ने जिस तरह देश की सड़कों से लेकर संसद तक भूचाल पैदा किया उसने सत्ता के गलियारों को हिला दिया है। विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया अदालतों में सवाल उठे लाखों छात्रों का भरोसा टूटा और पूरे देश ने देखा कि एक लीक हुआ प्रश्नपत्र किस तरह राजनीतिक विस्फोट में बदल जाता है। शायद यही वजह है कि इस बार सरकार परीक्षा नहीं मानो युद्ध लड़ रही है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी आशंका है जिसने सरकार को अभूतपूर्व कदम उठाने पर मजबूर कर दिया? प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए अभेद्य इंतजाम डिजिटल निगरानी का जाल साइबर एजेंसियों की तैनाती और अब टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला। संदेश साफ है इस बार किसी भी कीमत पर पेपर लीक नहीं होना चाहिए। क्योंकि सरकार जानती है कि यदि परीक्षा पर आरोपों की एक बूंद भी गिरी यदि किसी कोने से भी लीक की भनक आयी यदि किसी चैनल पर एक वायरल स्क्रीनशॉट घूम गया तो उसका असर केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगा। राजनीतिक गलियारों में तूफान उठेगा विपक्ष को नया हथियार मिलेगा संसद से सड़क तक घमासान मचेगा और करोड़ों युवाओं के गुस्से की आग पूरे सिस्टम को अपनी चपेट में ले सकती है।

22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक

परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़े कदम के तहत केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के बाद पूरे भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम 21 जून को होने वाली नीट (यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले कथित पेपर लीक गलत जानकारी फैलाने वाले अभियानों और नकल कराने वाले नेटवर्क को रोकने के लिए उठाया गया है। एनटीए के एक बयान के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (एमईआईटीवाई) 2000 की धारा 69ए के तहत एक निर्देश जारी किया है। इसके तहत भारत में टेलीग्राम के इस्तेमाल पर 22 जून तक के लिए कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। इन पाबंदियों में परीक्षा का दिन और उसके ठीक बाद का समय शामिल है। इसके अलावा टेलीग्राम को निर्देश दिया गया है कि वह 30 जून तक भारत में अपने मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद रखे। एनटीए ने बताया कि इस फीचर का पहले गलत इस्तेमाल किया गया है। एनटीए ने कहा कि ये दोनों कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नकल कराने वाले उन संगठित गिरोहों की गतिविधियों को रोकने के लिए उठाए गए हैं जो कथित तौर पर दोबारा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को धोखा देने के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। एजेंसी ने गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4सी) की भूमिका पर भी जोर दिया। I4सी ने नीट उम्मीदवारों को निशाना बनाने वाले टेलीग्राम-आधारित धोखाधड़ी और गलत जानकारी के खिलाफ प्रयासों में समन्वय किया है।

लड़ाई सिर्फ छात्रों और परीक्षार्थियों की नहीं

आज लड़ाई सिर्फ छात्रों और परीक्षार्थियों की नहीं है। एक तरफ है दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा मशीनरी चलाने का दावा करने वाली सरकार। दूसरी तरफ हैं साइबर अपराधी पेपर माफिया हैकर्स और वह गिरोह जिनकी नजर हर साल करोड़ों के इस काले कारोबार पर रहती है। यह मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं एक तरफ सत्ता की प्रतिष्ठा दूसरी तरफ सिस्टम को चुनौती देने वाले नेटवर्क। मोदी सरकार के लिए भी यह परीक्षा बेहद निर्णायक है। क्योंकि अगर नीट बिना किसी विवाद के संपन्न होता है तो यह सरकार के लिए बड़ी प्रशासनिक जीत होगी। लेकिन यदि कहीं कोई सेंध लगती है कोई गड़बड़ी सामने आती है तो यह सिर्फ परीक्षा की विफलता नहीं मानी जाएगी। इसे व्यवस्था की नाकामी और सरकार की साख पर सीधा हमला माना जाएगा।इसलिए 22 जून तक देश एक अनोखे युद्ध का गवाह बनने जा रहा है।

धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ धरपकड़ शुरू

बिहार पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट ने हाल ही में छात्रों के लिए एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है जिसमें उन्हें सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए परीक्षा के पेपर तक पहुंचने के झूठे दावों से सावधान रहने को कहा गया। अहमदाबाद शहर की साइबर क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के सदस्यों को गिरफ्तार किया जो कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े घोटालों से जुड़े कई टेलीग्राम चैनल चला रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों ने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि नीट(यूजी) 2026 की दोबारा परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार 21 जून को आयोजित की जाएगी और कहा कि परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपनी तैयारी पर ध्यान दें, ऑनलाइन फैल रही बिना पुष्टि वाली जानकारी से बचें और परीक्षा से संबंधित अपडेट के लिए केवल आधिकारिक एनटीए चैनलों पर भरोसा करें। एनटीए ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे किसी भी धोखाधड़ी वाले प्रयास या संदिग्ध दावे की सूचना नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से दें। उसने सभी उम्मीदवारों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

24 घंटे में 1० लाख से ज्यादा डाउनलोड

इसके अलावा एनटीए ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करके बताया, एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की सुविधा शुरू होने के लगभग 24 घंटों में 10 लाख से ज्यादा छात्रों ने नीट यूजी-26 के लिए अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए हैं। हमारी टेक टीमें सर्वर पर पड़ने वाले लोड पर नजर रख रही हैं और एनटीए यह सुनिश्चित करेगा कि सभी उम्मीदवारों को परीक्षा से काफी पहले उनके एडमिट कार्ड मिल जाएं।

धोखाधड़ी वाली सेवाओं का खुलेआम प्रचार करते थे

एनटीए ने कहा कि राज्य पुलिस बलों और उसकी अपनी निगरानी प्रणालियों (जैसे ढ्ढ4सी) ने मिलकर कई ऐसे टेलीग्राम चैनलों, ग्रुप्स और ऑटोमेटेड बॉट्स को हटवाने में मदद की, जो परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी वाली सेवाओं का खुलेआम प्रचार करते थे। एनटीए के अनुसार इस कार्रवाई को एमईआईटीवाई का समर्थन प्राप्त था और यह केंद्रीय व राज्य अधिकारियों से जुड़ी एक व्यापक अंतर-एजेंसी कोशिश का हिस्सा थी। एनटीए ने कहा कि ये नयी पाबंदियां तभी लगाई गईं जब समस्या के बड़े पैमाने को देखते हुए अन्य उपाय जैसे विशिष्ट चैनलों को हटाना और प्रवर्तन कार्रवाई नाकाफी पाए गए। अधिकारियों ने इस कदम को एक सोची-समझी और अस्थायी प्रतिक्रिया बताया, जिसका मकसद संवेदनशील परीक्षा अवधि के दौरान कम से कम जरूरी पाबंदियां लगाना था।

लीक पेपर के लिए करोड़ों की मांग कर रहे थे

एजेंसी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक्ड नीट, री-नीट 26, प्राइवेट माफिया और इसी तरह के नामों से चल रहे कई टेलीग्राम चैनल परीक्षा के पेपर तक कथित पहुंच के बदले कुछ हजार से लेकर कई लाख रुपए तक की मांग कर रहे थे। एनटीए ने फिर से कहा कि कोई भी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है और चेतावनी दी कि प्रश्न पत्रों तक पहले से पहुंच देने का दावा करने वाली कोई भी बात धोखाधड़ी है। टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर से जुड़ा निर्देश हेरफेर किए गए डिजिटल सबूत बनाने की चिंताओं को दूर करने के लिए लाया गया था। एनटीए के अनुसार यह फीचर एडमिनिस्ट्रेटर को पहले से पोस्ट किए गए मैसेज को एडिट करने और अटैच की गई फाइलों को बदलने की सुविधा देता है जबकि ओरिजिनल पोस्टिंग का समय वही रहता है। अधिकारियों का मानना है कि इस क्षमता का गलत इस्तेमाल करके यह झूठा दावा किया गया कि परीक्षा से पहले ही परीक्षा के पेपर उपलब्ध थे।

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